“क्या निराश हुआ जाए” पाठ पर अतिरिक्त प्रश्न //EXTRA QUESTIONS ON “KYA NIRASH HUA JAE’
प्रश्न 1:हमारे महापुरुषों ने कैसे भारत का सपना देखा था?
उत्तर : हमारे महापुरुषों ने एक ऐसे भारत का सपना देखा था जिसमें भारत की महान संस्कृति और आदर्श पोषित हों।किसी प्रकार का छल, कपट, भ्रष्टाचार और लूटपाट नहीं हो। उन्होंने ऐसे भारत का सपना देखा था, जिसमें सभी मिल-जुलकर रहें। सभी ईमानदारी और सच्चाई से अपना जीवनयापन करें।
प्रश्न 2.भ्रष्टाचार के विरुद्ध आक्रोश किस बात को प्रकट करता है?
उत्तर: भ्रष्टाचार के विरुद्ध आक्रोश इस बात को प्रकट करता है कि समाज में आज भी इन चीजों को गलत समझा जाता है ।यह गलत तरीके से धन और मान कमाने की कोशिश करने वालों की प्रतिष्ठा को कम करना चाहता है।
प्रश्न 3. लेखक ने ऐसा क्यों कहा कि बुराई में रस लेना बुरी बात है, अच्छाई में उतना ही रस लेकर उजागर न करना और भी बुरी बात है?
उत्तर: लेखक ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि अकसर देखा जाता है कि लोग दूसरों की बुराई को बढ़ा चढ़ा के बताते हैं , जिससे समाज में निराशा का वातावरण फैलता है और नकारात्मकता बढ़ती है । लेकिन लोग अच्छाई नहीं करते है। वे बुराई को रस लेकर बताते है लेकिन अच्छाईयों को नजर-अदांज करते है, भूल जाते है ऐसा करना बुरी बात है। जबकि अच्छाई की तारीफ़ करनी चाहिए, क्योंकि अगर अच्छाई की सराहना की जाए तो दूसरों में सकारात्मक संदेश जाएगा और दूसरे लोग भी उनसे प्रेरित हो भलाई का रास्ता चुनेंगे।
प्रश्न 4.जीवन के मूल्यों के प्रति आज हमारी आस्था क्यों हिलने लगी?
उत्तर: आज ईमानदारी से मेहनत करके जीविका चलाने वाले निरीह भोले-भाले लोग पिस रहे हैं और झूठ तथा फ़रेब का रोजगार करने वाले फल-फूल रहे हैं। ईमानदारी को मूर्खता का दूसरा नाम समझा जाने लगा है, सचाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है। ऐसी स्थिति में जीवन के महान मूल्यों के बारे में आज हमारी आस्था हिलने लगी है।
प्रश्न 5.कविवर रवींद्रनाथ ठाकुर ने भगवान से क्या प्रार्थना की थी?
उत्तर: कविवर रवींद्रनाथ ठाकुर ने भगवान से प्रार्थना की थी कि संसार केवल नुकसान ही उठाना पड़े, धोखा ही खाना पड़े तो ऐसे अवसरों पर भी हे प्रभो! मुझे ऐसी शक्ति दो कि मैं तुम्हारे ऊपर संदेह न करूँ।
प्रश्न6: लेखक का मन कभी-कभी क्यों बैठ जाता है?
उत्तर: लेखक का मन कभी-कभी बैठ जाता है क्योंकि समाचार-पत्रों में ठगी, डकैती, चोरी, तस्करी और भ्रष्टाचार के समाचार भरे रहते हैं। आरोप-प्रत्यारोप का कुछ ऐसा वातावरण बन गया है कि लगता है, देश में कोई ईमानदार आदमी ही नहीं रह गया है।इससे देश में निराशा और अविश्वास का माहौल महसूस होता है।
प्रश्न 7. लेखक के जीवन की उन दो घटनाओं का उल्लेख कीजिए , जिनसे लेखक के निराश मन को ढाँढस मिलता है ।
उत्तर: लेखक ने पाठ में दो घटनाओं का उल्लेख किया है ;जिनसे पता चलता है कि संसार से अच्छाई ओऊरी तरह खत्म नहीं हुई और अभी भी भारत के महान बनने की आशाएँ बनी हुई हैं
- पहली घटना रेलवे स्टेशन की है जिसमें लेखक ने गलती से टिकट बाबू को ज्यादा किराया दे दिया था और वे लेखक को ढूँढते हुए डिब्बे में आए और बकाया रुपये वापस कर दिए। उनके चेहरे में संतोष की गरिमा देखकर लेखक चकित रह गए। इस घटना से पता चलता है कि लोगों में अभी भी ईंमानदारी और सत्यता के प्रति विश्वास बना हुआ है।
- दूसरी घटना तब की है ,जब लेखक सपरिवार बस से यात्रा कर रहे थे तब रास्ते में बस खराब हो गई। ऐसे में रात में लेखक के बच्चे भूख -प्यास से परेशान थे। लेकिन जब कंडक्टर नई बस ले कर वापस पहुँचा तो लेखक के बच्चों के लिए दूध भी लेकर आया। इससे पता चलता है कि लोगों में दया और सहयोग की भावना जीवित है और वे एक -दूसरे को अकारण मदद करते हैं।



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