Top NCERT Class 10 Hindi B Sparsh Chapter 7 Solutions,पाठ 7 तोप

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तोप – कवि परिचय

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वीरेन डंगवाल का जन्म 5अगस्त 1947 को उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के कीर्तिनगर में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल में हुई और उच्च शिक्षा इलाहाबाद से हुई। ये एक शिक्षक थे और बाद में पत्रकारिता से भी जुड़े। इनके द्वारा रचित साहित्य में साधारण जनमानस की बाते थीं और उन बातों व दृश्यों का वर्णन किया गया जिसकी सामान्य तौर पर लोग उपेक्षा करते हैं। ऐसी ही साधारण चीजों और जीव-जंतुओं को इन्होंने कविता का आधार बनाया। इसी दुनिया में और दुष्चक्र में स्रष्टा दो प्रसिद्ध कविता संग्रह हैं जिनमें क्रमशः श्रीकांत वर्मा पुरस्कार और साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुए। इन्हें अन्य अनेक दूसरे पुरस्कार भी मिले। वीरेन डंगवाल ने कई दूसरी भाषाओं की कविताओं का भी हिंदी अनुवाद किया। 28 सितंबर 2015 में वीरेन का देहावसान हो गया।

तोप –कविता का सारांश

कविता तोप वीरेन डंगवाल के द्वारा लिखी एक कविता है जिसे उन्होंने इलाहाबाद कंपनी बाग में रखी एक तोप पर लिखा है। इस कविता के द्वारा कवि वीरेन ने तोप के माध्यम से ब्रिटिश शासन काल को याद किया है जब ब्रिटिश सरकार द्वारा इस तोप के मदद से भारतीय जनता पर अत्याचार किये गए। तब तोप का बहुत महत्त्व था। किंतु हमारे वीरों द्वारा इस सत्ता को उखाड़ फ़ेंका गया। आज तोप निस्तेज़ है किंतु हमारे जाबांजों की वीरता को याद रखने के माध्यम के रूप में तोप को धरोहर की तरह रखा गया है। तोप को आज भी साल में दो बार चमकाया जाता है किंतु तोप की आज पहले जैसी शान नहीं है । आज तोप से कोई डरता नहीं है । आज इसके ऊपर बच्चे बैठे रहते हैं और घुड़सवारी करते हैं। और अगर बच्चे न हों तो चिड़ियाँ इसके ऊपर बैठी चहचहाती रहती हैं और कई बार इसके मुहाने के भीतर भी घुस जाती हैं । इस के द्वारा कवि तोप के महत्त्वहीन होने को समझाते है। अंतिम पंक्ति द्वारा कवि वीरेन डंगवाल समझाते हैं कि कोई भी कितना ही महत्त्वपूर्ण क्यों न हो, वक्त के साथ उसका महत्त्व खत्म हो जाता है ।

तोप कविता का भावार्थ और सारांश

तोप कविता

कम्पनी बाग़ के मुहाने पर
धर रखी गई है यह 1857 की तोप

इसकी होती है बड़ी सम्हाल
विरासत में मिले
कम्पनी बाग की तरह
साल में चमकायी जाती है दो बार

सुबह-शाम कम्पनी बाग में आते हैं बहुत से सैलानी
उन्हें बताती है यह तोप
कि मैं बड़ी जबर
उड़ा दिये थे मैंने
अच्छे-अच्छे सूरमाओं के छक्के
अपने ज़माने में

अब तो बहरहाल
छोटे लड़कों की घुड़सवारी से अगर यह फारिग हो
तो उसके ऊपर बैठकर
चिड़ियाँ ही अकसर करती हैं गपशप
कभी-कभी शैतानी में वे इसके भीतर भी घुस जाती हैं
ख़ासकर गौरैयें

वे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप
एक दिन तो होना ही है उनका मुँह बन्द !

