बीते दो दिनों में सोशल मीडिया पर अभय सिंह iit बाबा फिर से वायरल हो रहे हैं । लेकिन इस बार उन्हें गालीया पड़ रही हैं कारण उनके द्वारा क्रिकेट पर की गई एक भविष्य वाणी गलत हो गई।
कुंभ में अचानक लाइम लाइट में आए बाबा एक पॉडकास्ट में भारत के न जीतने का दावा करते हुए दिखते हैं और अगले ही दिन भारत क्रिकेट मैच में जीत हासिल करता है और बस यही मौका था कि लोगों ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया।
स्वयं को शिक्षित, समझदार, संस्कारी, कट्टर हिन्दू आदि कहने वाली झांटू जनता ने अभय सिंह iit बाबा को दिल खोल कर गालियां देनी शुरू कर दी। उन्होंने न सिर्फ अभय सिंह को गालियां दी बल्कि उनकी मां और बहन के लिए भी अपशब्द लिखे। ऐसा करके ऐसे कथित देशभक्तों को लगा मानो उन्होंने अपनी देशभक्ति का बहुत बड़ा प्रमाण दे दिया। जबकि वे वास्तव में अपने नकारात्मक व्यक्तित्व और कुंठित मानसिकता का ही परिचय दे रहे थे।
असल बात यह है कि इन गालियां बकने वालों से खुद से कोई काम तो होता नहीं। इनकी असल जलन और कुंठा यह थी कि जिस आई आई टी को पास करना इनके किसी भी तरह बस में नहीं था iit जिनके लिए मात्र मुंगेरी लाल के हसीन सपने ही थी उस इम्तहान को अभय सिंह ने बिना परेशानी के एक बार में ही न सिर्फ पास किया बल्कि डिग्री भी हासिल की। इतना ही नहीं अभय सिंह ने उस गुलामी के सिस्टम को भी लात मार दी जिस से बाहर निकल आना हर किसी के बस की बात नहीं।
अभय सिंह iit ने न तो किसी को लुटा, न ठगबंदी की और न किसी से फूटी कौड़ी की मांग की। अपना खा रहे और अपने तरीके से जी रहे हैं । अभय सिंह के नोकरी न करने से भी लोगों को समस्या है । लोग उन्हें झूठा, ठग, निठल्ला आदि आदि भी कह रहे हैं। ये वही लोग हैं जो खुद के लिए कहते हैं “my life my choice ” लेकिन दूसरे को choice मिलने से इन्हें निठल्ला पन दिखता है।
असल में भारत के लोग आध्यात्म को सही से समझते ही नहीं हैं। इनके लिए आध्यात्मिक होना अर्थात चमत्कार दिखाना, भविष्यवाणियां सच होना। हाथ से भभूत निकालकर या पर्चा पढ़ कर समस्या ठीक करने वाला इनके लिए आध्यात्मिक और महान है जबकि एक स्वयं को ” मैं शून्य हूं” कहने वाले सामान्य व्यक्ति की साधारण सी बात स्वीकार नहीं होती।
हालांकि अभय सिंह मान अपमान से ऊपर उठ चुके हैं ढेर सारी ट्रोलिंग के बाद भी वे दूसरे दिन हंसते हुए अपने दर्शकों को पॉडकास्ट में अपने दर्शन को सिखाते हुए नजर आए। इसके अगले ही दिन वे कोयंबतूर में सद्गुरु आश्रम में एक सामान्य सेवक की भूमिका में सरल सहज दिखाई दिए।
धन्य हैं ऐसे संत जिन्होंने भागवत गीता के साधन सूत्र मान अपमान को सही तरीके से व्यवहार में लाना सीख लिया।
सम: शत्रौ च मित्रे च तथा मानापमानयो: |
शीतोष्णसुखदु:खेषु सम: सङ्गविवर्जित: || 18||
तुल्यनिन्दास्तुतिर्मौनि सन्तुष्टो येन केनचित् |
अनिकेत: स्थिरमतिर्भक्तिमन्मे प्रियो नर: ||19| अध्याय 12



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