एक बच्चे के साथ किताबों के ढेर के सामने हिंदी अनसीन गद्यांश का शीर्षक, जिसमें एक पेन और स्याही की दवात है।

1.निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक सही विकल्प को चुनकर उत्तर दीजिए-                                   

भारत को यदि हम त्योहारों का देश कहें तो अनुचित नहीं होगा. हमारे देश में वर्ष भर त्योहारों की धूम मची रहती है. हर बदलते मौसम के साथ ही कोई न कोई त्योहार अवश्य मनाया जाता है. ये त्योहार एक ओर हमें ऋतु परिवर्तन का सन्देश देते हैं तो दूसरी ओर उसके स्वागत हेतु हममें उत्साह-उमंग का संचार करते हैं. कुछ त्योहार धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं. ये सभी हमें एकता, प्रेम, भाई-चारा एवं सौहार्द का सन्देश देते हैं. वैसे भी हमारे देश में लगभग सभी धर्मों के निवासी हैं. भारत में सभी धर्मों को सम्मान प्राप्त है. सभी धर्मों के अनुयायियों को अपना धर्म पालन की पूर्ण स्वतंत्रता है. यही कारण है कि सभी त्योहारों को पूरा देश मिलजुलकर प्रसन्नता से मनाता है. हमारे देश के कुछ प्रमुख त्योहार हैं- होली, दीपावली, दशहरा, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी,रामनवमी, ईद,क्रिसमस गुरपुरब,महावीर जयंती आदि. दीपावली यदि हलकी ठंडक के साथ आरम्भ होकर शीत ऋतु के आगमन की सूचना देता है, तो रामनवमी ग्रीष्मऋतु की सूचना देता है. मकर संक्रांति एवं लोहड़ी का त्योहार शीत ऋतु की समाप्ति तथा वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है. इस प्रकार हर त्योहार किसी न किसी ऋतु के जुड़ा हुआ है. बच्चों के लिए मनाया जाने वाला त्योहार बाल-दिवस है जो हमारे स्वतंत्र देश के प्रथम प्रधानमंत्री चाचा नेहरू के जन्मदिन पर बच्चों को समर्पित है. हमारे तीन राष्ट्रीय त्योहार हैं -1 स्वतंत्रता दिवस -यह 15 अगस्त को मनाया जाता है. सन् 1947 में हमें इसी दिन आजादी मिली थी. 2-गणतंत्र दिवस – सन् 1950 में हमें पूर्ण स्वाधीनता प्राप्त हुई थी. हमारा संविधान बना था. 3- गांधी जयंती -यह हमारे राष्ट्रपिता बापू को समर्पित है. इस प्रकार हमारा देश सचमुच त्योहारों का देश है.

(क) केवल धार्मिक अनुष्ठानों से        (ख) एकता, प्रेम और भाईचारे से
(ग) व्यापार और आर्थिक गतिविधियों से  (घ) केवल ऋतु-परिवर्तन से

(क) बाल-दिवस बच्चों के अधिकारों को समर्पित है।
(ख) राष्ट्रीय त्योहार केवल एक धर्म विशेष से जुड़े हैं।
(ग) त्योहार ऋतु-परिवर्तन का संदेश देते हैं।
(घ) सभी धर्मों के अनुयायियों को अपने त्योहार मनाने की स्वतंत्रता प्राप्त है।

कथन (A): भारत को “त्योहारों का देश” कहना केवल धार्मिक विविधता के कारण है।
कारण (R): भारत में सभी धर्मों को पालन की स्वतंत्रता है और लोग मिलजुलकर सभी त्योहार मनाते हैं।

विकल्प:
(a) A और R दोनों सत्य हैं, तथा R — A का सही कारण है।
(b) A और R दोनों सत्य हैं, पर R — A का सही कारण नहीं है।
(c) A सत्य है, R असत्य है।
(d) A असत्य है, R सत्य है।

2.निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक सही विकल्प को चुनकर उत्तर दीजिए-                                  (3×1+2×2=7)