तोप –कविता का भावार्थ

काव्यांश 1 : कम्पनी बाग़ के मुहाने पर
धर रखी गई है यह 1857 की तोप

इसकी होती है बड़ी सम्हाल
विरासत में मिले
कम्पनी बाग की तरह
साल में चमकायी जाती है दो बार

संदर्भ: प्रस्तुत काव्यांश पाठ्य-पुस्तक स्पर्श के तोप नामक कविता का अंश है। इसके रचयिता वीरेन डंगवाल हैं। इस काव्यांश द्वारा कवि ने इलाहाबाद के कंपनी बाग में रखी गई तोप का परिचय दिया है ।

भावार्थ : कंपनी बाग में एक तोप धरोहर की तरह रखी गई है जो कि ईस्ट इंडिया कंपनी के समय को याद दिलाती है।जब 1857 में ईस्कीट इंडिया कंपनी भारत व्यापार करने आई थी और धीरे-धीरे भारत पर ही कब्ज़ा कर लिया।इसी की याद दिलाती यह तोप आज कंपनी बाग़ के प्रवेश द्वार पर रखी गई है इसकी बहुत देखभाल की जाती है। जिस तरह यह कंपनी बाग़ हमें विरासत में अंग्रेजों से मिला है, उसी तरह यह तोप भी हमें अंग्रेजों से ही विरासत में मिली है। जिस तरह कंपनी बाग़ की साल में दो बार अर्थात स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर बाग की अच्छे से देखरेख की जाती है उसी तरह इस तोप को भी साल में दो बार चमकाया जाता है।

काव्यांश 2 : सुबह-शाम कम्पनी बाग में आते हैं बहुत से सैलानी
उन्हें बताती है यह तोप
कि मैं बड़ी जबर
उड़ा दिये थे मैंने
अच्छे-अच्छे सूरमाओं के छक्के
अपने ज़माने में

संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी पाठ्य पुस्तक ‘ स्पर्श भाग -2 ‘ से ली गई हैं। इसके कवि वीरेन डंगवाल  हैं। इन पंक्तियों में कवि बताना चाहता है कि तोप के का प्रयोग किस लिए हुआ था और बताया गया है कि तोप कितनी ताकतवर थी।

भावार्थ :कवि कहते हैं कि प्रत्येक दिन सुबह -शाम बहुत सारे पर्यटक कंपनी बाग़ में घूमने के लिए आते हैं और तोप को देखते हैं एक तरह से इस प्रकार वे यह समझते हैं कि तब (कंपनी शासन में) यह तोप बहुत ताकतवर थी। इस तोप ने हमारे बड़े-बड़े वीरों के चिथड़े उड़ा दिए थे। अर्थात उस समय तोप का डर हर इंसान को था। इस प्रकार तोप आने वाले सैलानियों को अपने वैभव का परिचय भी देती है और साथ ही हमारे स्वतंत्रता सैनानियों का बलिदान भी याद दिलाती है।

काव्यांश 3 : अब तो बहरहाल
छोटे लड़कों की घुड़सवारी से अगर यह फारिग हो
तो उसके ऊपर बैठकर
चिड़ियाँ ही अकसर करती हैं गपशप
कभी-कभी शैतानी में वे इसके भीतर भी घुस जाती हैं
ख़ासकर गौरैयें

वे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप
एक दिन तो होना ही है उनका मुँह बन्द !

संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी पाठ्य पुस्तक ‘ स्पर्श भाग -2 ‘ से ली गई हैं। इसके कवि वीरेन डंगवाल  हैं। इन पंक्तियों में कवि कहना चाहता है कि किसी भी बुराई को हिम्मत और होंसलों के सहारे खत्म किया जा सकता है।

भावार्थ :कवि कहते हैं कि अब तोप की स्थिति बहुत बुरी है। छोटे बच्चे इस पर बैठ कर घुड़सवारी का खेल खेलते हैं। जब बच्चे इस पर नहीं खेल रहे होते, तब चिड़ियाँ इस पर बैठ कर चहचहाने लग जाती हैं। कभी – कभी शरारती चिड़ियाँ खासकर गौरैयें तोप के अंदर घुस जाती हैं। वो छोटी सी चिड़िया ऐसा करके हमें बताना चाहती हैं कि कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, एक ना एक दिन उसका भी अंत निश्चित होता है।यहाँ पर कवि ” वे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप
एक दिन तो होना ही है उनका मुँह बन्द !” इन पंक्तियों के माध्यम से एक तो यह कहना चाहते हैं कि अत्याचारी का अंत निश्चित ही है और दूसरी तरफ़ शक्ति के दुरुपयोग न करने का भी संदेश देते हैं क्योंकि वक्त के साथ सत्ता और शक्ति नष्ट हो जाते हैं।

