Unseen Passage Hindi: MCQ and Subjective Questions Tips

अपठित गद्यांश हमेशा से हिंदी परीक्षाओं के मुख्य प्रश्नों में रहे हैं । इन अपठित प्रश्नों के थोड़े से अभ्यास और प्रयास से छात्र अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं । पिछले कुछ वर्षों से अपठित गद्यांश में मात्र बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) प्रश्न ही पूछे जा रहे थे। यद्यपि ये सरल दिखते हैं किंतु इसमें प्रश्न का उत्तर गलत होने पर विद्यार्थी पूरे अंक गँवा बैठते हैं। परीक्षार्थियों की इसी समस्या का समाधान करने के लिए सीबीएसई बोर्ड ने अपठित प्रश्नों में तीन बहुविकल्पीय प्रश्न और दो प्रश्न अतिलघु या लघु उत्तरीय प्रश्न(प्रत्येक 2अंक) का पूछने का निर्णय लिया है। इसी को ध्यान में रखते हुए छात्रों के अभ्यास के लिए यहाँ पर कुछ अपठित गद्यांश दिये जा रहे हैं । आशा है कि ये विद्यार्थियों और शिक्षकों दोनों के लिए उपयोगी साबित होंगे।
गद्यांश में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए छात्रों को निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए:-
- गद्यांश के संदर्भ में प्रत्येक शब्द का अर्थ समझने का प्रयास करें।
- गद्यांश को अच्छी तरह से पढ़ने के बाद, आगे आने वाले प्रश्नों की ओर मुड़ें। उत्तर ढूंढने का प्रयास करें।
- अपने उत्तर लिखने से पहले जांच लें।
- उत्तर उसी काल में होना चाहिए, जिस काल में प्रश्न दिया गया है।
- गद्यांश में दी गई जानकारी के आधार पर प्रश्नों के उत्तर दीजिए। इसमें अपने विचार, भाव और कल्पना न जोड़ें।
- प्रश्नों का उत्तर अपने शब्दों में देने का प्रयास करें, लेकिन यथासंभव सटीक और संक्षिप्त रूप में उत्तर दें। अनावश्यक विस्तार न करें।
- कोशिश करें कि प्रत्येक उत्तर अपने आप में स्पष्ट एवं पूर्ण हो।
- किसी भी गलती से बचने के लिए अपने उत्तरों को सावधानीपूर्वक संशोधित करें।
- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि समय प्रबंधन का पालन करना चाहिए।
प्रश्न 1: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उचित उत्तर दीजिए । (3X1+ 2X2=7)
वर्तमान में एकल परिवारों की संस्कृति प्रचलन में है। आजकल माता-पिता अक्सर बच्चों के पालन-पोषण में आने वाली क ठिनाइयों की शिकायत करते सुने जाते हैं। बच्चों की बहुत अधिक माँगें; अधिक स्वतंत्रता; रात भर पार्टियाँ; अत्यधिक फिजूलखर्ची, अधिक जेब खर्च; पढ़ाई और परिवार के लिए समय नहीं; यह सब ऐसे परिवारों का आम रोना है। क्या इस दयनीय स्थिति के लिए माता- पिता स्वयं जिम्मेदार नहीं हैं? बढ़ते युवाओं की बुनियादी जरूरत परिवार, प्यार,देखभाल और नैतिक मूल्यों के साथ जुड़ाव है। किसी को यह नहीं भूलना चाहिए कि ‘परोपकार घर से शुरू होता है’। परिवार की पवित्रता बनाए रखने के लिए स्वतंत्रता और व्यक्तित्व दोनों का सम्मान किया जाना चाहिए। बढ़ती पीढ़ी के अंतर को पाटने के लिए आज बच्चों को चतुराई से संभालना होगा। केवल उचित मांगों को पूरा करने की आवश्यकता है, क्योंकि बहुत सारे खर्चे पूरे करने हैं और सबसे ऊपर माता-पिता को कई सामाजिक दायित्वों का ध्यान रखना है। हमारे पूर्वज संयुक्त परिवारों में सुखपूर्वक रहते थे। बच्चे अपने चचेरे भाई-बहनों के साथ रहना पसंद करते थे, साधनों के अनुसार समायोजन करना सीखते थे। पीढ़ियों के बीच पूर्ण सामंजस्य था। वृद्धाश्रम की अवधारणा कभी अस्तित्व में नहीं थी। प रिवार के बुजुर्गों के प्रति गहरा सम्मान और युवाओं के प्रति प्यार, देखभाल और चिंता थी। यहां तक कि छोटे-मोटे पारिवारिक मतभेद भी सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिए जाते थे।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
- वर्तमान में माता-पिता बच्चों के पालन-पोषण में किस प्रकार की कठिनाइयों की शिकायत करते हैं ? a) बच्चों की अधिक माँगें
b) अधिक स्वतंत्रता
c) रात भर की पा र्टियाँ
d) दोनों b और c
उत्तर : d) सभी
2.बच्चों की बुनियादी जरूरतों में से कौन सी नहीं है?
