NCERT Grade 10th Sparsh Chapter-16 Patajhad me Tuti pattiyaan पाठ -16 पतझड़ में टूटी पत्तियाँ

लेखक परिचय:- रवींद्र केलेकर

रवींद्र केलेकर (चित्र : साभार फ़ेसबुक)

जन्म: 7मार्च 1925                       

 मृत्यु: 27 अगस्त, 2010

जन्म स्थान: कोंकण क्षेत्र (गोवा)

परिचय : गाँधी वादी चिंतक , गोवा मुक्ति आंदोलन के कार्य कर्ता केलेकर ने अपनी रचनाओं में सामान्य जन-जीवन   के विविध पक्षों , मान्यताओं और व्यक्तिगत विचारों को देश और समाज के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया है ।  कोंकणी , मराठी , हिन्दी और गुजराती में साहित्य लेखन किया है । गोवा कला अकादमी के साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किए गए ।

मुख्य रचनाएँ:  कोंकणी में उजवाढाचे सूर,  समिधा , सांगली ,ओथांबे ;मराठी में  कोंकणीचें राजकरण, जापान जसा दिसला और हिंदी में पतझड़ में टूटी पत्तियाँ ।

झेन की देन

जापान में मैंने अपने एक मित्र से पूछा, “यहाँ के लोगों को कौन-सी बीमारियाँ अधिक होती हैं?” “मानसिक” उन्होंने जवाब दिया, “यहाँ के अस्सी फ़ीसदी लोग मनोरुग्ण है। ”

“इसकी क्या वजह है?”

कहने लगे, “हमारे जीवन की रफ्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं, बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं। अमेरिका से हम प्रतिस्पर्धा करने लगे। एक महीने में पूरा होने वाला काम एक दिन में ही पूरा करने की कोशिश करने लगे। वैसे भी दिमाग की रफ़्तार हमेशा तेज हो रहती है। उसे ’्स्पीड का इंजन’ लगाने पर वह हजार गुना अधिक रफ़्तार से दौड़ने लगता है। फिर एक क्षण ऐसा आता है जब दिमाग का तनाव बढ़ जाता है और पूरा इंजन टूट जाता है। यही कारण है जिससे मानसिक रोग यहाँ बढ़ गए हैं।… “

भावार्थ : लेखक रवींद्र केलेकर जी को जब जापान जाने का अवसर मिला , तो उन्होंने वहाँ अपने जापानी मित्र से वहाँ की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ जाननी चाहीं । प्रत्युत्तर में उन्हें जानकारी हुई कि जापान में सबसे अधिक मानसिक बीमारियाँ होती हैं ।वहाँ लगभग 80% लोग मनोरुग्णता के शिकार हैं । इसका कारण है कि जापानी लोगों के जीवन की रफ़्तार बहुत अधिक बढ़ गई है । वे लोग अमेरिका से स्पर्धा करना चाहते हैं । आर्थिक रूप से वे अमेरिका को हराना चाहते हैं । [ अमेरिका का द्वारा जापान में एटम बम गिराने की घटना के बाद से जापानी अमेरिका से विरोध की भावना रखते हैं ।] इसी लिए वे ज्यादा से ज्याद काम करते हैं । वे एक दिन में एक माह का काम करना चाहते हैं , जिससे उनके दिमाग पर तनाव लगातार बढ़ता जाता है । और अधिक तनाव के परिणामस्वरूप ही मानसिक रोग होते हैं ।

शाम को वह मुझे एक ‘टी-सेरेमनी’ में ले गए। चाय पीने को यह एक विधि है। जापानी में उसे चा-नो यू कहते हैं।

वह एक छः मंजिली इमारत थी जिसकी छत पर दफ़्ती की दीवारोंवाली और तातामी (चटाई) की जमीनवाली एक सुंदर पर्णकुटी थी। बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था। उसमें पानी भरा हुआ था। हमने अपने हाथ-पाँव इस पानी से धोए। तौलिए से पोंछे और अंदर गए। अंदर ‘चाजीन’ बैठा था। हमें देखकर वह खड़ा हुआ। कमर झुकाकर उसने हमें प्रणाम किया। दो झो… (आइए, तशरीफ़ लाइए) कहकर स्वागत किया। बैठने की जगह हमें दिखाई ।अँगीठी सुलगाई। उस पर चायदानी रखी। बगल के कमरे में जाकर कुछ बरतन ले आया। तौलिए से बरतन साफ़ किए। सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से की कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हो। वहाँ का वातावरण इतना शांत था कि चायदानी के पानी का खदबदाना भी सुनाई दे रहा था।

