दाल पर आधारित मुहावरे
हिन्दी भाषा की सबसे रोचक विशेषताओं में से एक है इसके मुहावरों की धरोहर। ये छोटे-छोटे वाक्यांश गहरे अर्थ और सांस्कृतिक पहचान को व्यक्त करते हैं। दाल, जो भारतीय भोजन का अभिन्न हिस्सा है, से जुड़े अनेक मुहावरे हमारे दैनिक जीवन में न सिर्फ भोजन, बल्कि संबंधों, भावनाओं और परिस्थितियों का वर्णन करने में उपयोग किए जाते हैं। आइए, इन मुहावरों की दुनिया में प्रवेश करें और जानें कि कैसे साधारण दाल से जुड़ी कहावतें हमारी भाषा को और भी रंगीन बना देती हैं।
मित्रों ! अगर स्वादिष्ट भोजन की बात हो और उसमें दाल न हो तो मज़ा अधूरा ही रह जाता है। भारतीय थाली में तो दाल का अपना अलग ही स्थान है। दालें प्रोटीन का मुख्य स्रोत हैं। इन दालों से न जाने कितने ही व्यंजन बनते हैं । बिना दाल के भारतीय भोजन पूरा ही नहीं होता। दाल -बाटी, दाल-मखानी, दाल-चावल ,दाल-रोटी , पापड़ बड़ी, वड़ा, पकौडे, भजिया, ढोकला जैसे अनेक दालों से बनने वाले व्यंजनों के नाम तो आपने सुने ही होंगे। आज हम आपको दालों पर बने हुए व्यंजन नहीं बल्कि दालों पर बने हुए रोचक मुहावरे बताने जा रहे हैं । दालों पर बने ये रोचक मुहावरे निश्चित ही आपकी भाषा में नयापन भरेंगे साथ ही उसे ज्यादा मज़ेदार बना देंगे।
मुहावरा- दाल न गलना-

अर्थ : सफ़ल न होना , इच्छा पूरी न होना
वाक्य प्रयोग1. बहुत से लोगों ने कश्मीर को हमारे देश से अलग करने की कोशिश की , किंतु किसी की दाल न गली ।
वाक्य प्रयोग 2 अरे भाई ! कहीं और जाओ। यहाँ तुम्हारी दाल न गलेगी।
मुहावरा : दाल में काला होना
अर्थ : गड़बड़ होना, घोटाला होना

