मुहावरे भाषा को मजेदार तो बनाते ही है इनको सुनना और समझना भी आनंददायक है । हिंदी भाषी क्षेत्रों में लोग अक्सर मुहावरे प्रयोग करते रहते हैं । जिसे सुनकर गंभीर बात भी कई बार हास्य का रुप ले लेती हैं तो कभी हास्यात्मक तरीके से कहे गए मुहावरे अपने गंभीर अर्थ को श्रोता के मर्म तक पंहुचा देते हैं ।

अपना हाथ, जगन्नाथ(अपने हाथ द्वारा कार्य करना सबसे उपयुक्त, स्वयं का कार्य स्वयं करना ही सबसे श्रेष्ठ अथवा अपने आप पर निर्भर रहना ही श्रेष्ठ है)मोहन के पिता सब काम खुद ही करते हैं। वे अपना हाथ, जगन्नाथ पर भरोसा करने वाले व्यक्ति हैं ।

सौ सुनार की, एक लोहार की (निर्बल की सौ चोटों की अपेक्षा बलवान की एक चोट काफी होता है)-मदन कई दिनों से विद्युत विभाग में अपने नए मकान के लिए बिजली के कनेक्शन के लिए भाग दौड़ कर रहा था । किंतु जैसे ही उसके विधायक चाचा ने विद्युत विभाग को एक फोन किया, अगले दिन ही मदन के घर बिजली लग गई । इसे ही कहते हैं सौ सुनार की ओर एक लोहार की।

नाच न जाने आंगन टेढ़ा (कोई कार्य ना कर पाने पर बहाना बनाना )-सरिता को सब्जी काटना तो आता ही नहीं और कहती हैै कि चाकू ही बिना धार का है । नाच न जाने आंगन टेढ़ा।

अधजल गगरी छलकत जाय (जिस  व्यक्ति के पास  कम ज्ञान होता  है, वह अपने आप को, ज्यादा  विद्वान  होने का दिखावा  करता है)-पंडित गंगाधर ने शास्त्र तो पढ़े नही किंतु दिखावा इस तरह करते हैं मानो सबसे बड़े शास्त्रज्ञ वही हों । अधजल गगरी, छलकत जाए।

आँख एक नहीं, कजरौटा दस-दस। ( व्यर्थ का दिखावा) -कर्ज में डूबे होने पर भी सेठ अमीरलाल बेटे की शादी में करोड़पतियों की तरह पैसा खर्च कर रहा था तो लोगों ने कहा कि आंख एक नही कजरौटा दस दस!

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उड़ती चिड़िया पहचानना – (रहस्य की बात दूर से जान लेना) -मधु मौसी तो उड़ती चिड़िया को भी पहचान लेती हैं उनसे कोई बात छिपाना आसान काम नहीं।

नौ दो ग्यारह हो जाना ( गायब हो जाना, भाग जाना) -पुलिस के आते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गया।

चादर तान कर सोना ( निश्चिन्त हो जाना)-परीक्षा समाप्त होते ही तरुण चादर तान कर सो गया।

चींटीके पर निकलना ( छोटे व्यक्ति का घमंड करना) -लाटरी निकलते ही दर्जी मगन लाल किसी से तमीज से बात ही नहीं करता। पैसा आते ही चींटी के भी पर निकल आए।

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ईद का चांद होना (बहुत दिनों बाद दिखाई देना)-अरे भाई साहब !आप तो ईद का चांद ही हो गए। कहां थे इतने दिन?

घर की मुर्गी दाल बराबर( घर के व्यक्ति को सम्मान ना देना)-रमेश अपनी लेखिका पत्नी का जरा भी सम्मान नहीं करता किंतु दुसरी लेखिकाओं के तारीफ़ करते थकता नहीं । घर की मुर्गी दाल बराबर इसी को कहते हैं।

थोथा चना बाजे घना (बहुत अल्प ज्ञान होने पर भी अधिक ज्ञान का दिखावा करना)-थोड़े से पढ़े लिखे होने पर तुम इतना घमंड दिखा रहे हो? सच ही है थोथा चना, बाजे घना।

जिसकी लाठी उसकी भैंस (शक्तिशाली की जीत होती हैं” )-आज का समय शक्ति प्रदर्शन का समय है आज-कल जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला नियम चलता है।

अब -तब करना (टाल मटोल करना)-मेरे रुपए तुम्हें वापस देने ही होंगे। इस तरह अब -तब करने से कोई लाभ नहीं।

अबे-तबे करना. 
(किसी के साथ आदर से पेश ना आना और उसका अनादर करना)-जजसाहब के सामने तमीज से पेश आएं। ये अबे -तबे की भाषा कोर्ट में नहीं चलेगी।

अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोए ( जिस तरह मुर्गी अपने अंडे को सेती हैं और उसे कोई और ले जाता हैं,उसी प्रकार कोई व्यक्ति जी तोड़ परिश्रम करता हैं और उसका श्रेय कोई और ले जाता हैं) -आजकल चालाक होना भी जरूरी है वरना मेहनती आदमी बस मेहनत करता रह जाता है और दूसरे उसके काम का फायदा उठा लेते हैं । अंडा सेवे कोई, बच्चा लेवे कोई।

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अंधा बांटे रेवड़ी फिर- फिर खुद को देय(अधिकार मिलने पर अपने ही लोगों का फायदा करना)-मंत्री बनते ही घनश्याम ने अपने सभी रिश्तेदारों को ऊँचे ओहदों पर लगा दिया ।अंधा बाँटे रेवड़ी , फ़िर-फ़िर खुद को देय।

बूढ़ी घोड़ी, लाल लगाम(उम्र के हिसाब से साज-श्रृंगार ठीक लगता है )-रमा साठ साल की होने पर भी लड़कियों की तरह सजती सँवरती थी तो कुछ लोगों ने उसे देख कर कहा बूढ़ी घोड़ी , लाल लगाम


