NCERT Class 9 Hindi B SANCHAYAN 1 Chapter 3 KALLU KUMHAR KI UNAKOTI//संचयन 1 पाठ 3 कल्लू कुम्हार की उनाकोटी

संचयन 1 पाठ 3 कल्लू कुम्हार की उनाकोटी
लेखक परिचय :
नाम : के विक्रम सिंह
जन्म: 1938 मृत्यु :1913
के. विक्रम सिंह ने एक शिक्षक के रूप में अपनी जीवन यात्रा शुरू की । बाद में सरकारी नौकरी में तरक्की करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों में कार्यरत रहे। उन्होंने सूचना और प्रसारण मंत्रालय में निदेशक (फिल्म नीति) के पद पर कार्य किया । इसी क्षेत्र में रुचि बढ़ने पर बाद में सरकारी नौकरी को विदा कर सिनेमा और टेलीविजन के लिए वृत्त चित्र और फ़िल्में बनाने लगे।
मुख्य कार्य : विक्रम सिंह जी ने अनेक वृत्त चित्र और तेलीविजन धारावाह्क बनाए। जिनमें ’अंधी गली( 1994)’ ’न्यू डेल्ही टाइम्स(1985) के निर्माण में सहयोग के साथ ही तर्पण (1994) का निर्माण किया जो कि उनका यह बहुत प्रसिद्ध कार्य माना जाता रहा है। फिल्म सृजन (1994) के निर्देशन के अतिरिक्त उन्होंने ”कवि और कविता’ नामक शृंखला का निर्माण किया। उन्होंने साठ से भी अधिक वृत्त चित्र बनाए।
वे जनसत्ता नामक समाचार पत्र में नियमित रूप से स्तंभ लेखन करते थे।
पुरस्कार: सिंह ने तर्पण के लिए सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक के रूप में अरविंदन पुरस्कार प्राप्त किया। सन् 2004 में ’ कुछ गमें दौरां’ के लिए दिल्ली साहित्य अकादमी की तरफ़ से ’ ’साहित्यिक कृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया ।
Chapter 3 KALLU KUMHAR KI UNAKOTI SOLUTIONS
प्रश्न 1 – ‘उनाकोटी’ का अर्थ स्पष्ट करते हुए बतलाएँ कि यह स्थान इस नाम से क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर – उनाकोटी का अर्थ है एक कोटि, यानी एक करोड़ से एक कम। यहाँ दस वर्ग किलोमीटर से कुछ ज्यादा इलाके में पहाड़ों को अंदर से काटकर विशाल आधार-मूर्तियाँ बनाई गई हैं। कहा जाता है कि कहा जाता है कि यहाँ एक कोटि से एक कम शिव की मूर्तियाँ एक ही स्थान पर होने के कारण यह स्थान प्रसिद्ध है। यह एक प्रसिद्ध शिव तीर्थ है।
(2) पाठ के संदर्भ में उनाकोटी में स्थित गंगावतरण की कथा को अपने शब्दों में लिखिए।
Ans :- एक मिथक के अनुसार कहा जाता है कि एक ऋषि भगीरथ की प्रार्थना पर स्वर्ग से गंगा के अवतरित हुई थीं गंगा अवतरण के धक्के से कहीं पृथ्वी धँसकर पाताल लोक में न चली जाए , लिहाज़ा शिव को इसके लिए तैयार किया गया कि वे गंगा को अपनी जटाओं में उलझ में और इसके बाद इसे धीरे – धीरे पृथ्वी पर बहने दें। इसी चित्र को एक विशाल चट्टान पर चित्रित किया है। भगवान शिव का चेहरा एक पूरी चट्टान पर बना हुआ है और उनकी जटाएँ दो पहाड़ों की चोटियों पर फैली हुई हैं। भारत में शिव की यह सबसे बड़ी आधार-मूर्ति है। लेखक कहता है कि यहाँ पूरे साल बहने वाला एक झरना पहाड़ों से उतरता है जिसे गंगा जितना ही पवित्र माना जाता है।
(3) कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी से किस प्रकार जुड़ गया ?
Ans :- कहा जाता है कि कल्लू कुम्हार के कारण ही इस स्थान का नाम उनाकोटी पड़ा। वह पार्वती का भक्त था। वह शिव–पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर जाना चाहता था। परन्तु शिव ने एक शर्त रखी कि उसे एक रात में शिव की एक करोड़ मूर्तियाँ बनानी होगी। कल्लू कैलाश पर जाने की धुन में मूर्तियाँ बनाने में जुट गया, परन्तु सुबह जब मूर्तियाँ गिनी गईं तो एक मूर्ति कम थी। शिव को उसे छुड़ाने का बहाना मिल गया तथा कल्लू कुम्हार वहीं रह गया।
(4) ‘मेरी रीढ़ में एक झुरझुरी – सी दौड़ गई ‘ — लेखक के इस कथन के पीछे कौन – सी घटना जुड़ी है ?
