लोकोक्तियाँ

लोकोक्तियाँ लोक अनुभव से बनती हैं। समाज लंबे अनुभव से सीखे हुए ज्ञान को जब वाक्य में बांध देता है तो उसे लोकोक्ति, जनश्रुति , जनप्रवाद,या कहावत कहते हैं।
डॉ. भोलानाथ तिवारी के अनुसार, “विभिन्न प्रकार के अनुभवों, पौराणिक तथा ऐतिहासिक व्यक्तियों एवं कथाओं, प्राकृतिक नियमों एवं लोक विश्वास आदि पर आधारित चुटीला, सरगर्भित, सजीव, संक्षिप्त लोक प्रचलित ऐसी उक्तियों को लोकोक्ति कहते हैं जिनका प्रयोग बात की पुष्टि या विरोध, सीख तथा भविष्य कथन आदि के लिए किया जाता है।”
लोकोक्ति वाक्यांश न होकर स्वतंत्र वाक्य होते हैं। वे अपने में पूर्ण होती हैं। उनको किसी वाक्य के साथ प्रयोग करने की आवश्यकता नहीं होती। अवसर पड़ने पर उपयुक्त लोकोक्ति का प्रयोग मात्र ही अर्थ स्पष्ट कर देता है।
कुछ लोग मुहावरे और लोकोक्ति में अंतर नहीं कर पाते, पर यह दोनों अलग-अलग हैं। मुहावरे किसी वाक्य में वाक्यांश की तरह प्रयुक्त होते हैं जबकि लोकोक्ति लोक में पहले से प्रचलित कहानियों -किस्सों -घटनाओं का सार-संक्षेप होती हैं। लोकोक्ति एक पूर्ण वाक्य होती है न कि वाक्यांश । यहाँ पर कुछ लोकोक्तियाँ लिखी गई हैं जो पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगी।
अधजली गगरी छलकत जाए
अर्थ – कम ज्ञानी व्यक्ति ही ज्ञानी होने का दिखावा करता है
वाक्य में प्रयोग – रोहन को सिर्फ दो महीने हुए हैं इंजीनियरिंग जॉइन किए हुए ,किंतु इस तरह बात करता है मानो पूरा इंजीनियत बन गया हो। सच ही कहा है ,अधजल गगरी छलकत जाय ।
एक दिन की बादशाहत
अर्थ – कुछ दिनों की शानो शौकत होना
वाक्य में प्रयोग – मुकेश को कुछ दिनों के लिए फ़ैक्टरी सम्हालने की जिम्मेदारी मिली तो खूब खर्च करने लगा । एक दिन की बादशाहत मिली है तो पूरा फ़ायदा उठा रहा है।
अंत भला तो सब भला
अर्थ – परिणाम अच्छा हो जाय तो सब अच्छा होता
वाक्य में प्रयोग – मनोज मुतंशिर ने न जाने कितनी रातें मुंबई में भूखे पेट गुजारी और कितना संघर्ष किया पर सफलता पाने के बाद वे सब कष्ट सहना सार्थक हो गया। सच ही है अंत भला तो सब भला।
अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत
अर्थ – समय रहते काम ना करना बाद में पछताने से कोई लाभ नहीं
वाक्य में प्रयोग – सारे साल तुमने पढाई नहीं की और अब परीक्षाएं सर पर हैं तो पछतावा हो रहा है लेकिन अब इससे कोई लाभ नहीं ये तो वही बात हो गयी की अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत
भैंस के आगे बीन बजाना
अर्थ – मूर्ख व्यक्ति को ज्ञान की बातें बताना
वाक्य में प्रयोग – उस अनपढ़ मज़दूर को राजनीति की बात बता कर प्रभावित करना चाहते हो पर उसको तुम्हारी बात समझ नहीं आयी । ये तो भैंस के आगे बीन बजाना वाली बात हो गयी ।
अंधों में काना राजा होना- अर्थ – मूर्खों के बीच कम जानकर भी ज्ञानी माना जाता है- वाक्य में प्रयोग – अनपढ़ लोगों के बीच में दसवीं पास मोहन अंधों मे काना राजा बना हुआ है ।
हाथ कंगन को आरसी क्या, पढे-लिखे को फ़ारसी क्या?– अर्थ – प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती – जब मोहन ने कहा कि मुझे संगीत में प्रथम श्रेणी ्प्राप्त हुई है तो उसके मित्र मोहन का मज़ाक उड़ाने लगे। इस पर गुस्सा होकर मोहन ने कहा कि यदि तुम्हें मेरे गायन पर विश्वास नहीं तो मं अभी गा कर सुना सकता हूँ। हाथ कंगन को आरसी क्या, पढे-लिखे को फ़ारसी क्या?
मान न मान, मैं तेरा मेहमान – अर्थ – जब रोहित के मित्र बिना बुलाए उसके घर आकर रहने लगे तो रोहित की पत्नी मन ही मन सोचने लगी-” इनका तो यह हाल है कि मान न मान, मैं तेरा मेहमान।
अँधेर नगरी चौपट राजा, टका सेर भाजी टका सेर खाजा- अर्थ- उचित नेतृत्व न होने पर सदगुणों का आदर नहीं होता- भाई इस कंपनी में मालिक कोई ध्यान नहीं देता और उसके मातहत मैनेजर मनमानी करते रहते हैं \ यहाँ ज्यादा दिन रहना ठीक नहीं। अँधेर नगरी चौपट राजा, टका सेर भाजी टका सेर खाजा।
घोड़े बेच कर सोना- अर्थ-निश्चिंतता भरी गहरी नींद सोना- परीक्षा खत्म होते ही छात्र घोड़े बेच कर सोने लगे।
कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा- अर्थ- बेमेल वस्तुओं / व्यक्तियों का एक जगह एकत्र होना- पार्टी बनाने के लिये नेताजी ने अलग-अलग विचार धारा के लोगों को एक साथ जोड़ तो दिया,पर अब मतभेद हो रहे हैं । अब उन्हें देख कर सब कह रहे हैं ” कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा।”



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