भगवान जब देता है, छप्पर फाड़कर देता है (अचानक से फायदा होना)-पहले तो करीम के घर फ़ाँके पड़ रहे थे और अब दोनों लड़के सरकारी ऑफ़ीसर में लग गए, बहूएँ भी सरकारी कर्मचारी हैं। भगवान जब देता है, तो छप्पर फ़ाड़ कर देता है ।


सूप तो सूप, छलनी भी बोले जिसमें बहत्तर छेद(मौका हाथ लगते ही अयोग्य व्यक्ति भी उपदेश देने लगते हैं )-पहलवानी में मेडल हारने पर वे लोग भी विनेश फ़ोगाट को कोसने लगे जिन्होंने खुद कभी बॉक्सिंग रिंग देखी भी नहीं । सूप तो सूप अब छलनी भी बोल रही जिसमें बहत्तर छेद ।

अब पछताए होत का जब चिड़ियां चुग गईं खेत(अवसर निकल जाने पर पछताना व्यर्थ है)-पढ़ने का अवसर तो तुमने गँवा दिया। अब रोने से क्या लाभ? अब पछताए होत का जब चिड़ियां चुग गईं खेत

उलटा चोर कोतवाल को डांटे( अपनी गलती होने पर भी दूसरे पर चिल्लाना) -एक तो तुमने मोटर्साइकिल तेज़ चलाकर खुद टक्कर मारी और अब मुझसे लड़ रहे हो ? उलटा चोर कोतवाल को डांटे

दूधों नहाओ, पूतों फलो(अक्सर इस कहावत को घर के बुजुर्गोंके द्वारा  आर्शीवादके रूपमें बोला जाता है इसका अर्थ है सब प्रकार से धन और संतान से संपन्न रहो )  – बहू ने जैसे ही अपनी सास के चरण स्पर्श किए , वे प्रसन्‍न हो कर बोली “दूधों नहाओ, पूतों फलो ।”

अंधों में काना राजा (समाज में थोड़े गुण वाले को श्रेष्ठ समझा जाना)- गाँव में थोड़ा बहुत अंग्रेजी जानने वाला सुरेश ही सबसे अधिक पढ़ा-लिखा समझा जाता है

दूधों नहाओ, पूतों फलो(अक्सर इस कहावत को घर के बुजुर्गोंके द्वारा  आर्शीवादके रूपमें बोला जाता है इसका अर्थ है सब प्रकार से धन और संतान से संपन्न रहो )  – बहू ने जैसे ही अपनी सास के चरण स्पर्श किए , वे प्रसन्‍न हो कर बोली “दूधों नहाओ, पूतों फलो ।”

अंधे के हाथ बटेर (किसी अयोग्य व्यक्ति को महत्वपूर्ण वस्तु या पद प्राप्त हो जाना) चरणजीत अनप्ढ़ होते हुए भी सरपंच बन गया । अंधे के हाथ बटेर लग गई ।

अटकेगा सो भटकेगा (काम  के समय जो व्यक्ति दुविधा या सोच में पड़ जाता  हैं. उसका  काम हमेशा अधुरा ही रहेगा कभी पूरा नहीं होगा )-एक जगह मन लगा कर काम करो । ज्यादा मत सोचो। अटकेगा सो भटकेगा

अपना-अपना कमाना अपना-अपना खाना (अपने काम से मतलब रखो)-जब एक ही कंपनी में काम करना है तो आपस में लड़ने से क्या फ़ायदा ? अपना-अपना कमाना अपना-अपना खाना

एड़ी चोटी का जोर(अपनी तरफ से पूरा प्रयास करना)-मोहन ने आई एस की परीक्षा पास करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया ।

आस्तीन के सांप (साथ रहते हुए भी शत्रुता का व्यवहार करने वाला)-अफ़सोस! जिसे मे दोस्त समझता था उसी ने मुझसे धोखा किया । आज के समय कह नहीं सकते कि कौन आस्तीन का साँप निकल जाएगा ।

हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या (प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नही होती )-माधुरी बहुत अच्छा नाच करती है । तुम कभी भी उसकी योग्यता देख सकते हो। हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या


नेकी कर दरिया में डाल ( किसी की भलाई करके भूल जाना) अच्छे काम का बखान करना उचित नहीं । नेकी कर दरिया में डाल ।

मन के हारे हार है मन के जीते जीत (जो किसी का मन जीत लेता है वह जग जीत लेता है) असफ़लता के कारण निराश होना ठीक नहीं । फ़िर से मुकाबला करो। मन के हारे हार है मन के जीते जीत

बाज के बच्चे मुंडेर पे नही उड़ा करते (बड़ा सोचने वाले छोटी छोटी चीजों के बारे में नही सोचते) आगे बढ़ना है तो छोटी-छोटि बातों को नज़र अंदाज करना सीखों । बाज के बच्चे मुंडेर पे नही उड़ा करते

चिकने घड़े होना (बेशर्म व्यक्ति)-सुभाष को समझाने से कोई लाभ नहीं । वह चिकना घड़ा है ।

कर भला हो भला (किसी का भला करोगे तो तुम्हारा भी भला होगा)-भलाई करते समय अपना लाभ -हानि मत देखो। बुजुर्ग कह गए हैं कि कर भला, हो भला ।

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2 responses to “अजब गजब मुहावरे”

  1. […] में 6 नए जीभ मरोड़ देने वाले वाक्य: अजब गजब मुहावरे अक्ल पर […]

  2. […] में 6 नए जीभ मरोड़ देने वाले वाक्य: अजब गजब मुहावरे अक्ल पर […]

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