Ans :- लेखक मनु में शूटिंग करने में व्यस्त था। तभी सी. आर. पी. एफ. के एक आदमी ने बताया कि निचली पहाड़ियों पर, जहाँ दो पत्थर पड़े हैं, वहाँ दो दिन पहले एक जवान को विद्रोहियों ने मार डाला था। उसके इतना कहते ही लेखक को इतना डर लगा जैसे कि उसकी रीढ़ में एक झुरझुरी-सी दौड़ गई।
(5) त्रिपुरा ‘बहुधार्मिक समाज ‘ का उदाहरण कैसे बना ?
Ans :- यहाँ उन्नीस अनुसूचित जनजातियाँ हैं साथ ही त्रिपुरा में लगातार बाहरी लोग आते रहे। बांग्लादेश से यहाँ निरंतर अवैध आवक होती रहती है। साथ ही असम और अप्श्चिमी बंगाल से भी लोग यहाँ प्रवास करते हैं । यहाँ के उन्नीस कबीलों में दो चकमा और मुघ महायानी बौद्ध हैं जो म्याँमार से यहाँ आए हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि त्रिपुरा में लगातार बाहरी लोग आते रहे। जिसके कारण विश्व के चार बड़े धर्म हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और बौद्ध धर्म के अनुयायी यहाँ मौजूद हैं। त्रिपुरा में लगातार बाहरी लोग आते रहे। इसी से यह राज्य बहुधार्मिक समाज का उदाहरण बना ।
(6) टीलियामुरा कस्बे में लेखक का परिचय किन दो प्रमुख हस्तियों से हुआ ? समाज – कल्याण के कायों में उनका क्या योगदान था ?
Ans :- टीलियामुरा कस्बे में लेखक का परिचय समाज सेविका मंजु ऋषिदास और लोकगायक हेमंत कुमार जमातिया नामक हस्तियों से हुआ। लोकगायक हेमंत कुमार जमातिया अपने जवानी के दिनों में पीपुल्स लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन के कार्यकर्ता थे किंतु बाद में उन्होंने हथियार बंद रास्ता छॊड़ मुख्य धारा से जुड़ने का निर्णय किया। चुनाव लड़ कर वे जिला परिषद के सदस्य बने साथ ही वे प्रसिद्ध लोक गायक भी थे जिन्हें उनकी योग्यता के लिए संगीत नाटक अकादमी का पुरस्कार मिला। इस प्रकार उन्होंने त्रिपुरा के लोक गीतों को पहचान व स्थान दिलाया। मंजु ऋषिदास आकर्षक महिला थीं और रेडियों कलाकार होने के अलावा नगर पंचायत में अपने वार्ड का प्रतिनिधित्व भी करती थीं। वे निरक्षर थीं। लेकिन अपने वार्ड की सबसे बड़ी आवश्यकता उन्हें पूरी जानकारी थी। उन्होंने वार्ड में नल लगवाने, नल का स्वच्छ पेयजल पँहुचाने और गलियों में ईंटें बिछवाने के लिए कार्य किया था।
(7) कैलासशहर के जिलाधिकारी ने आलू की खेती के विषय में लेखक को क्या जानकारी दी ?
Ans :- जिलाधिकारी ने आलू की खेती के विषय में लेखक को बताया कि आलू की बुआई के लिए पारंपरिक आलू के बीजों की ज़रुरत दो मिट्रीक टन प्रति हेक्टेयर होती है जबकि टी. पी. एस. की सिर्फ़ 100 ग्राम मात्रा एक हेक्टेयर होती है। त्रिपुरा से टी.पी.एस. को अब न सिर्फ असम, मिज़ोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश को ही भेजा जाता है, बल्कि अब तो विदेशो में जैसे बांग्लादेश, मलेशिया और विएतनाम को भी भेजा जा रहा है। टरू पोटैटो सीड्स एक उपजाऊ और लाभदायक खेती साबित हुई।
प्रश्न 8 – त्रिपुरा के घरेलू उद्योगों पर प्रकाश डालते हुए अपनी जानकारी के कुछ अन्य घरेलू उद्योगों के विषय में बताइए?
उत्तर – त्रिपुरा के लघु उद्योगों में लोकप्रिय घरेलू गतिविधियों में से एक गति-विधि अगरबत्तियों के लिए बाँस की पतली सींकें तैयार करना है। अगरबत्तियों के लिए बाँस की पतली सींकें तैयार करने के बाद अगरबत्तियाँ बनाने के लिए इन्हें कर्नाटक और गुजरात भेजा जाता है। इनका प्रयोग अगरबत्तियाँ बनाने में किया जाता है। इन्हें कर्नाटक और गुजरात भेजा जाता है ताकि अगरबत्तियाँ तैयार की जा सकें। त्रिपुरा में बाँस बहुतायत मात्रा में पाया जाता है। इस बाँस से टोकरियाँ सजावटी वस्तुएँ आदि तैयार की जाती हैं। घरेलू उद्योगों में उपलब्ध स्थानीय सामग्री का उपयोग होता है। इसमें घास या नारियल के पत्तों से झाड़ू बनाना, चूड़ी उद्योग, साबुन उद्योग, जूता बनाना , जूट का सामान , माचिस बनाना, चटाई आदि बनाने के घरेलू उद्योग शामिल हैं।




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