a) परिवार
b) अत्यधिक खर्च
c) देखभाल
d) प्यार
उत्तर : b)अत्यधिक खर्च
3.संयुक्त परिवार के लिए इनमें से कौन सा विकल्प सही नहीं है?
a) पीढ़ियों के बीच पूर्ण सामंजस्य
b) चचेरे भाई-बहनों के साथ रहना
c) वृद्धाश्रम की अवधारणा होना
d) पारिवारिक मतभेद भी सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाना
उत्तर : c) वृद्धाश्रम की अवधारणा होना
अतिलघु /लघु उत्तरीय प्रश्न:
4.वर्तमान में एकल परिवारों की दयनीय स्थि ति के लिए माता-पिता किस हद तक जिम्मेदार हो सकते हैं? संक्षेप में उत्तर दें।
उत्तर :माता-पिता की अत्यधिक उदारता और अनुशासन की कमी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हो सकती है। बच्चों की हर माँग पूरी करना और उनकी स्वतंत्रता पर नियंत्रण नहीं रखना, माता-पिता की एक बड़ी गलती हो सकती है। यह बच्चों के नैतिक और सामाजिक मूल्यों में कमी का कारण बन सकता है।
5.संयुक्त परिवारों में बच्चों के पालन-पोषण के क्या लाभ थे, और वे किस प्रकार समायोजन करना सीखते थे? संक्षेप में उत्तर दें।
उत्तर :संयुक्त परिवारों में बच्चे अपने चचेरे भाई-बहनों के साथ रहकर सामूहिकता, साझेदारी और समायोजन करना सीखते थे। पारिवारिक बुजुर्गों का प्यार और मार्गदर्शन मिलने से वे नैतिक और सामाजिक मूल्यों को आत्मसात कर पाते थे, जिससे परिवार में पूर्ण सामंजस्य बना रहता था।
प्रश्न 2 : निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उचित उत्तर दीजिए । (3X1+ 2X2=7)
जब हम न्यूयॉर्क बंदरगाह में प्रवेश करते हैं, तो सबसे पहले हम स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी देखते हैं। जो चीज हमें सबसे ज्यादा प्रभावित करती है वह है इसका आकार और भव्यता। क्या आपने कभी सोचा है कि यह वहां कैसे आया? स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी अमेरिकी स्वतंत्रता की सौवीं वर्षगांठ के अवसर पर फ्रांस के लोगों की ओर से एक उपहार था। 1869 में, मूर्तिकार फ्रेडरिक अगस्टे बार्थोल्डी ने स्मारक के लिए अपनी अवधारणा की योजना बनाना शुरू किया।
