भेशक गुलाब प्रकृति का नायाब तोहफ़ा है। अपनी सुंदरता और मोहक सुगंध से गुलाब सबको बरबस ही अपनी ओर आकर्षित कर लेता है।हिंदी साहित्य की वाटिका में गुलाब को ‘पुष्प-राज’ की उपाधि प्राप्त है। यह केवल अपनी सुगंध के लिए ही नहीं, बल्कि अपने विरोधाभासी अस्तित्व—अर्थात ‘काँटों के मध्य खिलने वाली कोमलता’ के लिए कवियों और रचनाकारों का प्रिय रहा है। इसे देव-पुष्प भी कहा जाता है क्योंकि सुगंध और रंगों की विविधता और विभिन्नता में इसके जैसा कोई दूसरा फूल नहीं।

Close-up bed of blooming colorful roses

गुलाब एक ऐसा पुष्प है जो पूरे भारत में पाया जाता है और पसंद किया जाता है। जन्म से लेकर मृत्यु तक, और प्रणय से लेकर प्रयाण तक सभी जाति -वर्ग-भाषा के लोगों द्वारा भारत में इसे प्रार्थमिकता दी जाती है। कभी सोचा है कि विविधता भरे इस देश की 22 राजकीय भाषाओं में गुलाब को क्या कहा जाता है?

आइए , जानते हैं 22 राजकीय भाषाओं में गुलाब को क्या कहा जाता है?

भारत की 22 राजकीय भाषाओं में “गुलाब” के नाम

भाषानाम
हिंदीगुलाब
संस्कृतशतपत्री / पाटलम्
अंग्रेज़ीRose
बंगालीগোলাপ (गोलाप)
मराठीगुलाब
गुजरातीગુલાબ (गुलाब)
पंजाबीਗੁਲਾਬ (गुलाब)
असमियाগোলাপ (गोलाप)
उड़िया (ओड़िया)ଗୋଲାପ (गोलाप)
कन्नड़ಗುಲಾಬಿ (गुलाबी)
तमिलரோஜா (रोजा)
तेलुगूగులాబి (गुलाबी)
मलयालमറോസ് (रोस)
कश्मीरीगुलाब
उर्दूگلاب (गुलाब)
कोंकणीगुलाब
मणिपुरी (मैतेई)ꯒꯨꯂꯥꯞ (गुलाप)
नेपालीगुलाब
डोगरीगुलाब
मैथिलीगुलाब
संथालीᱜᱩᱞᱟᱵ (गुलाब)
बोडोगुलाब

रोचक बात:

हमने देखा कि —
“गुलाब / गोलाप / गुलाबी / रोजा / रोस”
ये सब एक ही मूल से निकले हैं, बस भाषा के अनुसार बदल गए।

भारत की 22 अनुसूचित भाषाओं में “गुलाब” का नाम ज़्यादातर “गुलाब” ही है, या इससे मिलता-जुलता शब्द ही है। गुलाब मूल रूप से फ़ारसी शब्द है और इसे भारत की अन्य भाषाओं ने इसी नाम से स्वीकार किया है।

क्या आपको यह जानकारी पहले से मालूम थी?

निष्कर्ष

भारत की 22 भाषाओं में “गुलाब” के नाम भले ही थोड़े अलग-अलग सुनाई देते हों, लेकिन उनकी जड़ एक ही सांस्कृतिक धारा से जुड़ी है। कहीं यह “गुलाब” है, कहीं “गोलाप”, तो कहीं “रोजा”—पर हर भाषा में इसकी सुगंध, सुंदरता और भावनात्मक महत्व एक जैसा ही बना रहता है।

यह हमें सिखाता है कि भाषाएँ भले बदल जाएँ, पर भाव और प्रकृति की सुंदरता एक ही रहती है। 🌹

इसलिए अगली बार जब आप गुलाब देखें, तो याद रखिए—यह सिर्फ एक फूल नहीं, बल्कि भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है।

99% लोगों को नहीं पता—गुलाब को संस्कृत में क्या कहते हैं?

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