भावार्थ : शाम के समय लेखक के मित्र उन्हें चाय पिलाने ले गए } जापान में चाय पीने का एक विशेष तरीका होता है ,जिसे चा -नो-यू कहते हैं । चाय की यह दुकान एक छह मंजिली इमारत के छत पर थी । इसे लकड़ी की दफ़्ती(movable , temporary wooden walls ) से बनाया गया था और नीचे चटाइयाँ बिछीं थीं । कुल मिला कर इसे एक पर्णकुटी(पत्तों से बनीं झोंपड़ी ) का स्वरूप दिया गया था । बाहर एक बेडौल सा बरतन , जिसमें पानी रखा था उस से लेखक और उनके साथ आए दो जापानी मित्रों ने हाथ पाँव धोए और तौलिए से पोंछ कर अंदर गए । चाय पिलाने वाला व्यक्ति , जिसे जापानी भाषा में चाज़ीन कहते हैं , उसने कमर झुका कर उनका स्वागत किया और बैठने का आग्रह किया। उसने अंगीठी( a kind of stove, where woodfire can be lit ) जलाकर चायदानी उस पर रखी और पास के कमरे से बरतन लाकर तौलिए से साफ़ किए इन सब कार्यों को उसने बहुत ही सलीके से किया कि लेखक को लगा कि मानो जयजयवंती के सुर गूंज रहे हों । [ जयजयवंती रात्रि में अथवा वर्षा ऋतु में गाया जाने वाला शुद्ध स्वरों युक्त एक राग का नाम है ] लेखक ने बताया कि वहाँ इतनी शांति थी कि पानी के उबलने की आवाज़ भी साफ़ सुनाई दे रही थी ।

चाय तैयार हुई। उसने वह प्यालों में भरी। फिर वे प्याले हमारे सामने रखे दिए गए। वहाँ हम तीन मित्र ही थे। इस विधि में शांति मुख्य बात होती है। इसलिए वहाँ तीन से अधिक आदमियों प्रवेश नहीं दिया जाता। प्याले में दो घूँट से अधिक चाय नहीं थी। हम ओठों से प्याला एक-एक बूँद चाय पीते रहे। करीब डेढ़ घंटे तक चुसकियों का यह सिलसिला चलता रहा ।

पहले दस-पंद्रह मिनट तो मैं उलझन में पड़ा। फिर देखा, दिमाग की रफ़्तार धीरे-धीरे धीमी पड़ती जा रही है। थोड़ी देर में बिलकुल बंद भी हो गई। मुझे लगा, मानो अनंतकाल में में हूँ। यहाँ तक कि सन्नाटा भी मुझे सुनाई देने लगा।

भावार्थ : चाय तैयार होने पर चाज़ीन ने वह प्यालों में भरी और प्याले उन लोगों के सामने रख दिए । चाय पीने की इस प्रक्रिया में शांति ही प्रमुख बात है इसलिए वहाँ एक समय में तीन से अधिक लोगों को प्रवेश नहीं मिलता । प्याले में नाम मात्र की चाय थी जिसे लेखक और उनके साथी बूँद -बूँद कर लगभग डेढ़ घंटे तक पीते रहे । लेखक ने इस अनुभव को बताते हुए लिखा कि इस दौरान उनके मस्तीष्क में अभूतपूर्व अनुभव हुए । उनके मस्तिष्क धीरे-धीरे शांत हो गया और उन्हें लगा मानो वे अनंतकाल में हैं । लेखक को सन्नाटे की आवाज़ का भी अनुभव हुआ ।

अकसर हम या तो गुज़रे हुए दिनों की खट्टी-मीठी यादों में उलझे रहते हैं या भविष्य के सपने देखते रहते हैं। हम या तो भूतकाल में रहते हैं या भविष्यकाल में। असल में दोनों काल मिथ्या हैं। एक चला गया है, दूसरा आया नहीं है। हमारे सामने जो वर्तमान क्षण है, वही सत्य है उसी में जीना चाहिए। चाय पीते-पीते उस दिन मेरे दिमाग से भूत और भविष्य दोनों काल उड़ गए थे। केवल वर्तमान क्षण सामने था। और वह अनंतकाल जितना विस्तृत था।

जीना किसे कहते हैं, उस दिन मालूम हुआ।

झेन परंपरा की यह बड़ी देन मिली है जापानियों को!

