अधूरी कहानी पूरी करने के लिए के लिए कई प्रकार से प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इनमें से कुछ में, सिर्फ़ कहानी का आशय या पृष्ठ भूमि बताई गई हो सकती है;किसी लोकोक्ति या मुहावरे को सत्य सिद्ध करते हुए कहानी दी जा सकती है; कहानी का कोई भाग जैसे प्रस्तावना अथवा अंतिम भाग दिया गया हो सकता है; अथवा छोटे बच्चों के लिए कहानी के कुछ मुख्य अंश या शब्द हटा कर रिक्त स्थान भरने को कहे जा सकते हैं।

यहाँ पर कहानी की प्रस्तावना देकर कहानी पूरी करने को कहा गया है। इस प्रकार की कहानियों को अपने विचारों के अनुरूप अंत दिया जा सकता है। इसमें प्ररंभिक हिस्से को ध्यान में रखते हुए कहानी को आगे बढ़ाना हिता है, साथ ही विचारों के पंखों को खुली उड़ान देते हुए कहानी का एक सार्थक अंत करना चाहिए।

याद रखने योग्य बिंदु:

“अधूरी कहानी पूरी करो” जैसे प्रश्नों में एक कल्पनाशील, तार्किक और आकर्षक कहानी लिखने की कला जरूरी होती है। ऐसे प्रश्नों का उत्तर लिखते समय निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए :

1. कहानी की मूल दिशा को समझो

दिए गए वाक्य को ध्यान से पढ़ो — यह एक संकेत (clue) है कि कहानी किस विषय, समय, या कल्पना की ओर जा रही है।

जैसे: “मानव ने स्वयं को पक्षियों की भाँति छोटा कर लिया…” — यह एक विज्ञान-कल्पना (sci-fi), प्राकृतिक जीवन या भविष्य की दुनिया की ओर इशारा कर रहा है।

2. कल्पना और यथार्थ का संतुलन बनाएँ

अधूरी कहानी में कल्पना की उड़ान हो सकती है, लेकिन कुछ तार्किक जुड़ाव भी ज़रूरी है ताकि पाठक उसे समझ सकें। पात्र, घटनाएँ और घटनाक्रम आपस में सुसंगत (consistent) होने चाहिए।

3. प्लॉट की संरचना का ध्यान रखें (Story Structure)

एक छोटी लेकिन पूर्ण कहानी भी तीन भागों में बाँटी जाती है:

आरंभ (Beginning) – पात्रों और स्थिति की भूमिका

मध्य (Middle) – समस्या या संघर्ष की उत्पत्ति

अंत (End) – समाधान या परिणाम

4. भावनाओं और संदेश को मत भूलो

कहानी के अंत में कोई भावनात्मक प्रभाव या सार्थक संदेश हो तो वह पाठक को ज़्यादा प्रभावित करती है। उदाहरण: प्रकृति का महत्व, तकनीक का दुरुपयोग, या मानवीय संबंधों का चित्रण।

5. भाषा शैली और प्रवाह

भाषा रोचक, सहज और चित्रात्मक होनी चाहिए ताकि दृश्य मन में उभरें। वाक्य छोटे रखें, और बोझिल विवरण से बचें।

6. लंबाई और समय सीमा का ध्यान रखें

अंतिम किंतु बहुत ही महत्त्वपूर्ण बात, “परीक्षा या प्रतियोगिता में यह प्रश्न सीमित समय में पूछा जाता है, इसलिए संक्षिप्त लेकिन प्रभावी उत्तर लिखें ।” साधारण तौर पर150–200 शब्द पर्याप्त होते हैं।

यहाँ पर दिए गए प्रश्न के लिए दो संबव उत्तर दिए गए हैं। छात्र इसे पढ़कर सही तरीका समझें और स्वयं कहानी लिखने का प्रयास करें।

उदाहरण 1:

