VAH CHIDIYA JO- NCERT CLASS 6 HINDI VASANT CH-1 SOLUTIONS पाठ 1 वह चिड़िया जो
विषय सूची
- कवि परिचय
- कविता-वह चिड़िया जो
- “वह चिड़िया जो” कविता का भावार्थ
- ’वह चिड़िया जो’ कविता का सारांश
- ‘वह चिड़िया जो ‘ के प्रश्न अभ्यास
- अनुमान और कल्पना
- भाषा की बात


कवि परिचय
कवि का नाम : केदारनाथ अग्रवाल
जन्म: 1 अप्रैल 1911
मृत्यु: 22 जून 2000
केदार नाथ अग्रवाल का जन्म 1 अप्रैल 1911 को उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद के कमासिन गाँव में हुआ था उनके पिताजी का नाम हनुमान प्रसाद गुप्ता था और माता जी का नाम घसीटो देवी था।
शिक्षा: केदार नाथ अग्रवाल जी की प्रारंभिक शिक्षा अपने गाँव कमासिन में ही हुई। बाद में उच्च शिक्षा के लिए वे इलाहाबाद गए और बी.ए. की उपाधि हासिल की। बाद में कानूनी शिक्षा प्राप्त करने वे कानपुर गए और एल.एल. बी की उपाधि पाई। इसके बाद वे बांदा में वकालत करने लगे।
काव्य शैली:
प्रगतिशील काव्य-धारा के एक प्रमुख कवि माने जाते हैं। केदारनाथ अग्रवाल के साहित्य में जन जीवन के प्रति गहरी संवेदना की झलक मिलती है। इनकी कविताओं में भारतीय दर्शन और आस्था प्रकट होती है। वे मार्क्सवादी दर्शन से प्रभावित थे और उन्होंने समाज के दबे- कुचले वर्ग की भावनाएँ अपने साहित्य के माध्यम प्रकट की हैं। उन काव्य की भाषा सरल सहज है ।
मुख्य रचनाएँ : केदार नाथ अग्रवाल जी की रचनाओं की एक लंबी फ़ेहरिस्त प्राप्त होती है जिनके नाम यहाँ दिए गए है-
- गुलमेहंदी
- जमुन जल तुम
- जो शिलाएँ तोड़ते हैं।
- कहें केदार खरी-खरी
- खुली आँखें खुले डैने
- कुहकी कोयल खड़े पेड़ की देह
- मार प्यार की थापें
- फूल नहीं रंग बोलते हैं
- आग का आईना
- पंख और पतवार
- अपूर्वा
- नींद के बादल
- आत्म गंध
- बंबई का रक्त स्नान
- युग-गंगा
- हे तुम मेरी
- अनहारी हरियाली
- वसंत में प्रसन्न पृथ्वी
- पुष्पदीप
- लोक अलोक आदि
कविता–वह चिड़िया जो

(1)
वह चिड़िया जो—
चोंच मार कर
दूध-भरे जुंडी के दाने
रुचि से , रस से खा लेती है
वह छोटी सी संतोषी चिड़ियाँ
नीले पंखोवाली मैं हूँ
मुझे अन्न से बहुत प्यार है।
(2)
वह चिड़िया जो—
कंठ खोलकर

बूढ़े वन-बाबा की खातिर
रस उँडेलकर गा लेती है
वह छोटी मुँह बोली चिड़िया
नीले पंखोवाली मैं हूँ
मुझे विजन से बहुत प्यार है।
(3)
वह चिड़िया जो—
चोंच मार कर
चढ़ी नदी का दिल टटोलकर
जल का मोती ले जाती है
वह छोटी गरबीली चिड़ियाँ
नीले पंखोवाली मैं हूँ
मुझे नदी से बहुत प्यार है।
कवि: केदारनाथ अग्रवाल
“वह चिड़िया जो” कविता का भावार्थ
काव्यांश:
वह चिड़िया जो—

