
लेखक परिचय :
लेखक का नाम : सीताराम सेकसरिया

जन्म : सन्892 मृत्य: सन् 1982
सीताराम सेकसरिया का जन्म राजस्थान के नवलगढ़ जिले में हुआ था हालांकि उन्होंने अपना अधिकांश जीवन कलकत्ता( कोलकाता) में ही बिताया। आप तत्कालीन राजनीति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे और सक्रियतापूर्वक देश के स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। ये व्यापार से जुड़े हुए थे किंतु शिक्षा के क्षेत्र में भी , विशेषकर महिला शिक्षा के लिये आपने कार्य किया। आप अनेक साहित्यिक , सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्थाओं से जुड़े हुए थे।वे महात्मा गाँधी , रवींद्र नाथ ठाकुर सुभाष चंद्र बोस के नजदीकी रहे। इन्हें पारंपरिक रूप से विद्यालय जा कर अध्ययन का अवसर न मिला , किंतु स्वाध्याय द्वारा पढ़ना-लिखना सीखा और शिक्षा के महत्त्व को खुद समझा और दूसरों को भी समझाय़ा ।
रचनाएँ : स्मृतिकण, मन की बात, बीता युग, नयी याद और एक कार्यकर्ता की डायरी ( दो भागों में ) इनकी मुख्य कृतियाँ हैं ।
“डायरी का एक पन्ना “पाठ का सारांश
’डायरी का एक पन्ना ” लेखक की निजी डायरी का एक हिस्सा है जिसमें उन्होंने 26 जनवरी 1931 के दिन का वर्णन किया है। इस पाठ से तत्कालीन परिस्थितियों , भारतीय जनमानस की भावनाओं और ब्रिटिश शासन की स्थिति का पता चलता है। इस दिन कलकत्ता( कोलकाता) निवासियों ने दूसरी बार स्वतंत्रता दिवस मनाया था। स्वतंत्रता मिलने से पूर्व ही स्वतंत्रता दिवस मना कर भारतीय जनमानस ने ब्रिटिश शासन को नकारने का संदेश दिया था।
पाठ के आरंभ मे लेखक ने बताया कि 26 जनवरी 1930 को भारत वासियों ने स्वतंत्रता दिवस मनाया था और दूसरे वर्ष जब इसकी पुनरावृत्ति की गई तो इसकी काफ़ी तैयारियाँ की गईं। सिर्फ़ प्रचार में ही दो हज़ार रुपया खर्च किया गया था। लेखक सारा कार्यभार स्वयं पर समझते थे और अन्य कार्यकर्ताओं को भी यही समझाया गया था। इस दिन बड़े बाज़ार के प्रत्येक घर में भारतीय ध्वज लगाया गया और सजावट की गई थी। लोगों का जोश इस तरह था मानो स्वतंत्रता मिल गई हो। विदेशी शासन भी इन गतिविधियों से अवगत था और शहर के चप्पे -चप्पे में विभिन्न पुलिस बल इस कार्यक्रम को रोकने के लिए लगाया गया था।
कार्यक्रम मोनुमोंट के नीचे होना था लेकिन पुलिस ने उस स्थान को घेर लिया था। श्रद्धानंद पार्क में बंगाल प्रांतीय विद्यार्थी संघ के अविनाश बाबू ने झंडा फ़हराया जिसके कारण पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। बड़ा बाज़ार में झंडा फ़हराने गए कांग्रेस कमेटी के युद्ध मंत्री हरिश्चंद्र सिंह को भीतर न जाने दिया गया और लोगों से मारपीट की गई और गुजराती महिला सेविका संघ की लड़कियों को जुलूस निकालने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया। 11 बजे मारवाड़ी बालिका विद्यालय में झंडा फ़हराया गया जिसमें मदालसा बजाज, जानकीदेवी आदि महिला नेत्रियों ने भाग लिया। दो-तीन बजे जिनमें सुभाष बाबू के जुलूस का प्रबंध करने वाले पुरुषोत्तम दास और पूर्णोदास आदि कई लोगों को पकड़ लिया गया। हालांकि तब तक सारा प्रबंध हो गया था। दिन में पुलिस कम हो गई जिससे लोगों को शाम के समय का कार्यक्रम ठीक -ठाक तरीके से होने की उम्मीद हुई । शाम चार बज़े प्रोग्राम होने की घोषणा थी किंतु उत्साह के कारण तीन बजे ही अनेक लोग टोलियों में मैदान में इकट्ठे हो गए। पुलिस कमीश्नर ने विभिन्न धाराएँ लगा कर झंडा न फ़हराने की चेतावनी दी थी लेकिन कौंसिल ने ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फ़हराने का नोटिस दे कर प्रशासन को खुली चुनौती दे कर ओपेन लड़ाई शुरू कर दी।