यह भी देखें

साखी
मीरा के पद स्पर्श भाग 2 पाठ-2
Parvat Pradesh me Pavas ‘पर्वत प्रदेश में पावस’

तोप कविता के प्रश्न-उत्तर

(क ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए


प्रश्न 1 -: विरासत में मिली चीजों की बड़ी संभाल क्यों होती है ? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : विरासत में मिली चीजों से हमारा भवनात्मक संबंध होता है। ये हमें अपने पूर्वजों , परम्पराओं और इतिहास की जानकारी देते हैं और इसी के साथ हमें इनसे भविष्य के लिए सीख भी मिलती हैं। ये आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रहे , इसलिए विरासत में मिली चीज़ों की बड़ी संभाल होती है।

प्रश्न 2 : इस कविता से आपको तोप के बारे में क्या जानकारी मिलती है ?

उत्तर : इस कविता में हमें तोप के विषय के बारे में यह जानकारी मिलती है कि यह तोप 1857 में कंपनी द्वारा प्रयोग किया जाने वाला ताकतवर हथियार था जिसकी सहायता से अंग्रेजों ने कई भारतीय वीरों के प्राण ले लिए गए थे। तब तोप का बड़ा रुतबा था औरइसकी मदद से अंग्रेजों ने भारतीयों पर डर कायम किया। परन्तु आज यह तोप केवल देखने की वस्तु मात्र रह गई है । अब तोप से कोई नहीं डरता। अब तोप की स्थिति यह है कि बच्चे इस पर घुड़सवारी करते हैं और चिड़ियाँ इस पर गपशप करती हैं और इसके भीतर भी घुस जाती हैं।

प्रश्न 3 -: कंपनी बाग़ में रखी तोप क्या सीख देती है ?

उत्तर -: कंपनी बाग़ में रखी तोप हमें अंग्रेजों के अत्याचारों और हमारे शहीदों की कुरबानी की याद दिलाती है और सावधान रहने की सलाह देती है ताकि कोई दोबारा हम पर राज ना करे। इसी के साथ तोप यह सीख भी देती है कि चाहे कोई कितना भी अधिक शक्तिशाली क्यों न हो एक ना एक दिन उसका अंत हो ही जाता है।

प्रश्न –4.  कविता में तोप को दो बार चमकाने की बात कही गई है। ये दो अवसर कौन से होंगे ?

उत्तर -: भारत की स्वतंत्रता के प्रतिक दो दिन 15 अगस्त और 26 जनवरी हैं। इन्ही दो अवसरों पर कंपनी बाग़ को सजाया जाता है और तोप को चमकाया जाता है।

(ख ) निम्नलिखित के भाव स्पष्ट कीजिए –


(1): अब तो बहरहाल

छोटे बच्चों की सवारी से अगर यह फारिग हो

तो उसके ऊपर बैठकर

चिड़ियाँ ही अकसर करती है गपशप

उत्तर : इन पंक्तियों में कवि ने तोप की वर्तमान स्थिति का वर्णन किया है ,एक समय में जहाँ तोप ने सबको डरा कर रखा था वही अब तोप की कोई इज्जत नहीं। आज बच्चे उस पर घुड़सवारी कर रहे हैं अ और यदि बच्चों से फ़ुरसत मिले तो उस पर चिड़ियाँ बैठ जाती हैं।

(2): वे बताती हैं कि दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप

एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद।

उत्तर -: इन पंक्तियों द्वारा तोप की महत्ता खत्म होने की बात तो बताई ही गई है साथ ही यह भी बताया गया है कोई कितना भी अत्याचारी और ताकतवर क्यों न हो , एक न एक दिन उसके अत्याचार और शक्ति नष्ट हो जाती है और उसका महत्व खत्म हो जाता है।

(3): उड़ा दिए थे मैंने

अच्छे – अच्छे सूरमाओं के धज्जें

उत्तर :  यहाँ तोप अपनी प्रशंसा कर रही है की 1857 में उससे ज्यादा शक्तिशाली कोई नहीं था उसने कई  वीरों को मारा था। ~ इन पंक्तियों के द्वारा कवि तोप की शक्ति और प्रभाव का वर्णन कर रहे हैं।

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