चोंच मार कर
दूध-भरे जुंडी के दाने
रुचि से , रस से खा लेती है
वह छोटी सी संतोषी चिड़ियाँ
नीले पंखोवाली मैं हूँ
मुझे अन्न से बहुत प्यार है।
कठिन शब्द :
जुंडी = ज्वार jowar millet
रुचि = उत्साह , चाव Interest
संतोषी= शांत रहने वाली Satisfied
भावार्थ:
यह काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक वसंत भाग 1 के ” वह चिड़िया जो” पाठ से ली गई है इसके रचयिता केदारनाथ अग्रवाल जी हैं। इस काव्यांश में कवि स्वयं को एक छोटी सी चिड़िया के रूप में महसूस करते हुए कहते है कि वह चिड़िया जो अपनी चोंच से दूध भरे ज्वार के दानों को बहुत ही रुचि से , रस लेकर अर्थात स्वाद लेते हुए खा लेती है। वह चिड़िया बहुत ही संतोषी और नीले पंखों वाली है वह चिड़िया मैं( कवि) हूँ और मुझे अन्न से बहुत प्यार है। यहाँ पर कवि केदारनाथ अग्रवाल अन्न से प्यार प्रदर्शित कर अनाज के प्रति अपने सम्मान का भाव दर्शाना चाहते हैं।
काव्यांश:

वह चिड़िया जो—
कंठ खोलकर
बूढ़े वन-बाबा की खातिर
रस उँडेलकर गा लेती है
वह छोटी मुँह बोली चिड़िया
नीले पंखोवाली मैं हूँ
मुझे विजन से बहुत प्यार है।
कठिन शब्द
कंठ =गला
वन-बाबा = पुराना जंगल ( जंगल का मानवीयकरण)
विजन = एकांत, जहाँ कोई न हो,
मुँह बोली
भावार्थ: यह काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक वसंत भाग 1 के ” वह चिड़िया जो” पाठ से ली गई है इसके रचयिता केदारनाथ अग्रवाल जी हैं। इस काव्यांश में में कवि कह रहे हैं कि मैं वह चिड़िया हूँ जो अपने उस वन के लिए जिसमें वह रहती है , उसके लिए बहुत प्यार से , बहुत रस घोल कर रसीला गीत गा लेती है। चिड़िया जंगल को बूढ़े वन बाबा कहती है जिससे वन का पुरातन होना साबित होता है। चिड़िया को एकांत से बहुत प्यार है इसलिए वह जंगल प्रकृति के एकांत का आनंद लेने वाली नीले पंखों वाली चिड़िया मैं हूँ।

काव्यांश:
वह चिड़िया जो—
चोंच मार कर
चढ़ी नदी का दिल टटोलकर
जल का मोती ले जाती है
वह छोटी गरबीली चिड़ियाँ
नीले पंखोवाली मैं हूँ
मुझे नदी से बहुत प्यार है।
कठिन शब्द
गरबीली = गर्व से भरी
चोंच = ठोंग , beak
भावार्थ: यह काव्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक वसंत भाग 1 के ” वह चिड़िया जो” पाठ से ली गई है इसके रचयिता केदारनाथ अग्रवाल जी हैं। इस काव्यांश में में कवि कह रहे हैं कि मैं वह नीले पंखों वाली चिड़िया हूँ जो अत्यंत साहसी और गर्वीली है क्योंकि छोटी होने पर भी वह उफनती हुई नदी पर चोंच मार कर पानी की बूँदों रूपी मोती लेकर आती है। आशय यह है कि छोटी सी चिड़िया चोंच मारकर भरी हुई नदी से अपनी प्यास बुझाने में सफल हो पाती है और मुझे नदी से बहुत प्यार है।
’वह चिड़िया जो’ कविता का सारांश
’वह चिड़िया जो’ कविता में कवि केदारनाथ अग्नवाल जी स्वयं को एक नीले रंग के पंखों वाली चिड़िया के रूप में महसूस करते हैं। वे कहते हैं कि वे स्वभाव में नीले पंखोंवाली एक छोटी चिड़िया है।जो बहुत संतोषी है, उसकी अधिक अपेक्षाएँ नहीं हैं और वह कच्चे ज्वार के दाने जिनमें अभी दूध भरा है उसी को संतोष से स्वाद लेकर खा लेती है उसे अन्न से बहुत प्यार करती है, इसी प्रकार वह पुराने घने जंगल में अपनेपन के साथ कंठ खोलकर में बेरोक-टोक गाती है। वह मुँहबोली है, एकांत में भी उमंग से रहती है। वह उफनती नदी में चोंच से ठोंग मारकर मोती के समान जल की बूँदों को ले आती है और अपनी प्यास बुझा लेती है। उसे स्वयं पर गर्व है। वह साहसी है। उसे नदी से लगाव है। इस प्रकार कवि ने स्वयं को एक कल्पित चिड़िया के रूप में दर्शा कर चिड़िया के माध्यम से मनुष्य के महत्त्वपूर्ण गुणों को उजागर किया है।
‘वह चिड़िया जो ‘ के प्रश्न अभ्यास
प्रश्न 1.कविता पढ़कर तुम्हारे मन में चिड़िया का जो चित्र उभरता है उस चित्र को कागज पर बनाओ।
उत्तर: छात्र अपनी कल्पना अनुसार चिड़िया का चित्र बना सकते है। अनुमान के लिए नीचे एक चित्र दिया है-

