
चाँद पर भारत
विक्रम ने विक्रम दिखलाया, नया इतिहास रचाया।
गोदी में लेकर प्रज्ञान, चाँद पर तिरंगा लहराया।
नये युग का हुआ सृजन, मातृभूमि का मान बढ़ाया।
जय-जयकार हुआ भारत का, विजय पताका फ़हराया।
एक अधूरा स्वप्न हुआ साकार, समूचे जन हरषे।
करतल ध्वनि के शोर से, आनंद अमृत बरषे।
आह्लादित भारत करे उद्घोष, जगत कल्याण का।
मिलकर आगे बढ़े सभी, यही पैगाम विश्वशांति का।
चंद्रयान के यश की गाथा आज धरा में गूँजी है।
भारतवासियों की मेधा की इसरो अनोखी पूँजी है।
चंद्रसतह के दक्षिण ध्रुव से शुरु की अपनी यारी है।
सोम , मंगल हुए हमारे , अब गुरु की तैयारी है!
मौलिक रचना: कवयित्री कुसुम लता जोशी



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