बार्थोल्डी ने क्लासिक ग्रीक और रोमन आकृतियों को चुना। उन्होंने लिबर्टी की कल्पना एक मजबूत और गौरवान्वित व्यक्ति के रूप में की, जो न केवल अतीत की राजसी ग्रीक देवी-देवताओं, बल्कि वर्तमान के कामकाजी पुरुषों और महिलाओं का भी प्रतिनिधित्व करती थी। आख़िरकार, 1884 में, काम ख़त्म हो गया और लिबर्टी को 214 बक्सों में पैक करके न्यूयॉर्क शहर भेज दिया गया। बस एक समस्या आड़े आ गई. जबकि फ्रांसीसियों ने प्रतिमा बनाने के लिए बहुत सारा धन जुटाया था, न्यूयॉर्क ने इसकी नींव बनाने के लिए धन सुरक्षित नहीं किया था। ऐसा तब तक नहीं हुआ जब तक कि न्यूयॉर्क के एक अखबार ने लोगों से दान के लिए आग्रह नहीं किया। आख़िरकार, 28 अक्टूबर 1886 को अमेरिकियों ने स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी के अनावरण का जश्न मनाया।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
प्रश्न 1: स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी किस अवसर पर फ्रांस के लोगों द्वारा अमेरिका को उपहार में दिया गया था?
a) अमेरिकी स्वतंत्रता की पचासवीं वर्षगांठ
b) अमेरिकी स्वतंत्रता की सौवीं वर्षगांठ
c) अमेरिकी संविधान की वर्षगांठ
d) अमेरिकी क्रांति की पचासवीं वर्षगांठ
उत्तर: b) अमेरिकी स्वतंत्रता की सौवीं वर्षगांठ
प्रश्न 2:मूर्तिकार फ्रेडरिक अगस्टे बार्थोल्डी ने लिबर्टी की मूर्ति के लिए किस शैली का चयन किया?
a) आधुनिक कला
b) क्लासिक ग्रीक और रोमन आकृतियाँ
c) पुनर्जागरण कला
d) बारोक शैली
उत्तर: b) क्लासिक ग्रीक और रोमन आकृतियाँ
प्रश्न3: न्यूयॉर्क में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की नींव बनाने के लिए धन कैसे जुटाया गया था?
a) फ्रांस सरकार ने दान दिया
b) अमेरिकी सरकार ने निधि जुटाई
c) न्यूयॉर्क के एक अखबार ने लोगों से दान के लिए आग्रह किया
d) संयुक्त राष्ट्र ने वित्त पोषण किया
उत्तर : c) न्यूयॉर्क के एक अखबार ने लोगों से दान के लिए आग्रह किया
अतिलघु /लघु उत्तरीय प्रश्न:
प्रश्न 4: फ्रेडरिक अगस्टे बार्थोल्डी ने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की मूर्ति के लिए किस प्रकार की आकृतियों का चयन किया और क्यों?
उत्तर: बार्थोल्डी ने क्लासिक ग्रीक और रोमन आकृतियों का चयन किया क्योंकि उन्होंने लिबर्टी को एक मजबूत और गौरवान्वित व्यक्ति के रूप में कल्पना की, जो अतीत की राजसी ग्रीक देवी-देवताओं के साथ-साथ वर्तमान के कामकाजी पुरुषों और महिलाओं का भी प्रतिनिधित्व करती थी।
प्रश्न 5: न्यूयॉर्क में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की नींव बनाने के लिए धन जुटाने में क्या समस्या आई और उसे कैसे हल किया गया?
