आज का सुविचार
आज का सुविचार 11/10/2024
“सच्चा प्रेम बिना शर्त होता है, जिसमें स्वार्थ का कोई स्थान नहीं होता।”

दोस्तो! सच्चा प्रेम वह होता है जिसमें किसी भी प्रकार की शर्त या स्वार्थ नहीं होते। यह प्रेम अपनी पूर्णता में स्वतंत्र होता है, जिसमें केवल देने की भावना होती है, कुछ पाने की नहीं । बिना शर्त प्रेम व्यक्ति के आत्मिक स्तर को दर्शाता है, जहाँ वह दूसरे की भलाई और खुशी को सर्वोपरि मानता है, चाहे उसके बदले में कुछ मिले या न मिले।
शर्त रहित प्रेम का सबसे सुंदर उदाहरण माता-पिताऔर संतान के बीच का संबंध है। माता-पिता अपने बच्चे से निस्वार्थ प्रेम करते हैं, उसकी देखभाल करते हैं उसे पालते हैं , और उसके हर सुख-दुख में साथ रहते हैं । वह बदले में कुछ नहीं चाहते। वे अपने बच्चे की खुशी में ही अपनी खुशी खोजते हैं । यह प्रेम किसी भी शर्त या स्वार्थ से परे होता है।
सच्चे प्रेम में त्याग, धैर्य और समर्पण की भावना होती है। इसमें व्यक्ति अपने अहंकार और व्यक्तिगत इच्छाओं को पीछे छोड़ देता है। यह प्रेम दूसरों के प्रति सहानुभूति, करुणा, और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। इसके उदाहरण में पति-पत्नी का संबंध, सच्ची मित्रता, और गुरु-शिष्य का पवित्र संबंध भी आते हैं, जहाँ प्रेम की बुनियाद आपसी स्वार्थ से नहीं बल्कि एक-दूसरे की भलाई और विकास की भावना पर टिकी होती है। प्रेम के बिना जीवन मृत प्राण है। कबीर तो प्रेम रहित हृदय को मरे हुए के समान ही मानते हैं और कहते हैं प्रेम रहित हृदय उस मरे हुए खाल की तरह है जो लुहार की धौंकनी में लगा है। जिसमें साँस (हवा का आवागमन ) तो होता है किंतु वह प्राण रहित है।
जा घट प्रेम न संचरै, सो घट जान मसान।
जैसे खाल लुहार की, श्वास लेत बिन प्रान॥
कबीर दास
प्रेम की सर्वोत्कृष्टता ईश्वर प्रेम में दिखती है । ईश्वर के द्वारा प्राणी मात्र के लिए संपूर्ण जीवन भर की व्यवस्था की गई है है। किंतु मनुष्य यह सब विचारे बिना आमोद-प्रमोद में ही व्यस्त रहता है। किंतु कुछ ही व्यक्ति इस विचार को समझ पाते हैं और ईश्वर के प्रति प्रेम प्रकट कर पाते हैं। ईश्वर के प्रति प्रेम की भावना अत्यंत जरूरी है इस पर कबीर दास कहते हैं –
प्रेम भाव एक चाहिए, भेष अनेक बनाय ।
चाहें घर को बास कर, चाहे बन को जाय ॥
सच्चे प्रेम में समर्पण और विश्वास का गहरा रिश्ता होता है। यह प्रेम किसी भी परिस्थिति में स्थिर रहता है और कठिनाइयों का सामना धैर्य और समझदारी के साथ करता है। यही कारण है कि सच्चा प्रेम जीवन को सार्थक और आनंदमय बनाता है।
हमें उम्मीद है कि आज का सुविचार आपके जीवन में एक सकारात्मक परिवर्तन लाएगा।
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