चार बजे सुभाष बाबू आए । उनको चौरंगी पर रोका गया किंतू भीड़ अधिक होने के कारण पुलिस जुलूस रोक न पाई इसलिए लाठी चार्ज किया गया , जिसमें कई लोग घायल हो गए। सुभाश बाबू जोर-जोर से नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। पुलिस लाठी चार्ज के कारण एक कार्यकर्ता क्षितीश चटर्जी का सिर इस तरह फ़ट गया था कि खून बहने के कारण उसकी तरफ़ देखा भी न जा रहा था। इस जुलूस में महिलाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्स लिया। वे मोनूमेंट की सीढ़ी पर चढ़कर झंडा फ़हरा रही थी और घोषणा पत्र पढ़ रही थीं।लोगों में उत्साह इतना था कि लाठियाँ पड़ने पर भी वे अपनी जगह से हटते न थे। सुभाष बाबू को पकड़ लिये जाने पर महिलाओं ने जुलूस जारी रखा। जिसमें काफ़ी भीड़ थी। पुलिस लाठी चार्ज के कारण धर्म तल्ले के मोड़ पर जुलूस टूट गया। कई महिलाओं को पकड़ कर लाल बाज़ार जेल भेज दिया। अनेक लोग घायल हुए। स्त्रियों के जुलूस जिसका नेतृत्व विमल प्रतिभा कर रही थीं उनको रोका गया और भीड़ पर पुलिस द्वारा लगातार लाठी चलाई गई। महिलाओं की बड़ी संख्या जुलूस में शामिल हुईं। 105 स्त्रियों ने गिरफ़्तारी दी।
इस दौरान पुलिस द्वारा अनेक लोगों को गिरफ़्तार कर लाल बाज़ार जेल ले जाया गया वृजलाल गोयनका जो लेखक के दमदम जेल के साथी थे। वे पहले तो झंडा पकड़ कर इतने जोश से भागे कि खुद ही गिर गएऔर बाद में एक घुड़सवार पुलिस ने उन्हें लाठी मारी तथा कुछ दूरी तक घसीट कर ले जाने के बाद छोड़ दिया तब वह जुलूस में शामिल हो गए और जब पुलिस ने दो सौ आदमियों को एक साथ गिरफ़्तार किया तब वह भी अंततः पकड़े गए। इस से लोगों के उत्साह का पता चलता है। लेखक ने फोटोग्राफ़ी की व्यवस्था की थी।शाम तक पुलिस ने सभी लोगों को छोड़ दिया। सभी घायल जो अस्पताल आए थे उनके चित्र लिये गए। 160 लोग अस्पताल तक पहुँचे और बाकी ऐसे ही घर चले गए। अनुमानतः 200 से अधिक लोग घायल हुए होंगे । यह सब अपूर्व हुआ। इससे पहले बंगाल में ऐसा आंदोलन कभी नहीं हुआ था। इस दिन की घटना के बाद बंगाल या कलकत्ता के नाम से यह कलंक हट गया कि वहाँ स्वतंत्रता संग्राम के लिये कुछ नहीं हो रहा था।
प्रश्न
मौखिक
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक–दो पंक्तियों में दीजिए–
प्रश्न 1. कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्त्वपूर्ण था?
उत्तर– 26 जनवरी, 1931 का दिन कलकत्तावासियों के लिए इसलिए महत्त्वपूर्ण था, क्योंकि सन् 1930 में गुलाम भारत में पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। इस वर्ष उसकी पुनरावृत्ति थी, जिसके लिए काफ़ी तैयारियाँ पहले से ही की गई थीं। इसके लिए लोगों ने अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराया था और उन्हें इस तरह से सजाया गया था कि ऐसा मालूम होता था, मानों स्वतंत्रता मिल गई हो।
प्रश्न 2.सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था?