जब मानव ने स्वयं को पक्षियों की भाँति स्वयं को छोटा करने की शक्ति हासिल कर ली और डिब्बे नुमा घरों में पेड़ पर रहने लगा। तब उसकी दुनिया बदल गई। बहुमंजिली इमारतें अब ऊँची अट्टालिकाओं की तरह दिखने लगीं। सीढ़ियों से चढ़ना कठिन हो गया।

यहां तक कि सीढ़ियों के बीच में भी छोटी सीढ़ी लगाने की आवश्ययकता महसूस होने लगी। जीवन के कई पहलुओं में चुनौतियां बढ़ गईं। हाथों और पैरों से काम करना आसान न रहा। पेड़ पर चढ़ने के लिए भी काफ़ी समय लगने लगा। हालांकि जब हम कठिनाइयों का सामना करते हैं, तब हमारे भीतर एक और अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है, जिससे हम नई संभावनाओं और अवसरों की ओर अग्रसर होते हैं। हम सीखते हैं कि किसी भी स्थिति को कैसे संभालना है और उस अनुभव का लाभ उठाकर आगे बढ़ सकते हैं।

इसी कारण मानव इस नई दुनिया में रोमांच भी अनुभव करने था। पेड़ों की टहनियाँ उसके लिए झूले जैसी बन गईं, और हवा के हल्के झोंके से वह उड़ने जैसा महसूस करने लगा। पेड़ों के खोखले तनों में उसने अपने लिए घर बना लिए, और घास के मैदान उसके लिए हरे-भरे जंगल बन गए। अधिक से अधिक पेड़ों के बीज फ़ैलाए जाने लगे। विशाल पेड़ों को कॉलोनियों की तरह विकसित किया जाने लगा। एक -एक पेड़ में अनेक डिब्बे्नुमा घर लटकने लगे। प्रकृति से नज़दीकी बढ़ गई। देखा कि सभी मनुष्यों के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध हो गई। खाने के सामान की भी बहुलता हो गई। इससे भुखमरी और गरीबी खतम हो गई।

पर सवाल यह था—क्या वह इस नई दुनिया में खुश रह पाया? या उसे फिर से अपनी पुरानी ऊँचाई की चाह सताने लगी? क्या मनुष्य ने अपनी अथाह कामनाओं पर विजय पा ली? या फ़िर से अधिक से अधिक वस्तुओं की कामनाओं से असंतुष्ट और संघर्ष रत है?

उदाहरण 2:

जब मानव ने स्वयं को पक्षियों की भाँति छोटा करने की शक्ति हासिल कर ली और डिब्बेनुमा घरों में पेड़ पर रहने लगा, तब उसने सोचा कि अब वह प्रकृति के अधिक निकट रहेगा। लेकिन जल्द ही उसे एहसास हुआ कि यह दुनिया जितनी सुंदर थी, उतनी ही भयावह भी।

पेड़ की दरारें उसके लिए गुफाएँ बन गईं, और छोटी-छोटी चींटियाँ उसके बराबर ताकतवर दिखने लगीं। एक दिन, जब वह पास की झील से पानी लेने गया, तो एक मेंढक ने उसे भोजन समझकर पकड़ने की कोशिश की। जैसे-तैसे बचकर वह अपने पेड़ में लौटा, लेकिन अब उसका मन विचलित था।

उसने सोचा—क्या यह शक्ति उसके लिए वरदान थी या अभिशाप? क्या छोटे आकार में जीवन जीना सुविधाजनक था, या इसमें छिपे हुए संघर्षों का कोई अंत नहीं था? उसके मन में यह सवाल घूम रहा था कि क्या उसकी विशेषता, जो उसे दूसरों से अलग करती थी, वास्तव में उसे खुशियों से भरा जीवन दे रही थी, या केवल असहायता और अकेलेपन की भावना को बढ़ा रही थी।

उसने अपनी क्षमता को न केवल फायदों बल्कि संभावित खतरों के दृष्टिकोण से भी देखना शुरू किया। यह विचार उसके लिए एक नई चुनौती थी, जो उसकी आत्मा के गहराइयों में एक नई सोच को जन्म दे रही थी। उसने सोचा कि काश! वह फ़िर से पहले जैसा हो जाय।

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