अर्जुन और मुकुल अच्छे दोस्त थे। वे हमेशा साथ ही रहते। मज़े की बात यह थी कि वे दोनों एक ही अपार्टमेंट में रहते थे। स्कूल के बाद भी उन्हें साथ रहने का ढेर सारा समय मिल जाता। वे देर शाम तक अपने अपार्टमेंट में बने पार्क में समय बिताते। वैसे तो उनके परिवार में उनकी इस गहरी दोस्ती से किसी को कोई आपत्ति न थी किंतु ज्यादा समय खेल में बिताने से उनकी पढ़ाई में इसका बुरा असर दिखने लगा। दोनों के माता-पिता इस बारे में चिंतित हुए। उन्होंने अपने बच्चों को समझाने और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कराने की कोशिश की , किंतु सब बेकार।

विद्यालय में अध्यापिकाएँ भी अर्जुन और मुकुल के पढ़ाई में गिरते प्रदर्शन को देखकर चिंतित रहने लगी। उनको अब अकसर इस बारे में डाँट पड़ने लगी। पर दोनों पर इसका कोई असर न हुआ। वे कक्षा में अकसर बात करते हुए पाए जाते। एक दिन की बात थी, आज फ़िर से बीना मैम की नज़र बचाकर दोनों बातों में मशगूल थे। ्बीना मैम एक सख्त मिज़ाज़ , खड़ूस और बूढ़ी अध्यापिका थीं । दोनों को काम की जगह बात करते देख वे आग-बबूला हो उठीं । उन्होंने तुरंत दोनों को कक्षा से बाहर खड़ा कर दिया । अर्जुन और मुकुल तो यही चाहते थे। वे मन ही मन खुश होते हुए बाहर जा खड़े हुए। फ़िर वह वहीं बातों में खो गए।उन्हें पता ही न चला कि कितनी देर हो चुकी है। तभी विद्यालय की घंटी बज़ी। अर्जुन और मुकुल ने दरवाज़े के भीतर झाँका। आश्चर्य! वहाँ कोई नहीं था। न उनके सहपाठी , न बीना मैम , और न कोई दूसरे बच्चे और न कोई चपरासी। स्कूल बिल्कुल खाली था सुनसान। ये लोग कब वापिस चले गए? कहाँ चले गए? वे दोनों उदास होकर सोचने लगे। फ़िर वे अपने-अपने बस्ते लेकर स्कूल से बाहर आ गए। आश्चर्य आज सभी गलियाँ खाली थीं न कोई गाड़ी थी और न कोई आदमी।
वे हैरान , परेशान होते हुए घर पहुँचे । देखा कि घर में भी कोई नहीं था न माता-पिता और न कोई पास-पड़ोसी। मुकुल ने अर्जुन से कहा,” लगता है कि अब हम दोनों ही इस शहर में अकेले हैं । लेकिन मुझे भूख लगी है।” अर्जुन ने कहा, ” मेरे पास कुछ पैसे पड़े हैं चलो पास की बेकरी से कुछ खाने के लिये ले आते हैं। “
दोनों दोस्त बेकरी पहुँच गए। बेकरी में लाइट्स जल रहीं थीं पर कोई इनसान दिखा। उन्होंने बेकरी वाले को खूब आवाजें दीं . पर कोई न आया। तब अर्जुन ने पैसे बेकरी के काउंटर पर रख दियेऔर कुछ केक और ब्रेड उठा लिये। जब वह वापस मुड़ा तो उसने एक स्लिप काउंटर के किनारे चिपकी देखी। अर्जुन ने ध्यान से पढ़ा। चिट में लिखा था ” शहर में ऐलियंस का हमला हुआ है। ये सभी को पकड़कर लाल पहाड़ की गुफा में ले जा रहे हैं। ” नोट जल्दीबाज़ी में लिखा गया मालूम पड़ता था। अर्जुन ने नोट मुकुल को दिखाया। अब दोनों बहुत डर चुके थे।
तभी उन्होंने बाहर कुछ शोर सुना। बाहर चार- हाथ , चार पैर और सिर पर तीन सींग वाले ऐलियंस दिखे।
अर्जुन और मुकुल तेज़ी से बाहर को भागे। तभी एक ऐलियन ने उन्हें देख लिया और पकड़ने भागा। इसी चक्कर में मुकुल का पैर फ़िसल गया और वह गिर गया। तभी एक ऐलियन उसके बहुत पास आ गया। इसी बीच अर्जुन ने मुकुल का हाथ पकड़ लिया और उसे घसीटता हुआ सा बाहर ले आया।
वे दोनों बहुत डर चुके थे। अब वे एक चट्टान के पीछॆ छिप कर सुस्ताने लगे। तभी मुकुल ने किसी के बड़े-बड़े पैर देखे। उसने महसूस किया कि एक बहुत ही डरावना ऐलियन वहीं खड़ा था। मुकुल की आवाज़ उसके गले में ही अटक गई । तभी उस ऐलियन ने मुकुल के कॉलर को पकड़ कर उसे उठा लिया। मुकुल के गले से रुंधी हुई घों-घों की आवाज़ आने लगी। तभी ऐलियन ने कहा, ” हा, हा, हा! मैं आलसीपन हूँ मैं उन्हीं बच्चों को पकड़ता हूँ जो पढ़ाई में ध्यान नहीं देते। जो बच्चा पढ़ता नहीं है; वह ऐसे ही फिसड्डी बनकर अकेले रह जाताहै। बताओ! फिर से पढ़ाई से जी चुराओगे और कक्षा में बातें करोगे।”
मुकुल ने जोर से चिल्ला कर नहीं,नहीं कहने की कोशिश की । किंतु उसके मुँह से आवाज न निकल पा रही थी। साँस घुटर्ती हुई महसूस हो रही। लगा , अभी प्राण ही निकल जाएँगे। तभी उसने मम्मी की आवाज सुनी। “मुकुल, मुकुल!” माँ मुकुल को उठाने के लिये हिला रही थीं। मुकुल जल्दी से मम्मी के गले लिपट गया और रोने लगा।
मुकुल ने स्वयं से प्रतिज्ञा की कि अब से पढ़ाई से नहीं भागेगा और दोस्ती, खेल और पढ़ाई के बीच सामंजस्य बना कर आगे बढ़ेगा।
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