उत्तर–सुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदास पर था।
प्रश्न 3.विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर-विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया तथा अन्य लोगों को मारा और वहाँ से हटा दिया।
प्रश्न 4.लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का संकेत देना चाहते थे?
उत्तर- लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर विदेशी शासन का विरोध का संकेत देना चाहते थे ।
प्रश्न 5.पुलिस ने बड़े-बड़े पार्को तथा मैदानों को क्यों घेर लिया था?
उत्तर-पुलिस ने बड़े-बड़े पार्को तथा मैदानों को इसलिए घेर लिया था ताकि लोग वहाँ एकत्रित न हो सकें। पुलिस नहीं चाहती थी कि लोग एकत्र होकर पार्को तथा मैदानों में सभा करें तथा राष्ट्रीय ध्वज फहराएँ। पुलिस पूरी ताकत से गश्त लगा रही थी। प्रत्येक मोड़ पर गोरखे तथा सार्जेंट मोटर-गाड़ियों में तैनात थे। घुड़सवार पुलिस का भी प्रबंध था।
लिखित
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए–
प्रश्न 1. 26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या–क्या तैयारियाँ की गईं?
उत्तर-26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए कलकत्ता शहर ने शहर में जगह-जगह झंडे लगाए गए थे। केवल प्रचार पर ही दो हज़ार रुपया खर्च किया गया था।उस समय दो हज़ार रुपए एक बड़ी राशि थी। कई स्थानों पर जुलूस निकाले गए तथा झंड़ा फहराया गया था। कलकत्ता के लोगों ने अपने-अपने घरों को खूब सजाया। अधिकांश मकानों पर राष्ट्रीय झंडा फहराया गया। कुछ मकानों और बाज़ारों को ऐसे सजाया गया कि मानो स्वतंत्रता ही प्राप्त हो गई हो। कलकत्ते के प्रत्येक भाग में झंडे लहराए गए।
प्रश्न 2.‘आज जो बात थी वह निराली थी’-किस बात से पता चल रहा था कि आज का दिन अपने आप में निराला है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर– 26 जनवरी का दिन अपने-आप में निराला इसलिए था क्योंकि स्वतंत्रता दिवस मनाने की प्रथम आवृत्ति थी। पुलिस ने सभा करने को गैरकानूनी कहा था किंतु सुभाष बाबू के आह्वान पर पूरे कलकत्ता में अनेक संगठनों के माध्यम से जुलूस व सभाओं की जोशीली तैयारी थी। कलकत्तावासी पूरे उत्साह पूरी नवीनता के साथ इस दिन को यादगार दिन बनाने की तैयारी में जुटे थे। अंग्रेज़ी सरकार के कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बाद भी बड़ी संख्या में आम जनता और कार्यकर्ता संगठित होकर मोनुमेंट के पास एकत्रित हो रहे थे। स्त्रियों ने भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दिन अंग्रेज़ी कानून को खुली चुनौती देकर कलकत्तावासियों ने देश-प्रेम और एकता का अपूर्व प्रदर्शन किया।
प्रश्न 3. पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?
उत्तर– पुलिस कमिश्नर ने नोटिस निकाला था कि कोई भी जनसभा करना या जुलूस निकालना कानून के खिलाफ़ होगा। सभाओं में भाग लेने वालों को दोषी माना जाएगा। कौंसिल ने नोटिस निकाला था कि मोनुमेंट के नीचे चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा तथा स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी। इसमें सर्व-साधारण की उपस्थिति होनी चाहिए। इस प्रकार ये दोनों नोटिस एक दुसरे के खिलाफ़ थे।
प्रश्न 4. धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?