वाक्य प्रयोग1. मुझे इस आदमी के चाल -ढाल सही नहीं लग रहे। जरूर दाल में कुछ काला है।
वाक्य प्रयोग 2 जब चोर ने खुद ही सारा दोष खुद कबूल कर लिया तो इंस्पेक्टर ने दिमाग ठनका। उसने सोचा कि जरूर दाल में कुछ काला है।
मुहावरा : दाल रोटी चलना
अर्थ : जीवन निर्वाह होना, घर खर्च चल जाना
वाक्य प्रयोग1. रमेश आजकल बड़ी मुसीबत के दौर से गुजर रहा है। किसी तरह दाल रोटी चल रही है।
वाक्य प्रयोग 2 महँगाई के कारण हालत ये है कि दोनों पति-पत्नी मिलकर काम करते हैं तब जाकर बड़ी मुश्किल से दाल रोटी चलती है।
मुहावरा : छाती में दाल दलना / छाती में मूँग दलना
अर्थ : पास रह कर कष्ट देना या किसी निकट वाले व्यक्ति द्वारा कष्ट देना
वाक्य प्रयोग1. जिस बेटे की परवरिश के लिए मदनलाल ने दिन-रात एक कर दिए थे आज बड़ा होकर वही बेटा मदनलाल की छाती में मूँग दल रहा है।
वाक्य प्रयोग 2 मकान किराए पर लगा कर मैं तो बहुत पछता रहा हूँ । मेरा किराएदार न तो किराया दे रहा और न घर खाली कर रहा।लड़ाई झगड़ा कर रोज़ मेरी छाती पर दाल दल रहा वह अलग ।
मुहावरा : घर की मुर्गी दाल बराबर
अर्थ : महत्त्व न देना , महत्त्वहीन समझना।
वाक्य प्रयोग1. जब बड़ा भाई घर में पढ़ा रहा था तब तो तरूण ने ठीक से पढ़ाई नहीं की । अब पैसे देकर ट्यूशन पढ़ रहा और मेहनत भी कर रहा। ठीक ही है भाई ,घर की मुर्गी दाल बराबर।
वाक्य प्रयोग 2 गीता की माँ का खुद का बुटीक है और सब उसकी माँ के बुटीक की तारीफ़ करते हैं लेकिन वह अपने कपड़े दूसरी जगह सिलवाती है। क्यों न हो घर की मुर्गी दाल बराबर ही समझी जाती है।
मुहावरा : दाल भात में मूसल चंद
अर्थ : व्यर्थ में दखल देना, अनावश्यक हस्तक्षेप करना।
वाक्य प्रयोग 1. तुमसे कोई सलाह नहीं माँग रहा , फ़िर भी तुम दाल -भात में मूसलचंद बनने में लगे हुए हो।
वाक्य प्रयोग 2 . जब हम लोग घूमने जाने लगे तभी मेरे भाई का दोस्त दाल-भात में मूसलचंद बनने वहाँ पहुँच गया।
मुहावरा : ये मुँह और मसूर की दाल
अर्थ : योग्यता से बढ़कर वस्तु की इच्छा करना, हैसियत से अधिक की माँग करना
वाक्य प्रयोग1. जब सिर्फ़ 45% अंक ला कर भी मोहन ने पिताजी से कहा कि कॉलेज तो वह तभी जाएगा, जब नई पल्सर मिलेगी । पिताजी ने भी हँसते हुए जवाब दिया कि ये मुँह और मसूर की दाल?
वाक्य प्रयोग 2 रोहन को कुछ आता-जाता तो है नहीं। उसकी चाची के कहने पर मिश्रा जी उसे फ़ैक्टरी में काम पर लगा दिया । अब एक महीने में ही तनख्वाह दुगुनी करने की माँग कर रहा था। मिश्रा जी ने भी सीधे जवाब दे दिया। दुगुना वेतन चाहिए तो पहले काम सीख लो। यह मुँह और मसूर की दाल यहाँ नहीं चलेगा।
मुहावरा : आटे दाल का भाव पता करना
अर्थ : असलियत से वास्ता पड़ना , वास्तविकता / ह्क़ीकत का सामना होना
वाक्य प्रयोग1. फ़ैज़ान पिता के पैसे पर तो खूब मज़े उड़ाता था। पिता की मौत के बाद उसे आटे-दाल के भाव मालूम पड़ गए।
वाक्य प्रयोग 2 . दादा जी ने पोते को समझाते हुए कहा: आज तो तुम्हें दुनियादारी का कुछ पता ही नहीं है। बड़े होने पर आटे-दाल के भाव मालूम होंगे।
मुहावरा :दाल भात का कौर समझना
अर्थ : आसान काम समझना
वाक्य प्रयोग1. डॉक्टरी की पढ़ाई करना कोई दाल-भात का कौर खाने जैसा नहीं है। बहुत मेहनत करनी पड़ती है।
वाक्य प्रयोग 2 . मुझे दाल भात का कौर समझने की गलती मत करना। अगर पंगा लोगे तो बहुत पछताओगे।
मुहावरा : उड़द पर सफ़ेदी के बराबर होना

अर्थ : जरा भी न होना , शुन्य के बराबर होना
वाक्य प्रयोग 1. कामिनी को लड़कों के साथ गुलछर्रे उड़ाते देखकर उसकी माँ ने गुस्सा होते हुए कहा कि लाज -शरम तो तुझ में उड़द पर सफ़ेदी के बराबर भी न है।
वाक्य प्रयोग 2 दुनिया में अपने मान-सम्मन खोने का डर तो इज्जतदार लोगों को होता है। उन लोगों को क्या डर जिनकी इज्जत उड़द पर सफ़ेदी के बराबर हो।
आशा है आप को इन मुहावरों को पढ़कर मज़ा आया होगा ; तो अगली बार दाल खाते वक्त इनका सही उपयोग करना न भूलें। मुहावरों की अधिक जानकारी के लिए पढ़ते रहिए हमारे ब्लॉग पोस्ट।




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