उत्तर: न्यूयॉर्क ने स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की नींव बनाने के लिए धन सुरक्षित नहीं किया था। समस्या का समाधान तब हुआ जब न्यूयॉर्क के एक अखबार ने लोगों से दान के लिए आग्रह किया, जिससे आवश्यक धन जुटाया गया।
प्रश्न 3: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उचित उत्तर दीजिए । (3X1+ 2X2=7)
मै उस हिमालय पर घूमता रहा जिसका पुराने मिथकों और दंतकथाओं के साथ निकट संबंध है और जिसने हमारे विचारों और साहित्य को बहुत दूर तक प्रभावित किया है। पहाड़ों के प्रति मेरे प्रेम ने और कश्मीर के साथ मेरे खून के रिश्ते ने मुझे उनकी ओर विशेष रूप से आकर्षित किया। इस महान पर्वत से निकलकर भारत के मैदानों में बहने वाली भारत की विशाल नदियों ने मुझे आकर्षित किया और इतिहास के अनगिनत पहलुओं की याद ताजा की। इंडस या सिंधु, जिसके आधार पर हमारे इस देश का नाम पड़ा ‘इंडिया’ और ‘हिंदुस्तान’, और जिसे पार करके हज़ारों वर्षों से यहाँ जातियाँ और कबीले, काफ़िले और फ़ौजें आती रही हैं। ब्रह्मपुत्र… इतिहास की मुख्यधारा से लगभग कटी हुई, पर पुरानी कहानियों में आज भी जीवित, उत्तरपूर्वी पहाड़ियों के हृदय में पड़ी गहरी दरारों के बीच से बरबस मार्ग बनाती हुई भारत में प्रवेश करती है और फिर पहाड़ों और जंगलों से भरे मैदान के बीच शांत रमणीय धारा के रूप में बहने लगती है। यमुना, जिसके चारों ओर नृत्य, उत्सव और नाटक से संबद्ध न जाने कितनी पौराणिक कथाएँ एकत्र हैं। इन सबसे बढ़कर है, भारत की नदी गंगा, जिसने इतिहास के आंरभ से ही भारत के हृदय पर राज किया है और लाखों की तादाद में लोगों को अपने तटों की ओर खींचा है। प्राचीन काल से आधुनिक युग तक, गंगा की गाथा भारत की सभ्यता और संस्कृति की कहानी है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
प्रश्न 1:लेखक को हिमालय की ओर किस कारण से विशेष आकर्षण महसूस होता है?
a) पुरानी कहानियों के कारण
b) पहाड़ों के प्रति प्रेम और कश्मीर के साथ खून का रिश्ता
c) ट्रेकिंग का शौक
d) दोस्तों के साथ यात्रा करने का मौका
उत्तर: b) पहाड़ों के प्रति प्रेम और कश्मीर के साथ खून का रिश्ता
प्रश्न 2:भारत के किस विशाल नदी के आधार पर हमारे देश का नाम ‘इंडिया’ और ‘हिंदुस्तान’ पड़ा?
a) गंगा
b) ब्रह्मपुत्र
c) यमुना
d) सिंधु
उत्तर: d) सिंधु
प्रश्न 3:ब्रह्मपुत्र नदी भारत में प्रवेश करने से पहले कहाँ से होकर गुजरती है?
a) हिमालय की ऊंचाइयों से
b) उत्तरपूर्वी पहाड़ियों के गहरे दरारों से
c) थार रेगिस्तान से
d) विंध्याचल पहाड़ियों से
उत्तर:b) उत्तरपूर्वी पहाड़ियों के गहरे दरारों से
अतिलघु /लघु उत्तरीय प्रश्न:
प्रश्न 4: हिमालय के साथ पुराने मिथकों और दंतकथाओं का क्या संबंध है, और उन्होंने हमारे विचारों और साहित्य को कैसे प्रभावित किया है?
उत्तर: हिमालय पुराने मिथकों और दंतकथाओं के साथ गहराई से जुड़ा है। इन कहानियों ने हमारे साहित्य और विचारों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है, जिससे हिमालय न केवल एक भौगोलिक स्थल, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रतीक बन गया है।
प्रश्न 5: गंगा नदी का भारत के इतिहास और संस्कृति में क्या महत्व है?