उत्तर– जब सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया तो स्त्रियाँ जुलूस बनाकर चलीं जुलूस में बहुत बड़ी भीड़ इकट्ठा हो गई। पुलिस ने लाठी चार्ज से उन्हें रोकना चाहा ।जुलूस में भाग लेनेवाले आंदोलनकारियों पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठियाँ बरसानी शुरू कर दी थीं। जिससे बहुत सारे लोग घायल हो गए ,कुछ लोग वहीं बैठ गए, और कुछ पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए। था। मोड़ पर पचास- साठ स्त्रियाँ धरना देकर बैठ गईं थीं। पुलिस ने उन्हें पकड़कर लालबाज़ार भेज दिया था।इसलिए जुलूस टूट गया।
प्रश्न 5. डॉ० दासगुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख–रेख तो कर ही रहे थे, उनके फ़ोटो भी उतरवा रहे थे। उन लोगों के फ़ोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-डॉ० दास गुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख-रेख के साथ उनके फ़ोटो भी उतरवा रहे थे, ताकि पूरा देश अंग्रेज़ प्रशासकों के जुल्मों से अवगत होकर उनका विरोध करके उन्हें देश से बाहर निकालने के लिए तैयार हो जाए। दूसरा यह भी पता चल सकता था कि बंगाल में भी स्वतंत्रता की लड़ाई में बहुत काम हो रहा है।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए–
प्रश्न 1.सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?
उत्तर–सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री-समाज ने एक अहम भूमिका निभायी थी। स्त्री समाज ने जगह-जगह से जुलूस निकालने की तथा ठीक स्थान पर पहुँचने की तैयारी और कोशिश की थी। स्त्रियों ने मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहरा करे घोषणा-पत्र पढ़ा था तथा पुलिस के बहुत-से अत्याचारों का सामना किया था। अपनी गिरफ्तारियाँ करवाई तथा उनपर लाठियाँ बरसाए जाने पर भी वे पीछे नहीं हटीं। विमल प्रतिभा, जानकी देवी और मदालसा बजाज आदि ने जुलूस का सफल नेतृत्व किया था।
प्रश्न 2. जुलूस के लालबजार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?
उत्तर– जुलूस के लाल बाज़ार आने पर भीड़ बेकाबू हो गई। पुलिस डंडे बरसा रही थी, लोगों को लॉकअप में भेज रही थी। स्त्रियाँ भी अपनी गिरफ़्तारी दे रही थीं। स्त्रियों का नेतृत्व करनेवाली मदालसा भी पकड़ी गई थी। उसको थाने में मारा भी गया । दल के दल नारे लगा रहे थे। लोगों का जोश बढ़ता ही जा रहा था। लाठी चार्ज से लोग घायल हो गए थे। खून बह रहा था। चीख पुकार मची थी, फिर भी उत्साह बना हुआ था। इस जुलूस में लगभग 200 व्यक्ति घायल हुए जिसमें से कुछ की हालत गंभीर थी।
प्रश्न 3. जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।’ यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।
उत्तर- यह सभा ऐसे समय में की गई जब देश गुलामी की जंजीरों जकड़ा हुआ था अग्रेज़ी शासक सिर्फ़ जनता का आर्थिक दोहन कर रहे थे । जनता की पीड़ा समझने के लिए विदेशी शासन तैयार नहीं था ।इसीलिए लोगों में विद्रोह की भावना थी ।गुलामी से मुक्त होने को हर देशवासी दृढ़ प्रतिज्ञ था और देश की आज़ादी के लिए हर व्यक्ति अपना सर्वस्व लुटाने को तैयार था। ।गाँधी जी द्वारा दाँडी मार्च कर नमक कानून तोड़कर कानून तोड़ने का कार्य शुरू हुआ था। तब से भारत के अनेक हिस्सों में ऐसे कानून जो जनता के हित में न हों तोड़ने का सिलसिला चल पड़ा। अंग्रेज़ों ने कानून बनाकर आन्दोलन, जुलूसों को गैर कानूनी घोषित किया हुआ था| पुलिस कमिश्नर का नोटिस निकला कानून की धारा के अनुसार कोई सभा नहीं हो सकती और सभा में भाग लेने वालों को दोषी समझा जाएगा, तो कौंसिल द्वारा भी मोनुमेंट के नीचे ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाने तथा स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जा्ने की घोषणा हुई।। इस तरह से पुलिस कमिश्नर द्वारा सभा स्थगित करने जैसे लागू कानून को कौंसिल की तरफ़ से भंग किया गया था; जोकि सर्वथा उचित था, क्योंकि इसके बिना आज़ादी की आग प्रज्वलित न होती।