प्रश्न 2.तुम्हें कविता का कोई और शीर्षक देना हो तो क्या शीर्षक देना चाहोगे? उपयुक्त शीर्षक सोचकर लिखो।
उत्तर: कविता के लिए अन्य शीर्षक हो सकते है-
- नीले पंखों वाली चिड़ियाँ
- छोटी चिड़िया
- चिड़ियाँ
- प्रकृति प्रेमी चिड़िया
छात्र अपने अन्य नाम रख सकते हैं।
प्रश्न 3. इस कविता के आधार पर बताओ कि चिड़िया को किन-किन चीजों से प्यार है?
उत्तर: कविता के आधार पर हम अनुमान लगा सकते हैं कि चिड़िया को अन्न, वन, एकांत और नदी आदि प्राकृतिक चीजों से प्यार है।
प्रश्न4.आशय स्पष्ट करो-
(क) रस उँडेलकर गा लेती है
आशय: चिड़िया जंगल के एकांत में प्रसन्न है, इसलिए वह अपने हृदय का सारा आनंद अपने आवाज में घोल कर मधुर स्वर में गाती है और अपने मीठे स्वर से वातावरण को आनन्द से भर देती है।
(ख) चढ़ी नदी का दिल टटोलकर जल का मोती ले जाती है
आशय : चिड़िया बहुत साहसी है इसलिए वह उफनती हुई भरी नदी से अपनी चोंच में पानी लाकर प्यास बुझा लेती है। कवि ने पानी की बूँदों की तुलना मोती से की है।
अनुमान और कल्पना
1.कवि ने नीली चिड़िया का नाम नहीं बताया है। वह कौन सी चिड़िया रही होगी? इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए पक्षी-विज्ञानी सालिम अली की पुस्तक ‘भारतीय पक्षी’ देखो। इनमें ऐसे पक्षी भी शामिल हैं जो जाड़े में एशिया के उत्तरी भाग और अन्य ठंडे देशों से भारत आते हैं। उनकी पुस्तक को देखकर तुम अनुमान लगा सकते हो कि इस कविता में वर्णित नीली चिड़िया शायद इनमें से कोई एक रही होगी –
नीलकंठ
छोटा किलकिला
कबूतर
बड़ा पतरिंगा
2.नीचे कुछ पक्षियों के नाम दिए गए हैं। उनमें यदि कोई पक्षी एक से अधिक रंग का है तो लिखो कि उसके किस हिस्से का रंग कैसा है। जैसे तोते की चोंच लाल हैं, शरीर हरा है।
मैना
कौवा
बतख
कबूतर
उत्तर:
मैना – भूरे पंखों वाली और गले में काले रंग की होती है इसकी चोंच पीली होती है । यह हिमालय क्षेत्र में कुटारी या सिटोलिया नाम से भी जाना जाता है। यह निडर और आक्रामक होते हैं। झुंड बना कर बस्तियों या गाँव के आस-पास रहते हैं। यह कीड़े-मकोड़े और गंदगी खाते हैं।

कौवा- कौवा काला होता है इसके पंख और चोंच काले होते हैं किंतु गले पर भूरे रंग की पट्टी होती है। यह सब कुछ खाता है इसलिए इसे सर्वाहारी कहते हैं । यह एक चालाक पक्षी माना जाता है।

बतख – बत्तख सफ़ेद, काली, भूरे आदि कई रंग की होती हैं किंतु इनकी चोंच पीली या नारंगी होती है। यह पानी में तैरना पसंद करती हैं और जल के छोटे मोटे कीड़े या मछलियाँ खाती हैं।

कबूतर: सामान्यतया यह स्लेटी या सफ़ेद रंग के होते हैं । इनकी चोंच और पंजे लाल होते हैं। भारत में पाए जाने वाले स्लेटी रंग के कबूतरों की गर्दन आमतौर पर मोर के तरह चमकीले नीले रंग की होती है ।कबूतर एक शांत और सरल पक्षी माना जाता है। इसीलिए इसे शांति का प्रतीक भी माना जाता है। कबूतर अनाज के दाने खाते हैं।