उत्तर: गंगा नदी ने प्राचीन काल से आधुनिक युग तक भारत के हृदय पर राज किया है। यह नदी न केवल भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी गाथा भारत की सभ्यता और संस्कृति की कहानी है, जिसने लाखों लोगों को अपने तटों की ओर आकर्षित किया है।
प्रश्न 4: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उचित उत्तर दीजिए । (3X1+ 2X2=7)
ईष्या का यही अनोखा वरदान है। जिस हृदय में ईष्या घर बना लेती है, वह उन चीजों से आनन्द नहीं ले उठाता जो उसके पास मौजूद हैं, बल्कि उन वस्तुओं से दुःख उठाता है, जो दूसरो के साथ करता है और इस तुलना में अपने पक्ष के सभी अभाव उसके हृदय पर दंश मारते रहते है। दंश के इस दाह को भोगना कोई अच्छी बात नहीं है। मगर ईर्ष्यालु मनुष्य करे भी तो क्या ? आदत से यह लाचार होकर उसे यह वेदना भोगनी पड़ती है।
एक उपवन को पाकर भगवान को धन्यवाद देते हुए उसका आनन्द नहीं लेना और बराबर इस चिंता में निमग्न रहना कि इससे भी बड़ा उपवन क्यों नहीं मिला, एक ऐसा दोष है। जिससे ईर्ष्यालु व्यक्ति का चरित्र भी भंयकर हो उठता है। अपने अभाव पर दिन रात सोचते वह सृष्टि की प्रक्रिया को भूलकर विनाश में लग जाता है। और अपनी उन्नति के लिए उद्यम करना छोड़कर वह दूसरों को हानि पहुंचाने का ही अपना श्रेष्ठ कर्तव्य समझने लगता है।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
प्रश्न 1:ईर्ष्यालु मनुष्य का हृदय किन चीजों से दुःख उठाता है?
a) अपनी उपलब्धियों से
b) दूसरों की वस्तुओं से
c) अपने दोस्तों से
d) अपने परिवार से
उत्तर : b) दूसरों की वस्तुओं से
प्रश्न 2:ईर्ष्यालु व्यक्ति की कौन सी आदत उसे वेदना भोगने पर मजबूर करती है?
a) खुशी मनाना
b) विनाश में लगना
c) सृष्टि की प्रक्रिया को भूलना
d) तुलना करना
उत्तर: d) तुलना करना
प्रश्न 3: ईर्ष्यालु व्यक्ति अपनी उन्नति के लिए क्या करना छोड़ देता है?
a) आनंद लेना
b) उद्यम करना
c) धन्यवाद देना
d) चिंतन करना
उत्तर : b) उद्यम करना
अतिलघु /लघु उत्तरीय प्रश्न:
प्रश्न 4: ईर्ष्या का अनोखा वरदान क्या है और यह मनुष्य के हृदय को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर: ईर्ष्या का अनोखा वरदान यह है कि वह मनुष्य को उसकी अपनी वस्तुओं का आनंद नहीं लेने देती और दूसरों की वस्तुओं से दुःख पहुंचाती है। इस तुलना में मनुष्य के अभाव उसे हमेशा कष्ट देते रहते हैं।
प्रश्न 5: ईर्ष्यालु व्यक्ति का चरित्र कैसे भयंकर हो उठता है और उसका परिणाम क्या होता है?
