प्रसन्न रहने के सात सरल उपाय
आज की भागदौड़ की जिंदगी में हर कोई सुकून के कुछ पल ढूँढना चाहता है । हर कोई प्रसन्नता की तलाश में है। एक प्रसन्न मन वाले व्यक्ति का शरीर भी सदैव स्वस्थ और निरोगी रहता है ।प्रसन्न व्यक्ति की उपस्थिति से ही माहौल खुशनुमा हो उठता है । प्रश्न यह उठता है कि आज के तनाव भरे माहौल में किस तरह प्रसन्न रहा जाए ? तो आज यहाँ पर खुश रहने के सात सरल उपाय दिए गए हैं जिनको अपना कर कोई भी प्रसन्न रह सकता है ।
समय पर काम पूरा करें-
हर व्यक्ति कुछ न कुछ काम तो करता ही है। जैसे -विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं । कर्मचारी ऑफ़िस में काम करते हैं । इसी प्रकार अन्य व्यवसाय वाले व्यक्ति अपना -अपना काम करते हैं । लेकिन अगर अपने काम को नियमित रूप से समय पर पूरा किया जाए, तो व्यक्ति को तनाव नहीं होता । अगर आलस्य वश काम को कल पर टाला जाए तो धीरे-धीरे काम बढ़ता जाता है और मस्तिष्क अनेक प्रकार के तनाव से भर जाता है। तनाव होते ही आपकी प्रसन्नता दूर हो जाती है और व्यक्ति चिढ़चिढ़ा हो उठता है । इसलिए समय से काम पूरा करना प्रसन्न रहने का महत्त्वपूर्ण उपाय है ।
मित्रों के साथ समय बिताएँ-
मित्रता वह उपहार है जो जीवन भर काम आता है । मित्रों के साथ रहना हर किसी को अच्छा लगता है । मित्र हमारी समस्याओं को चुटकियों में हल कर देते हैं । मित्रों के साथ हँसी- मज़ाक करने से मन फूल सा हलका हो उठता है । इसलिए ज्यादा से ज्यादा अच्छे मित्र बनाएँ और उनके साथ समय बिताएँ । मित्रता निभाने में समय तो लगता है लेकिन अच्छे मित्र प्रसन्नता की कुँजी साबित होते हैं।
कर्तव्यों का निर्वाह –
आज के समय में हर व्यक्ति अधिकार की बात तो करता है , किंतु कर्तव्यों के निर्वाह की बात बहुत कम ही लोग सोचते हैं । जो व्यक्ति अपने कर्तव्य पालन करते हैं, उनका मन एक असीम शांति से भरा रहता है । हमें ध्यान रखना है कि हमारा कर्तव्य सिर्फ़ अपने परिवार तक ही सीमित न हो। हमारा कर्तव्य अपने परिवार , मित्र, हमारे कार्य, व्यवसाय और अपने देश के प्रति भी है। और इन सबके प्रति निष्ठापूर्वक कर्तव्य-पालन मन की प्रसन्नता और शांति दायक होता है ।

अपनी अभिरुचि के कार्य करना-
हर व्यक्ति का किसी न किसी कार्य के प्रति विशेष रुचि रहती है । लेकिन कई बार लोग धन कमाने के लिए वह कार्य कर रहे होते हैं जिनमे उनकी ज़रा भी रुचि नहीं होती । लोगों के मन में यह अज्ञात भय रहता है कि अगर मैं इस कार्य को न करुँ तो मेरा खर्च कैसे चलेगा । लेकिन बिना रुचि का कार्य कभी भी मन की संतुष्टि नहीं दे सकता । कुछ लोग यह ही निश्चित नहीं कर पाते कि उनकी वास्तविक रुचि किस विषय में है। ऐसे लोग सदैव बैल की तरह आनन्द रहित जीवन जीते हैं । अपनी सही रुचि पहचानने का सही तरीका यह है कि आप यह सोचें कि यदि आपको धन , व्यवसाय आदि की कोई चिंता न होती तो आप क्या कार्य करना पसंद करते? जरूरी नही कि आप इस प्रश्न का उत्तर इसी क्षण सोचें। आप आराम से इस बात पर विचार करें कि यदि आपको अन्य कोई चिंता न होती तो आप क्या करना पसंद करते ? इस प्रश्न का जो उत्तर निकल कर आपके सामने आए , वही आपकी सच्ची रुचि या शौक है। इसके लिए आपको ज्यादा दिन रुकने की आवश्यकता नहीं है । जैसे ही आपको अपने सच्चे शौक का पता चल जाए, उसी दिन से उस अभिरुचि के लिए कुछ समय निकालना शुरू कर दें । समय के साथ यही कार्य आपकी जीविका और आनंद बढ़ाने वाला साबित होगा ।