3.कविता का हर बंध ‘वह चिड़िया जो-‘ से शुरू होता है और ‘मुझे बहुत प्यार है’ पर खत्म होता है। तुम भी इन पंक्तियों का प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से कविता में कुछ नए बंध जोड़ो।
वह चिड़िया जो
पंख खोलकर
ऊँचे विस्तृत नील गगन में
कड़ी धूप में उड़ जाती है
वह छोटी चमकीली चिड़िया
नीले पंखोवाली मैं हूँ
मुझे गगन से बहुत प्यार है।
नोट : छात्र इसी प्रकार अपनी पंक्तियाँ बनाने का प्रयास करें ।
4. तुम भी ऐसी कल्पना कर सकते हो कि ‘वह फल का पौधा जो-पीली पंखड़ियों वाला -महक रहा है -मैं हूँ ।’ उसकी विशेषताएँ मुझ में हैं….। फूल के बदले वह कोई दूसरी चीज भी हो सकती है । जिसकी विशेषताओं को गिनाते हुए तुम उस चीज से अपनी समानता बता सकते हो….। ऐसी कल्पना के आधार पर तुम कुछ पंक्तियाँ लिखो।
उत्तर: कल्पना के आधार पर कुछ पंक्तियाँ-
वह तितली जो
पंख खोलकर
फूल-फूल पर
यहाँ -वहाँ मँडराती है
वह छोटी चंचल सी तितली
पीले पंखोवाली मैं हूँ
मुझे भ्रमण से बहुत प्यार है।
नोट : छात्र इसी प्रकार अपनी पंक्तियाँ बनाने का प्रयास करें ।
भाषा की बात
1.पंखोंवाली चिड़िया ऊपरवाली दराज
नीले पंखोंवाली चिड़िया सबसे ऊपरवाली दराज
*यहाँ रेखाकित शब्द विशेषण का काम कर रहे हैं। ये शब्द चिड़िया और दराज संज्ञाओं की विशेषता बता रहे हैं, अतः रेखाकित शब्द विशेषण हैं और चिड़िया, दराज विशेष्य हैं। यहाँ ‘वाला/बाली’ जोड़कर बनने वाले कुछ और विशेषण दिए गए हैं। ऊपर दिए गए उदाहरणों की तरह इनके आगे एक-एक विशेषण और जोड़ो-
……………………………………मोरोंवाला बाग
……………………………………पेड़ोंवाला घर
……………………………………फूलोंवाली क्यारी
……………………………………स्कूलवाला रास्ता
……………………………………हँसनेवाला वाला बच्चा
……………………………………मूँछोंवाला आदमी
उत्तर:
सुंदर मोरोंवाला बाग
ऊँचे पेड़ोंवाला घर
पीले फूलोंवाली क्यारी
प्रायमरी स्कूलवाला रास्ता
खिलखिलाकर हँसनेवाला वाला बच्चा
बड़ी-बड़ी मूँछोंवाला आदमी
2.वह चिड़िया……….. जुंडी के दाने रुचि से………..खा लेती है।
3.वह चिड़िया……….. रस उँडेलकर गा लेती है।
*कविता को इन पक्तियों में मोटे छापे वाले शब्दों को ध्यान से पढ़ो। पहले वाक्य में ‘रुचि से’ खाने के ढंग की और दूसरे वाक्य में ‘रस उँडेलकर’ गाने के ढंग की विशेषता बता रहे हैं। अतः ये दोनों क्रियाविशेषण हैं। नीचे दिए वाक्यों में कार्य के ढंग या रोति से संबंधित क्रियाविशेषण छाँटो-
(क) सोनाली जल्दी-जल्दी मुँह में लड्डू ठूँसने लगी।
(ख) गेंद लुढ़कती हुई झाड़ियों में चली गई।
(ग) भूकंप के बाद जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा।
(घ) कोई सफ़ेद-सी चीज़ धप्प से आँगन में गिरी।
( ङ) टॉमी फुर्ती से चोर पर झपटा।
(च) तेजिंदर सहमकर कोने में बैठ गया।
(छ) आज अचानक ठंड बढ़ गई है।
उत्तर: क्रियाविशेषण
(क) सोनाली जल्दी-जल्दी मुँह में लड्डू ठूँसने लगी।
(ख) गेंद लुढ़कती हुई झाड़ियों में चली गई।
(ग) भूकंप के बाद जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा।
(घ) कोई सफ़ेद-सी चीज़ धप्प से आँगन में गिरी।
( ङ) टॉमी फुर्ती से चोर पर झपटा।
(च) तेजिंदर सहमकर कोने में बैठ गया।
(छ) आज अचानक ठंड बढ़ गई है।



Leave a Reply to KusumJoshiCancel reply