उत्तर: ईर्ष्यालु व्यक्ति अपने अभावों पर दिन-रात सोचते हुए सृष्टि की प्रक्रिया को भूलकर विनाश में लग जाता है। वह अपनी उन्नति के लिए उद्यम करना छोड़कर दूसरों को हानि पहुंचाने को ही अपना श्रेष्ठ कर्तव्य समझने लगता है।
प्रश्न 5: निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उचित उत्तर दीजिए । (3X1+ 2X2=7)
हमारे देश को दो बातों की सबसे पहले और सबसे ज्यादा जरूरत है । एक शक्तिबोध और दूसरा सौंदर्यबोध। शक्तिबोध का अर्थ है – देश की शक्ति या सामर्थ्य का ज्ञान । दूसरे देशों की तुलना में अपने देश को हीन नहीं मानना चाहिए। इससे देश के शक्ति के शक्तिबोध को आघात पहुँचता है। सौंदर्यबोध का अर्थ है किसी भी रूप में कुरुचि की भावना को पनपने न देना। इधर-उधर कूड़ा फ़ेंकने , बातचीत में गंदे शब्दों का प्रयोग, इधर-उधर की लगाने, समय देकर न मिलना आदि से देश के सौंदर्य बोध को आघात पहुँचता है। देश के शक्तिबोध को जगाने के लिए हमें चाहिए कि हम दूसरे देशों की अपेक्षा सदा अपने देश को श्रेष्ठ समझें । ऐसा न करने से देश के शक्तिबोध को आघात पहुँचता है। यह उदाहरण इस तथ्य की पुष्टि करता है- शल्य महाबली कर्ण का सारथी था। जब भी कर्ण अपने पक्ष की विजय की घोषणा करता हुँकार भरता; शल्य अर्जुन की अजेयता का हल्का -सा उल्लेख कर देता। बार-बार इस उल्लेख ने कर्ण के सघन आत्मविश्वास में संदेह की दीवार डाल दी, जो उसके पराजय की नींव रखने में सफल हो गई।
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs):
- अपनी शक्ति दिखाना (ii) दूसरे की ताकत को आजमाना
(iii) शेखी बघारना (iv) देश की शक्ति या सामर्थ्य का ज्ञान
उत्तर :(iv) देश की शक्ति या सामर्थ्य का ज्ञान
(ख)दूसरे देशों की अपेक्षा सदा अपने देश को श्रेष्ठ समझना चाहिए क्योंकि ऐसा न करने से-
(i) देश के शक्तिबोध को आघात नहीं पँहुचता है।
(ii) देश के शक्तिबोध को आघात पँहुचता है।
(iii) अत्मविश्वास में संदेह की दीवार पड़ती है
(iv) भावी पराजय की नींव पड़ती है।
उत्तर :(ii) देश के शक्तिबोध को आघात पँहुचता है।
(ग) सारथी शल्य ने कर्ण के पराजय की नींव कैसे डाली?
(i) युद्धक्षेत्र में रथ रोककर
(ii)युद्धक्षेत्र में कर्ण को अकेला छोड़कर
(iii)कर्ण के आत्मविश्वास का बल बढ़ाकर
(iv) कर्ण के आत्मविश्वास में संदेह की दीवार डालकर
उत्तर :(iv) कर्ण के आत्मविश्वास में संदेह की दीवार डालकर
अतिलघु /लघु उत्तरीय प्रश्न:
(घ) हमारे देश को सबसे पहले और सबसे ज्यादा किन दो बातों की जरूरत है, और उनका क्या महत्व है?
उत्तर: हमारे देश को सबसे पहले और सबसे ज्यादा शक्तिबोध और सौंदर्यबोध की जरूरत है। शक्तिबोध का अर्थ है देश की शक्ति या सामर्थ्य का ज्ञान, जिससे हम अपने देश को दूसरे देशों की तुलना में हीन न समझें। सौंदर्यबोध का अर्थ है किसी भी रूप में कुरुचि की भावना को पनपने न देना, ताकि देश का सौंदर्य और स्वच्छता बनी रहे।
(ङ)शक्तिबोध और सौंदर्यबोध को आघात पहुँचाने वाले कौन-कौन से कारक हैं?
उत्तर: शक्तिबोध को आघात पहुँचाने वाला कारक है अपने देश को दूसरे देशों की अपेक्षा हीन मानना। सौंदर्यबोध को आघात पहुँचाने वाले कारक हैं इधर-उधर कूड़ा फेंकना, बातचीत में गंदे शब्दों का प्रयोग, समय देकर न मिलना आदि।




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