आज का सुविचार

दोस्तो! यद्यपि क्रोध करना कभी भी अच्छे गुणों में नही आँका जाता, लेकिन क्रोध एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। यह मानव स्वभाव का एक स्वाभाविक और नैसर्गिक गुण है , लेकिन क्रोध के दुष्परिणामों को देखते हुए इसकी सदैव निंदा ही की जाती है। एक स्वाभाविक और जन्मजात गुण होने पर भी विद्वानों ने क्रोध पर नियंत्रण की ही संस्तुति की है।

क्रोध के कारण हम जल्दबाजी में गलत निर्णय ले सकते हैं, जिनका दीर्घकालिक परिणाम हमारे लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। इसलिए, इसे नियंत्रित करना शांति प्राप्त करने का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।अभी कुछ वर्ष पूर्व ही एक बड़ी दुखद घटना हुई। एक क्रोधी आदमी ने देर तक गेट न खुलने पर स्वयं पर नियंत्रण खो दिया और अपनी कार को गेट पर चढ़ा दिया। लेकिन गेट के पीछे उसकी छः वर्षीया बच्ची, जो अपने पिता के स्वागत के लिए मुख्य द्वार खोलने आई थी , दब कर मर गई। क्या वह पिता स्वयं को उस दुखद घटना के लिए माफ़ कर पाएगा? क्या किसी भी प्रकार के पश्चाताप से उस बच्ची को जीवन दान दिया जा सकेगा?

क्रोध की एक विशेषता यह भी है कि यह उत्तरोत्तर बढ़ता ही जाता है। अतः क्रोध को नियंत्रित करना बेहद आवश्यक है। क्रोध अनियंत्रित होने पर न केवल हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि हमारे रिश्तों और सामाजिक जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।

“क्रोध को कैसे नियंत्रित किया जाए” इस पर बहुत शोध हुए हैं । कैलिफ़ोर्निया स्टेट युनिवर्सिटी के मनोविश्लेषक टॉम जी. स्टीवेन्स ने अपनी किताब ’ओवरकम एंगर एन्ड एग्रेसन’ में स्पष्ट किया है कि क्रोध नियंत्रण का एक प्रमुख तरीका यह है कि स्थिति को अपने नहीं, दूसरों के नज़रिये से देखिये। दूसरों को उस स्थितियों पर प्रकाश डालने के लिये प्रोत्साहित करें, क्षमा करना सीखें, बीते को बिसारने की आदत विकसित करें और किसी को चोट पहुँचाने के बजाए प्रशंसा से उसका मूल्यांकन करें। याद रखें कि क्रोध नियंत्रण से आप स्वयं को शक्तिशाली बनाते हैं। इससे आपकी खुशहाली और स्‍मृतियों का विकास होता है।

जब हम क्रोधित होते हैं, तो हमारा मन अशांत हो जाता है और हम तर्कसंगत रूप से सोचने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे समय में हमें शांत रहने और स्थिति को समझने का प्रयास करना चाहिए। गहरी साँसें लेना, स्वयं को कुछ समय के लिए उस परिस्थिति से दूर करना, या मानसिक रूप से सकारात्मक सोचने का अभ्यास करना, क्रोध को नियंत्रित करने के प्रभावी तरीके हो सकते हैं।

शांति की ओर पहला कदम तभी उठाया जा सकता है ,जब हम क्रोध को अपने जीवन में स्थान न दें। क्रोध को शांतिपूर्ण तरीके से नियंत्रित करने से हमारी मानसिक शांति बढ़ती है, और हम जीवन में अधिक संतुलित और खुशहाल महसूस करते हैं। ध्यान, योग, और आत्मविश्लेषण, दूसरे के नज़रिये से परिस्थितियों का आँकलन करना जैसे तरीके अपनाना भी क्रोध को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है। जीवन में सात्विक आहार-विहार भी क्रोध नियंत्रण में सहायक होता है। अतः तामसिक पदार्थों और परिस्थितियों से भी दूर रहना क्रोध नियंत्रण का एक अच्छा तरीका साबित हो सकता है।

क्रोध पर नियंत्रण से हम न केवल अपनी शांति प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि दूसरों के साथ बेहतर संबंध भी बना सकते हैं। अंततः, क्रोध पर काबू पाना ही आत्मविकास और सच्ची शांति की कुंजी है। शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिये क्रोध पर नियंत्रण की कला सीखनी ही होगी।

हमें उम्मीद है कि आज का सुविचार आपके जीवन में एक सकारात्मक परिवर्तन लाएगा।

One response to “सुविचार-09”

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