प्रश्न 4. बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप में रखा गया, बहुत-सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों है? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर-हमारे विचार में 26 जनवरी 1931 का दिन अद्भुत था क्योंकि इस दिन कलकतावासियों को अपनी देशभक्ति, एकता व साहस को सिद्ध करने का अवसर मिला था। उन्होंने देश का दूसरा स्वतंत्रता दिवस पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाया। अंग्रेज़ प्रशासकों ने इसे उनका अपराध मानते हुए उनपर और विशेष रूप से महिला कार्यकर्ताओं पर अनेक अत्याचार किए लेकिन पुलिस द्वारा किया गया क्रूरतापूर्ण व्यवहार भी उनके इरादों को बदल नहीं सका और न ही उनके जोश कम कर पाया । एकजुट होकर राष्ट्रीय झंडा फहराने और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा करने का जो संकल्प उन सबने मिलकर लिया था उसे उन्होंने यातनाएँ सहकर भी उस दिन पूरा किया।
(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए-
प्रश्न 1.आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है वह आज बहुत अंश में धुल गया।
उत्तर-इसका आशय है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए इतना बड़ा आंदोलन बंगाल या कलकत्ता में नहीं हुआ था। यहाँ की जनता के विषय में देश के लोगों की यह राय थी कि कलकत्ता वासियों के मन में स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए पर्याप्त जोश नहीं था, यह बात कलकत्ता /बंगाल के माथे पर कलंक थी। लेकिन इस कलंक को 26 जनवरी, 1931 को हुए अपूर्व प्रदर्शन ने धो दिया। इस संग्राम में न केवल पुरुषों ने अपितु महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया था और जेल भी गए। 26 जनवरी, 1931 के अपूर्व प्रदर्शन के बाद बंगाल या कलकत्ता के नाम से यह कलंक हट गया कि वहाँ स्वतंत्रता संग्राम के लिये कुछ नहीं हो रहा था।
प्रश्न 2.खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी।
उत्तर-प्रस्तुत पंक्ति का यह आशय है कि जब 26 जनवरी सन् 1931 के दिन कलकत्ता में स्थान-स्थान पर झंडोत्सव मनाए गए । ब्रिटिश सरकार ने क्रांतिकारियों को रोकने के लिए भारतीयों पर अनेक जुल्म किए और पुलिस बल का प्रयोग किया। पुलिस कमिश्नर ने अनेक धाराओं के नाम बता कर कहा कि कोई सभा नहीं हो सकती है और सभा में भाग लेने वाले दोषी समझे जाएंगे किंतु बावजूद नोटिस के भी कौंसिल द्वारा उन्हें खुली चुनौती दी गई कि न केवल एकजुट होकर झंडा फहराया जाएगा, अपितु स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा भी पढ़ी जाएगी। इतना ही नहीं उन्होंने सटीक समय चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फ़हराने की घोषणा की। आजादी के इतिहास में ऐसी खुली चुनौतियाँ देकर पहले कभी कोई सभा आयोजित नहीं हुई थी।
भाषा-अध्ययन
रचना की दृष्टि से वाक्य के प्रकार:
1 रचना की दृष्टि से वाक्य तीन प्रकार होते हैं –
सरल वाक्य – सरल वाक्य में कर्ता, कर्म, पूरक, क्रिया और क्रिया विशेषण घटकों या इनमें से कुछ घटकों का योग होता है। स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त होने वाला उपवाक्य ही सरल वाक्य है।
उदाहरण – लोग टोलियाँ बनाकर मैदान में घूमने लगे।
संयुक्त वाक्य – जिस वाक्य में दो या दो से अधिक स्वतंत्र या मुख्य उपवाक्य समानाधिकरण योजक से जुड़े हों, वह संयुक्त वाक्य कहलाता है।
योजक शब्द – और, परंतु, इसलिए आदि।
उदाहरण – मोनूमेंट के नीचे झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी।
मिश्र वाक्य – वह वाक्य जिसमें एक प्रधान उपवाक्य हो और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों, मिश्र वाक्य कहलाता है।
उदाहरण – जब अविनाश बाबू ने झंडा गाड़ा तब पुलिस ने उनको पकड लिया?