भावार्थ : लेखक कहते हैं कि मनुष्य अपने जीवन में या तो भूतकाल में जीता है या भविष्य में ।जबकि दोनों ही कालों का कोई अस्तित्व नहीं है । एक बीत गया और एक अभी आया ही नहीं किंतु वर्तमान काल को हम अनुभव नहीं कर पाते । टी सेरेमनी का अभूतपूर्व अनुभव यह रहा कि लेखक के दिमाग से उस क्षण भूतकाल और वर्तमान काल दोनों ही गायब हो गए और वह उसी क्षण वर्तमान क्षण को अनुभव कर पाए । लेखक ने उस क्षण अनंतकाल का अनुभव किया। इस घटना से लेखक को जीवन जीने का सही तरीका मालूम हुआ ।

सारांश :

’ झेन की देन ’ पाठ रवींद्र केलेकर का एक लघु संस्मरण है । इसमें लेखक ने जापान जाने की एक घटना का वर्णन किया है । लेखक और उनके जापानी मित्र की बातों का सार यह निकलता है कि अत्यधिक महत्त्वाकांक्षाओं ने मनुष्य के मन मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डाला है । जिस से दिमागी तनाव बढ़ता जा रहा है और लोग मनोरुग्ण हो रहे हैं । इस तनाव को दूर करने के लिए जापानी लोग टी सेरेमनी का आयोजन करते हैं जिसमें चाय पीने के माध्यम से मस्तिष्क को धीरे-धीरे शांत कर दिया जाता है और तब मनुष्य कुछ क्षणों के लिए भूत और भविष्य काल से मुक्त हो केवल वर्तमान में रह जाता है । लेखक ने उस क्षण को जिसमें हम सिर्फ़ वर्तमान में होते हैं , अनंतकाल जितनाअ विस्तृ‍त बताया है । इस अनुभव से लेखक को सीख मिली कि हमें भूतकाल और भविष्यकाल से मुक्त हो केवल वर्तमान में जीने का अभ्यास करना चाहिए । जापान में मस्तिष्क को शांत करने वाली यह पद्धति झेन संतों द्वारा खोजी गई है , इसीलिए लेखक ने चा-नो-यू को जापानियों के लिए झेन परंपरा की सबसे बड़ी देन बताया है ।

मौखिक प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1.लेखक ने जापानियों के दिमाग में ‘स्पीड’ का इंजन लगने की बात क्यों कही है?
उत्तर-जापान में स्पीड का इंजन लगाने की बात इसलिए कही गई है क्योंकि जापानियों के जीवन की रफ़्तार बहुत  बढ़ गई है ।वे महीने के काम को एक दिन में पूरा करना चाहते हैं इसलिए उनका दिमाग भी तेज़ रफ्तार से स्पीड इंजन की भाँति सोचता है।

प्रश्न 2.जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?
उत्तर- जापानी में चाय पीने की विधि को चा-नो-यू कहते हैं।

प्रश्न 3. जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?
उत्तर-जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, वह स्थान पर्णकुटी जैसा सजाया होता है। प्राकृतिक ढंग से सजे हुए इस छोटे से स्थान में केवल तीन लोग बैठकर चाय पी सकते हैं। यहाँ अत्यधिक शांति का वातावरण होता है।

लिखित:

() निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए

II. प्रश्न 1 .चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?
उत्तर-  चाजीन ने टी-सेरेमनी से जुड़ी सभी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से की। यह सेरेमनी एक पर्णकुटी में पूर्ण हुई। चाजीन द्वारा अतिथियों का उठकर स्वागत किया और कमर झुका कर प्रणाम किया । उसने अँगीठी सुलगाकर उसपर चायदानी रखी और दूसरे कमरे से चाय के बर्तन लाकर उन्हें तौलिए से पोंछा। उसने चाय को प्यालों में डालने आदि की सभी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से की।

प्रश्न 2.‘टी-सेरेमनी में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?
उत्तर- ‘टी-सेरेमनी’ में केवल तीन आदमियों को प्रवेश दिया जाता है। ‘टी-सेरेमनी’ में शांति बहुत महत्‍त्वपूर्ण है इसलिए ऐसा किया जाता है।

प्रश्न 3 .चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?
उत्तर-चाय पीने के बाद लेखक ने महसूस किया कि जैसे उसके दिमाग की गति मंद हो गई हो। धीरे-धीरे उसका दिमाग चलना बंद हो गया हो उसे सन्नाटे की आवाजें भी सुनाई देने लगीं। उसे लगा कि मानो वह अनंतकाल से जी रहा है।उसके दिमाग से भूत और भविष्य गायब हो गए ।उसे लगा मानो वह  केवल  वर्तमान  क्षण सामने रहा हो। उसे वह पल अनंत काल के समान  विस्तृत लगे।

() निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए

प्रश्न 1.  लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर-  लेखक के मित्र ने मानसिक रोग का कारण बताया कि जापानियों ने अमरीका के साथ प्रतिस्पर्धा करने के कारण अपनी दैनिक दिनचर्या की गति बढ़ा दी । अत्यधिक तनाव और महत्त्वाकांक्षा के कारण वे लोग शारीरिक व मानसिक रूप से बीमार रहो जाते हैं लेखक के मित्र के  ये विचार सत्य हैं क्योंकि शरीर और मन मशीन की तरह कार्य नहीं कर सकते । बहुत ज्यादा काम करने से तनाव बढ़ता है और एक समय ऐसा आता है कि वे तनाव झेलने में असमर्थ हो जाते हैं और मनोरुग्ण हो जाते हैं ।

प्रश्न 2 .लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-  इसका आशय है कि लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है। वर्तमान में जीना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि ऐसा करने से स्वास्थ्य ठीक रहता है और जीवन में उन्नति होती है। यदि हम भूतकाल के लिए पछताते रहेंगे या भविष्य की योजनाएँ ही बनाते रहेंगे, तो दोनों बेमानी या निरर्थक हो जाएँगे। क्योंकि भूतकाल बीत चुका है और भविष्य में कभी जाया नहीं जा सकता ।हम भूतकाल से शिक्षा लेकर तथा भविष्य की योजनाओं को वर्तमान में ही परिश्रम करके कार्यान्वित कर सकते हैं ताकि मनुष्य तनाव से मुक्त रहकर स्वस्थ तथा खुशहाल जीवन बिता सके।

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए-

प्रश्न 1. हमारे जीवन की रफ्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।
उत्तर- जापान के लोगों के जीवन की गति बहुत अधिक बढ़ गई है इसलिए वहाँ लोग चलते नहीं, बल्कि दौड़ते हैं। कोई बोलता नहीं है, बल्कि जापानी लोग बकते हैं और जब ये अकेले होते हैं, तो स्वयं से ही बड़बड़ाने लगते हैं अर्थात् स्वयं से ही बातें करते रहते हैं।यह जापानी लोगों के जीवन में भौतिक प्रगति के अत्यधिक हस्तक्षेप को दिखाता है ।उनका जीवन बहुत अधिक यांत्रिक (मशीनी) बन गया है ।

प्रश्न 2.अभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूंज रहे हों।
उतर- लेखक जब अपने मित्रों के साथ जापान की ‘टी-सेरेमनी में गया तो चाजीन ने झुककर उनका स्वागत किया। लेखक को वहाँ का वातावरण बहुत शांतिमय प्रतीत होता है। लेखक ने देखा है कि वहाँ की सभी क्रियाएँ अत्यंत गरिमापूर्ण ढंग से की गईं। चाजीन द्वारा प्रत्येक कार्य अत्यंत सलीके से किए जाने पर लेखक भाव-विभोर हो गया। उन्हें लगा, मानो जयजयवंती राग के विशुद्ध सुर वहाँ गाए जा रहे हों ।

भाषा अध्ययन

प्रश्न 1.नीचे दिए गए शब्दों का वाक्य में प्रयोग कीजिए
व्यावहारिकता, आदर्श, सूझबूझ, विलक्षण, शाश्वत
उत्तर-
शब्द – वाक्य प्रयोग
व्यावहारिकता(practicality )– सिद्धांत और व्यावहारिकता के मेल से व्यक्ति का व्यवहार अच्छा बन जाता है।
आदर्श (Ideal )– गांधी जी ने आदर्श जीवन बिताने की कोशिश की।  
सूझबूझ(sense,a wise dicision) – सूझबूझ से काम करने पर मुश्किल आसान हो जाती है।
विलक्षण (singularity, uniqueness)– सुभाषचंद्र बोस विलक्षण प्रतिभा के धनी थे।
शाश्वत( perpetual) – प्रकृति परिवर्तनशील है, यह शाश्वत नियम है।

प्रश्न 2.

