गुलाब को संस्कृत में क्या कहते हैं? जानकर चौंक जाएंगे!
गुलाब’ केवल एक पुष्प नहीं, बल्कि सौंदर्य, प्रेम और कोमलता का जीवंत प्रतीक है। यह केवल अपनी सुगंध के लिए ही नहीं, बल्कि अपने विरोधाभासी अस्तित्व—अर्थात ‘काँटों के मध्य खिलने वाली कोमलता’ के लिए कवियों और रचनाकारों का प्रिय रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुलाब को संस्कृत में क्या कहा जाता है?

जानिए गुलाब को संस्कृत में क्या कहते हैं?
आप रोज़ “गुलाब” सुनते हैं… लेकिन इसका संस्कृत नाम जानते हैं?
गुलाब को संस्कृत में “शतपत्री” कहा जाता है।
शत = सौ और पत्री = पंखुड़ियाँ
यानी सौ पंखुड़ियों वाला सुंदर फूल । इसका कारण है कि इसमें कई पंखुड़ियाँ होती हैं। गुलाब की अनेकों पंखुड़ियों के कारण ही इसे शतपत्री कहा गया।
सोचिए… हमारे पूर्वजों ने कितनी खूबसूरती से नाम रखा—
जहाँ सिर्फ नाम नहीं, बल्कि फूल की पूरी पहचान छिपी है!
संस्कृत में शब्द सिर्फ शब्द नहीं होते, संस्कृत में किसी पद या संज्ञा की रचना इस प्रकार होती है कि उसके सभी गुण प्रकट हो जाएँ।
संस्कृत में गुलाब के अन्य नाम:
संस्कृत में गुलाब के कुछ अन्य नाम भी हैं जो इस प्रकार हैं —
1.देव पुष्प ( Dev pushpa)
अपनी मोहक सुगंध के कारण यह देवताओं को प्रिय है और उन्हें अर्पित किया जाता है । शिव पुराण में गुलाब को देव पुष्प कहा गया है ।
2. तरुणी (Taruṇī)
अपने लालित्य ,कोमलता और सुंदरता के कारण इसको युवावस्था का प्रतीक माना गया है और साहित्य में गुलाब को तरुणी नाम से भी पुकारा गया हौ।
3. सौगन्धिका (Saugandhikā)
सुगंध से भरपूर फूल होने के कारण संस्कृत में इसका एक नाम सौगन्धिका है।
4. पुष्पराज (Pushparāja) (काव्यात्मक प्रयोग)
अपनी अप्रतिम सुंदरता और मोहकता के कारण कवियों ने गुलाब को पुष्पराज की संज्ञा दी है।
5. पाटलम् / पाटलपुष्पम् – अपने स्वाभाविक मूल रंग गुलाबी रंग से जुड़ा नाम, कभी-कभी गुलाब के लिए प्रयोग पाटलम् या पाटलपुष्पम् का भी प्रयोग किया जाता है।
बताइए, क्या आपको ये नाम पहले पता था?
और किस फूल का संस्कृत नाम जानना चाहेंगे?
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