निम्नलिखित वाक्यों को सरल वाक्यों में बदलिए
I. (क) दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाजार गया और वहाँ पर गिरफ्तार हो गया।
(ख) मैदान में हज़ारों आदमियों की भीड़ होने लगी और लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे।
(ग) सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया और गाड़ी में बैठाकर लालबाजार लॉकअप में भेज दिया गया।
उत्तर:- क) दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाजार जाकर गिरफ्तार हो गया।
(ख) हज़ारों आदमियों की भीड़ होने पर लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे।
(ग) सुभाष बाबू को पकड़कर गाड़ी में बैठाकर लालबाजार लॉकअप में भेज दिया गया।
II. ” ‘बड़े भाई साहब’ पाठ में से भी दो-दो सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य छाँटकर लिखिए।
उत्तर:-
सरल वाक्य :
1.मेरा पढ़ने में बिल्कुल जी न लगता था।
2.मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता।
संयुक्त वाक्य :
1.मैं तुमसे पाँच साल बड़ा हूँ और हमेशा रहूँगा।
2.उनकी नज़र मेरी ओर उठी और प्राण निकल गए।
मिश्र वाक्य :
1.कमरे में इस तरह दबे पाँव आता कि उन्हें खबर न हो।
2. जब से उनकी माताजी ने प्रबंध अपने हाथ में लिया है, जैसे घर में लक्ष्मी आ गई है।
2.निम्नलिखित वाक्य संरचनाओं को ध्यान से पढ़िए और समझिए कि जाना, रहना और चुकना क्रियाओं का प्रयोग किस प्रकार किया गया है।
(क) 1. कई मकान सजाए गए थे।
2. कलकत्ते के प्रत्येक भाग में झंडे लगाए गए थे।
(ख) 1. बड़े बाजार के प्राय : मकानों पर राष्ट्रीय झंडा फहरा रहा था।
2. कितनी ही लारियाँ शहर में घुमाई जा रही थीं।
3. पुलिस भी अपनी पूरी ताकत से शहर में गश्त देकर प्रदर्शन कर रही थी।
(ग) 1. सुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदास पर था, वह प्रबंध कर चुका था।
2. पुलिस कमिश्नर का नोटिस निकल चुका था।
3.नीचे दिए गए शब्दों की संरचना पर ध्यान दीजिए –
विद्या + अर्थी = विद्यार्थी
‘विद्या’ शब्द का अंतिम स्वर ‘आ’ और दूसरे शब्द ‘अर्थी’ की प्रथम स्वर ध्यनि ‘अ’ जब मिलते हैं तो वे मिलकर दीर्घ स्वर ‘आ’ में बदल जाते हैं। यह स्वर संधि है जो संधि का ही एक प्रकार है।
संधि शब्द का अर्थ है – जोड़ना। जब दो शब्द पास-पास आते हैं तो पहले शब्द की अंतिम ध्वनि बाद में आने वाले शब्द की पहली ध्वनि से मिलकर उसे प्रभावित करती है। ध्वनि परिवर्तन की इस प्रक्रिया को संधि कहते हैं। संधि तीन प्रकार की होती है – स्वर संधि, व्यंजन संधि, विसर्ग संधि। जब संधि युक्त पदों को अलग- अलग किया जाता है तो उसे संधि विच्छेद कहते हैं; जैसे – विद्यालय – विद्या +आलय
नीचे दिए गए शब्दों की संधि कीजिए –
1. श्रद्धा + आनंद
2. प्रति + एक
3. पुरुष + उत्तम
4. झंडा + उत्सव
5. पुन: + आवृत्ति
6. ज्योति: + मय
उत्तर:- 1. श्रद्धा + आनंद =श्रद्धानंद
2. प्रति + एक = प्रत्येक
3. पुरुष + उत्तम =पुरुषोत्तम
4. झंडा + उत्सव =झंडोत्सव
5. पुन: + आवृत्ति =पुनरावृत्ति
6. ज्योति: + मय =ज्योतिर्मय




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