उत्तर-(द्वन्द्व समास)

  1. माता-पिता = माता और पिता
  2. पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
  3. सुख-दुख = सुख और दुख
  4. रात-दिन = रात और दिन
  5. अन्न-जल = अन्न और जल
  6. घर-बाहर = घर और बाहर
  7. देश-विदेश = देश और विदेश

प्रश्न 3.
नीचे दिए गए विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए-

उत्तर-

  1. सफल = सफलता
  2. विलक्षण = विलक्षणता
  3. व्यावहारिक = व्यावहारिकता
  4. सजग = सजगता
  5. आदर्शवादी = आदर्शवादिता
  6. शुद्ध = शुद्धता

प्रश्न 4.
नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए और शब्द के अर्थ को समझिए-

(क) शुद्ध सोना अलग है।
(ख) बहुत रात हो गई अब हमें सोना चाहिए।

ऊपर दिए गए वाक्यों में सोना” का क्या अर्थ है? पहले वाक्य में ‘सोना” का अर्थ है धातु ‘स्वर्ण’। दूसरे वाक्य में ‘सोना’ को अर्थ है ‘सोना’ नामक क्रिया। अलग-अलग संदर्भो में ये शब्द अलग अर्थ देते हैं अथवा एक शब्द के कई अर्थ होते हैं। ऐसे शब्द अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के भिन्न-भिन्न अर्थ स्पष्ट करने के लिए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
उत्तर, कर, अंक, नग
उत्तर
उत्तर(direction, answer  )-

सड़क की उत्तर दिशा में डाकखाना है।
मुझे इस प्रश्न का उत्तर नहीं मालूम है।

कर(tax, hands) –

हमें आय कर चुका कर देश की प्रगति में योगदान देना चाहिए।
अध्यापक को देखते ही मैंने कर बद्ध प्रणाम किया।

अंक (lap, number ) –

 माँ ने सोते बच्चे को अंक में उठा लिया।
एक अंक की कुल 4 संख्याएँ हैं।

नग  (mountain,gems)–

हिमालय को नग राज कहा जाता है।
उसके आभूषणों  में कीमती नग जड़े हुए  है।

प्रश्न 5.
नीचे दिए गए वाक्यों को संयुक्त वाक्य में बदलकर लिखिए-

(क) 1. अँगीठी सुलगायी।
2. उस पर चायदानी रखी।

अँगीठी सुलगायी और उस पर चायदानी रखी।

(ख) 1. चाय तैयार हुई।
2. उसने वह प्यालों में भरी।

चाय तैयार हुई और उसने वह प्यालों में भरी।
(ग) 1. बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया।
2. तौलिये से बरतन साफ़ किए।

वह बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया और तौलिये से बरतन साफ़ किए।

प्रश्न 6.  नीचे दिए गए वाक्यों से मिश्र वाक्य बनाइए-
(क) 1. चाय पीने की यह एक विधि है।
2. जापानी में चा-नो-यू कहते हैं।

उत्तर : (क) चाय पीने की यह एक विधि है जिसे जापानी में चा-नो-यू कहते हैं।

(ख) 1. बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था।
2. उसमें पानी भरा हुआ था।

उत्तर: (ख) उस बर्तन में पानी भरा था जो बाहर बेढब-सा मिट्टी का बना था।

(ग) 1. चाय तैयार हुई।
2. उसने वह प्यालों में भरी।
3. फिर वे प्याले हमारे सामने रख दिए।
उत्तर- (ग) जब चाय तैयार हुई तब वह प्यालों में भर कर हमारे सामने रखी गई।

प्रश्न 2.
पाठ में वर्णित ‘टी-सेरेमनी’ का शब्द चित्र प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
‘टी-सेरेमनी’ का शब्द चित्र- एक छह मंजिली इमारत की छत पर झोपड़ीनुमा कमरा है, जिसकी दीवारें दफ़्ती की बनी है। फ़र्श पर चटाई बिछी है। वातावरण अत्यंत शांतिपूर्ण है। बाहर ही एक बड़े से बेडौल  से मिट्टी के बरतन में पानी रखा है। लोग यहाँ हाथ-पाँव धोकर अंदर जाते हैं। अंदर बैठा चाजीन झुककर सलाम करता है। बैठने की जगह की ओर इशारा करता है और चाय बनाने के लिए अँगीठी जलाता है। उसके बर्तन अत्यंत साफ़-सुथरे और सुंदर हैं। वातावरण इतना शांत है कि चायदानी में उबलते पानी की आवाज साफ़ सुनाई दे रही है। वह बिना किसी जल्दबाजी के चाय बनाता है। वह कप में दो-तीन घूट भर ही चाय देता है जिसे लोग धीरे-धीरे चुस्कियाँ लेकर एक डेढ़ घंटे में पीते हैं।

*****

Leave a Reply

Trending

Discover more from HindiFlorets.com

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading