(एक सुबह, दो पड़ोसी, राजेश और सुनीता, के बीच संवाद )

राजेश: नमस्ते सुनीता, तुमने फिर से कचरा फैला दिया है! यह क्या बात हुई?

सुनीता: ओह, नमस्ते राजेश! क्या हुआ? ऐसा कुछ नहीं है।

राजेश: तुम्हें पता है, तुम्हारा कचरा हमारे गली में क्यों फैला होता है?इससे पूरे मोहल्ले में गंदगी फैल रही है।

सुनीता: राजेश, लेकिन मैंने कचरा नहीं फैलाया है। मेरे परिवार द्वारा साफ सफाई का बहुत ध्यान रखा जाता है।

राजेश: यह आप कह रही हैं, लेकिन आज सुबह जब मैंने अपने बाहर की जगह को देखा, वहां कचरा देखकर मैं हैरान हो गया।

सुनीता: राजेश, यह मेरी गलती नहीं है। मैं तो सब कुछ साफ सुथरा रखती हूँ।

राजेश: ठीक है, तो फिर यह कचरा कहां से आया है? आसमान से तो नहीं गिरा होगा!

सुनीता: मैंने तो देखा नहीं, लेकिन शायद कोई अनजान लोग यहां आकर कचरा फैला रहा है।

राजेश: तुम्हारी इस बात का मतलब है कि बाहरी लोग हमारी गली में कचरा फैला रहे हैं और तुमने इसे देखा है ?

सुनीता: नहीं, राजेश, मुझे तो कुछ नहीं पता। लेकिन मैं इसे उठाने के लिए तैयार हूँ, हमें मिलकर इस पर नजर रखनी चाहिए।

राजेश: तुम सही कह रही हो, सुनीता। हमें अपने मोहल्ले को साफ सुथरा रखने के लिए मिलकर काम करना होगा। हम इसे समाधान के लिए क्या कदम उठा सकते हैं?

सुनीता: हम एक समूह बना सकते हैं और मोहल्ले के लोगों को जागरूक कर सकते हैं कि वे कचरा सही तरीके से फैकने का पालन करें। और यदि कोई इसे गलती से कर रहा है, तो हम उसे सही दिशा में मार्गदर्शन कर सकते हैं।

राजेश: एक अच्छा विचार है, सुनीता! हम समूह बनाएंगे और मिलकर इस समस्या का समाधान ढूंढ़ेंगे।

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(एक सुबह, दो पड़ोसी, सीमा और मीता, के बीच विवाद )

सीमा: नमस्ते मीता, तुमने क्यों फिर से कचरा यहां फैला दिया है? यह तुम्हारी आदत का हिस्सा बन गया है क्या?

मीता: नमस्ते सीमा, ऐसा कुछ नहीं है। मैंने तो सब कुछ साफ-सुथरा रखा है।

सीमा: तुम यह कह रही हो, लेकिन कचरा यहां कैसे आ रहा है?क्या यह आसमान से गिरा हुआ है?

मीता: मेरे घर के बाहर तो सब कुछ ठीक है, सीमा। शायद कोई अनजान व्यक्ति यहां आकर कचरा फैला रहा हो?

सीमा: (नाक मुड़ाते हुए) तुम्हें क्या लगता है, ्मुझे तो लगता है कि ये सब तुम्हारा ही किया-धरा है!

मीता: सीमा, अब तुम बहुत ही ज्यादती कर रही हो! मैंने कचरा नहीं फैलाया है, मेरे पास साक्ष्य भी है।

सीमा: (नाराजगी से) लेकिन ऐसा कैसे संभव है मीता! मुझे पता नहीं कि कौन कर रहा है।? लेकिन इस तरह गंदगी से संक्रामक बीमारियाँ मोहल्ले में फैलने लगेंगी। हमें इसे सुलझाने का कोई तरीका निकालना होगा।

मीता: हाँ तुम ठीक कह रही हो।हमें कुछ करना ही होगा ; जैसे -हम एक समूह बना सकती हैं और मोहल्ले को साफ़ सुथरा रखने के लिए जागरूक कर सकती हैं। साथ में मिलकर इस समस्या का समाधान ढूंढ़ सकती हैं।

सीमा: (विचारशील) हाँ, यह एक अच्छा विचार है। हम एक समूह बनाएंगी और सभी को सहयोग के लिए आमंत्रित करेंगी।

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[कविता और सोनिया हो पड़ोसी, है जो अपने मोहल्ले में कचरा फैलाने के विषय के बारे मे विवाद कर रहे है।

कविता : सोनिया में आजकल हमारे मोहल्ले में काफी कूड़ा-कचरा फैलाया जा रहा है ।

सोनिया : हाँ कविता, मैं भी मानती हूँ पर सिर्फ यहीं नहीं कि यह बात हमारे मोहल्ले में ही हो रही है। हर जगह साफ-सफाई की कमी हो रही है।

कविता: अगर सब, कचरा फैलाएं तब बहुत समस्याएँ हो जाएंगी; जैसे बिमारियाँ, वातावरण में की बदबू या दुर्गंध और गंदगी ।

सोनिया : कविता, तुम बिलकुल सही बात कह रही हो।

कविता: जब तुम यह सब जानती हो तो मेरे साथ झूठ क्यों बोल रही हो? आज सुबह ही मैंनै तुम्हें खिड़की से बाहर कचरा फ़ेंकते हुए देखा। तुम यह सब क्यों कर रही हो । जबकि तुम्हें अच्छी तरह पता है कि कचरा फैलाना बुरी बात है।

सोनिया : पर… पर… , कचरा हर दिन कूड़े के पास जाकर डालना कितना मुश्किल है!

कविता: क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारे इस आलस के कारण वातावरण में कितनी गंदगी और प्रदूषण फैल रहा है?

सोनिया:मैं वो क्यों सोचूँ? मेरा काम तो हो गया ना।

कविता : अगर तुम ऐसा सोचती हो तो मैं अभी मैनेजमेंट को बुला कर इस बारे में शिकायत करूँगी।

सोनिया: अरे नहीं! मैं अभी के अभी मेरा सारा कूड़ा-कचरा साफ करूँगी और आज से कभी भी कचरा नहीं फैलाउँगी । कविता,मुझे माफ़ कर दो मित्र ।

कविता: कोई बात नहीं ; देर आए, दुरस्त आए।

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[यह संवाद दो, पड़ोसियों रमा और अपराजिता के बीच है जो कचरा फ़ैलाने के बारे में विवाद कर रहे है। ]

रमा: अपराजिता ! तुम हमेशा अपना यह कचरा मेरे ही घर के सामने क्यो फेंकती हो?

अपराजिता :- नहीं। नहीं! मैंने तुम्हारे घर के सामने नहीं फ़ेंका है । यह तो घर के किनारे पर है।

रमा: लेकिन आएगा तो वह घर के सामने ही न!

अपराजिता : अगर तुम्हारे घर के सामने आ भी गया तो क्या हो जाएगा? वैसे भी यह सरकारी सड़क है।

रमा: वाह ! तुम पूछ रही हो क्या हो जाएगा? ्क्या क्यों नहीं होगा ? मेरे घर के लोग बिमार हो जाएंगे…!

अपराजिता : तुम अपनी यह कहानी कभी और सुनाना। अभी मुझे ऑफ़िस के लिए देर हो र्ही है।

रमा- नहीं, तुम कहीं नहीं जा जा रही हो, पहले मेरी बात सुनो । मेरे घर के लोग बीमार पड़ रहे है। घर के पास हमेशा गंदी बदबू आती है जिसके कारण हमारा घर पर रहना मुश्किल हो रहा है; और यह सिर्फ़ मेरी बात नहीं है। इससे मुहल्ले के सभी लोगों को बीमारी आ सकती है; जिसमें तुम भी शामिल हो। बात की गंभीरता की गंभीरता को समझो।

अपराजिता :ठीक कह रही हो तुम। मैं आगे से हमेशा ध्यान रखुँगी कि तुम्हें और दूसरों को भी मेरे वजह से कोई परेशानी न हो। मैं अपने बरताव के लिए माफ़ी माँगती हूँ

रमा: कोई बात नहीं, और अगर मैने भी कुछ उलटा सीधा बोल दिया हो तो उसके लिए मैं भी माफी मांगती हूँ। चलो बाद में मिलते हैं ।

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इस तरह हम देखते हैं कि इस विवाद संवाद-लेखन के माध्यम से कचरा फैलाने की समस्या को हल करने के लिए सही दृष्टिकोण और सहयोग बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस संवाद केखन के द्वारा व्यवहारिक जीवन की सजीव बात-चीत प्रस्त्तुत करने की कोशिश तो होनी ही चाहिए, साथ ही विवाद को सकारात्मक रूप देकर समस्या का समाधान पँहुचाने का भी प्रयास करना चाहिए। संवाद को पूरा लिखना चाहिए, जिससे बात-चीत के समाप्त होने या किसी विषय पर चर्चा का समाधान या पूरा होने का अनुभव हो। वार्ता को बीच में अचानक से समाप्त नहीं करना चाहिए।

उपरोक्त संवाद-लेखन द्वारा समूह बनाने और सहयोग करने के माध्यम से न सिर्फ अपनी समस्या का समाधान किया, बल्कि पूरे मोहल्ले को भी एक साफ़ और हरित पर्यावरण बनाने के लिए भी प्रेरित करने की कोशिश की है। यह विवाद संवाद एक सकारात्मक संदेश देता है कि समस्याओं का समाधान सहयोग, जागरूकता, और संगठन के माध्यम से हो सकता है।

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