हमारे जीवन में उत्साह का विशेष स्थान है। किसी काम को करने के लिए सदा तैयार रहना तथा उस काम को करने में आनंद अनुभव करना उत्साह का मुख्य लक्षण है। उत्साह कई प्रकार का होता है परंतु सच्चा उत्साह वही होता है जो मनुष्य को कार्य करने के लिए प्रेरणा देता है।मनुष्य जब किसी के कष्ट को दूर करने का संकल्प करता है तब जिस सुख को वह अनुभव करताहै, वह सुख विशेष रूप से प्रेरणा देने वाला होता है। जिस भी कार्य को करने से मनुष्यमें कष्ट, दुःख या हानि को सहन करने की ताकत आती है, उन सब से उत्पन्न आनंद ही उत्साह कहलाता है। उदाहरण के लिए दान देने वाला व्यक्ति निश्चय ही अपने भीतर एक विशेष साहस रखता है और वह है धन-त्याग का साहस। यही त्याग यदि मनुष्य प्रसन्नता के साथ करता है तो उसे उत्साह से किया गया दान कहा जाएगा। इसी प्रकार युद्ध-क्षेत्र में वीरता दिखाने वाले तथा दया के लिए वीरता दिखाने वाले भी अपने-अपने क्षेत्र में उत्साह का कार्य करने वाले कहलाएँगे।

(क) साहस का महत्त्व (ख)उत्साह का महत्त्व

(ग)जीवन का उद्देश्य (घ)संकल्प और प्रेरणा

(क) किसी काम को करने के लिए प्रसन्न होकर सदैव तत्पर रहना।

(ख) दुःसाहस पूर्ण कार्य करना।

(ग) प्रसन्नचित रहना।

(घ) दूसरों की बढ़-चढ़ कर सहायता करना।

(क)सुख-त्याग का साहस

(ख)झूठ बोलने का साहस

(ग) प्राण त्याग का साहस

(घ) धन-त्याग का साहस

2.निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक सही विकल्प को चुनकर उत्तर दीजिए-                                   (3×1+2×2=7)

कला-कौशल तथा दस्तकारी भी देश की उन्नति के प्रमुख स्तंभ हैं। अतः प्रत्येक युवक कलाकार या दस्तकार बने और दूसरों को भी इस ओर प्रेरित करे। दैनिक व्यवहार में स्वदेशी वस्तु का प्रचलन बढ़ाएँ। इससे अपने देश के कारीगरों तथा दस्तकारों को लाभ होगा और उनकी दशा में सुधार होगा। देश का धन देश में रहेगा, देश की निर्धनता दूर होगी। नवयुवकों को चाहिए कि अन्य लोगों को भी देशी वस्तुओं के प्रयोग का महत्त्व समझाएँ और हर क्षेत्र में स्वदेशी का प्रचलन बढ़ाएँ।

स्वदेशी के अधिक प्रचलन के लिए उत्पादन वृद्धि भी आवश्यक है। अधिक उत्पादन होने से उन वस्तुओं का अधिक प्रयोग होगा। अधिक उत्पादन से ही देश में संपन्नता आएगी। अतः खेत, फैक्टरी, कारखाने व मिल हर क्षेत्र में उत्पादन वृद्धि के लिए युवकों को निष्ठापूर्वक प्रयत्न करना चाहिए, तभी औद्योगिक शांति स्थापित होगी। माल की बहुतायत से महँगाई कम होगी और अन्न, वस्त्र एवं अन्य जीवनोपयोगी वस्तुओं के बाहुल्य से देश समृद्ध होगा और अधिकांश क्षेत्रों में आत्मनिर्भर् बनेगा।

(क) देश का कल्याण होगा।    (ख) देशवासियों का लाभ होगा।

(ग) देश के कारीगर समृद्ध होंगे। (घ)सभी

(क) सस्ती चीजों का            (ख) बढ़िया माल का

(ग) स्वदेशी वस्तुओं का         (घ) उपयोगी वस्तुओं का

(क) जब माल अधिक बनेगा    (ख) जब माल आयात होगा।

(ग) जब माँग कम होगी।      (घ) जब बाज़ार में स्पर्धा होगी।

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