नए काम सीखना–
हर मनुष्य को अपनी योग्यता बढ़ानी चाहिए । हम आज जिस स्तर पर हों, चाहें वह आर्थिक स्तर हो, चाहें बौद्धिक स्तर हो अपनी योग्यताएँ निरंतर बढ़ाते रहनी चाहिए । नए -नए कार्य सीखते रहना चाहिए । इससे न केवल हमारा मस्तिष्क युवा रहता है अपितु जीवन में जोश और उत्साह बढ़ता रहता है। हमारी क्षमता बढ़ने से आत्मविश्वास भी बढ़ता है और हमारी सफलता की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं । नए कार्य सीखने से मन भी स्वाभाविक रूप से प्रसन्न रहता है ।
ईश्वर पर विश्वास-
आप कुछ भी कार्य़ करें , ईश्वर पर भरोसा रख कर करें । मन में यह विश्वास रखें कि ईश्वर आपके सहायक हैं और आप के कार्य जरूर सफ़ल होंगे।ईश्वर पर विश्वास मन का अनावश्यक तनाव दूर कर देता है । जीवन में प्रार्थना के महत्त्व को समझें और प्रतिदिन नियमित रूप से प्रार्थना करें ।भगवान के पवित्र नामों के प्रभाव से मन के कलुष धुल जाते हैं और जीवन प्रसन्नता से भर उठता है ।
नकारात्मकता से दूरी –
खुश रहने के लिए यह भी जरूरी है कि आप अपने जीवन से नकारात्मकता को दूर करें । “मैं यह करने में अक्षम हूँ “, “यह कार्य असंभव है”, “यह कार्य कठिन है” आदि नकारात्मक विचारों को अपने जीवन में स्थान न दें । पुराने बुरे अनुभवों को भूल जाएँ । बार- बार याद कर उन्हें दोहराएं नहीं । जितना नकारात्मक विचारों से दूर रहना ज़रूरी है , उतना ही नकारात्मक लोगों से दूर रहना भी आवश्यक है। जो लोग आपको नीचा दिखाने की प्रवृत्ति रखते हों , आपके अच्छे कार्यों को महत्त्व न देकर सदा आपकी बुराई करने में भरोसा रखते हों । आपको अपमानित करने की कोशिश करते हों , उनसे दूर रहने में ही भलाई है । किसी के प्रति बुरी भावनाएँ रखना उचित नहीं है, किंतु आप अपने जीवन में दूसरों को नकारात्मकता फ़ैलाने का अधिकार नहीं दे सकते । स्वस्थ हृदय से सुधार के लिए की गई आलोचना चाहें कटु स्वर में ही क्यों न की गई हो और अपमानित करने के लिए कहे गए वाक्य भले ही शहद मे लिपटे हुए क्यों न हों, उनका अंतर हर व्यक्ति आसानी से समझता है । इसलिए अगर आप सदैव प्रसन्न रहना चाहते हैं, तो नकारात्मकता से दूरी जरूरी है ।
निष्कर्ष-
प्रसन्न रहने के लिए बहुत सारे धन और सुख-सुविधाओं की आवश्यकता नहीं है। जो सबसे आवश्यक है, वह है सकारात्मक सोच और संतुष्टि का अहसास। यह सकारात्मकता ही हमें जीवन की हर परिस्थिति में संतुष्ट और खुशहाल बनाती है। सकारात्मक सोच और संतुष्टि का भाव धारण करने से हम अपने आसपास के लोगों के साथ भले संबंध बना सकते हैं, जो हमारे जीवन को और भी खुशहाल बनाता है।
सकारात्मकता की भावना हमें मानवीय संबंधों में मदद करती है और हमें अपने विचारों को सुधारकर संतुष्टि प्राप्त करने में सक्षम बनाती है। इसके फलस्वरूप, हमारा जीवन और भी संतुलित और सफल बनता है। इसीलिए अपने मन को स्थिर रख हर परिस्थिति में प्रसन्न रहने की आदत का विकास करना चाहिए।



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