इस दुनिया में सभी लोग धन -संपन्न होना चाहते हैं। धन से व्यक्ति समृद्धि की दिशा में अग्रसर होता है और उसके लिए विभिन्न उद्यमों में निवेश करता है। बहुत से लोग सोचते हैं कि धन केवल सुख-शांति और आराम का साधन है, लेकिन इसके अलावा धन से समाज में आपकी मान्यता भी बढ़ती है और आपको सामाजिक दरबार में एक विशेष स्थान प्राप्त होता है।
धन कमाने के लिए जो भी कठिनाइयाँ आती हैं, व्यक्ति उन्हें पार करने के लिए तैयार होता है और संघर्ष करता है। ऐसा होने से उसकी मेहनत और लगन भी बढ़ती है और वह अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए प्रतिबद्ध रहता है। लेकिन सभी लोग इतने भाग्यशाली नहीं होते कि वे चाँदी के चम्मच मुँह में लेकर जन्म लें। जब तक भाग्य साथ न दे और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त न हो , संपन्न होना और धन -ऐश्वर्य युक्त होना संभव नहीं।

तो आइए , आज आपको उस व्रत का खुलासा करें , जो माता लक्ष्मी को तुरंत प्रसन्न कर देगा और आपके भाग्य की कुँजी खोल देगा।

मालामाल कर देगा यह एक व्रत

वरमहालक्ष्मी व्रत एक पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है ।यह त्यौहार कर्नाटक, आंध्र प्रदेश,तेलंगाना और तमिलनाडु राज्यों में लोकप्रिय रूप से मनाया जाता है। इसकी विशेष महिमा है।

वरलक्ष्मी व्रत देवी लक्ष्मी को समर्पित एक वार्षिक व्रत है। "वर" का अर्थ है वरदान और लक्ष्मी धन-संपदा-ऐश्वर्य प्रदान करने वाली देवी हैं। वरमहालक्ष्मी का अर्थ है -वरदान देने वाली महालक्ष्मी।
इस व्रत का एक संदर्भ स्कंद पुराण में मिलता है, जहां शिव पार्वती को व्रत की महिमा बताते हैं। यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाएं करती हैं जिन्हें "सुंबंगलियारु"(सौभग्यवती)के नाम से जाना जाता है। महिलाएँ देवी की दिव्य कृपा और पारिवारिक संपन्नता और सुख की प्रार्थना करते हुए देवी की आराधना करती हैं। 

ऐसा माना जाता है कि देवी प्रसन्न होने पर भक्तों पर असीम कृपा करती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। ऐसा माना जाता है कि वरलक्ष्मी व्रत का पालन करने से अष्ट सिद्धियाँ प्राप्त होती है और धन,बुद्धि,भूमि, प्रेम, प्रसिद्धि, सुख-शांति शक्ति और संतोष का आशीर्वाद मिलता है।

यह व्रत सावन माह के आखिरी शुक्रवार को रखा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है।यह व्रत सुख-शांति की प्राप्ति के लिए भी रखा जाता है। अगर आप जीवन में आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं तो वरलक्ष्मी व्रत के दिन पूजा के दौरान माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करें। इससे शीघ्र धन लाभ के योग बनेंगे।।

वरलक्ष्मी व्रत स्त्री और पुरुष दोनों ही रखते हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में विवाहित महिलाएं मुख्य रूप से इस व्रत को बड़े श्रद्धा और विश्वास से मनाते हैं । सौभाग्यवती महिलाएँ अपने पतियों और परिवार के सदस्यों की भलाई के लिए आशीर्वाद मांगने के साथ-साथ विभिन्न सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति के लिये भी व्रत करती हैं।

वरलक्ष्मी की पूजा के दिन महिलाएँ सुबह जल्दी उठ कर घर की सफ़ाई करती हैं। घर की सजावट के साथ ही विभिन्न प्रकार की सुंदर मनोरम रंगोलियों से घर के द्वार और आँगन को सजाते हैं। नारियल, गन्ने, मटके , साड़ी और चाँदी के सुंदर देवी के मुखौटे से देवी बनाई जाती हैं और उन्हें सुंदर रेशमी साड़ी और आभूषणों से सजाया जाता है। साथ ही अधिकाँश महिलाएँ हरी रेशमी साड़ियाँ और हरी चूड़ियाँ पहनने को प्रार्थमिकता देती हैं क्योंकि हरा रंग विशेषकर संपन्नता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

घरों में विभिन्न पकवानों के साथ ही ओबट्टू (पूरनपोली) और करंजी(नारियल की गुझिया) विशेष रूप से बनाई जाती हैं। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की विशेष स्तुति की जाती है |देवीलक्ष्मी प्रसन्न करने वाले मंगल श्लोक और देवी भजनों का गायन किया जाता है।रिश्तेदारों, मित्रों और आस-पास की सुहागन महिलाओं को हल्दी कुम-कुम के लिये आमंत्रित किया जाता है। साथ ही उन्हें यथा-योग्य मल्लिगे हू( चमेली के फूलों के गज़रे), फल, नारियल, मिष्टान्न , ब्लाउज पीस आदि देकर संतुष्ट कर भेजा जाता है। इसके बाद अपने निकट संबंधियों और मित्रों के साथ आनंद पूर्वक पूजन, जप किया जाता है और स्वादिष्ट पकवानों का आनंद लेते हुए उत्सव का आनंद लिया जाता है।

वरलक्ष्मी व्रत के लिए आवश्यक सामग्री हैं कुमकुम, हरिद्रा, चंदन, डोरा ग्रंथी, अक्षत, श्री वरमहालक्ष्मी की मूर्ति, वस्त्र, ताजे फल और फूल, मिठाई, सिन्दूर की माला, पान के पत्ते, पीठा, कलश, उधरना, अगरबत्ती और कपूर। इसके अतिरिक्त आगंतुकों विशेषकर महिलाओं के लिये यथा-योग्य उपहार आदि।

स्कंदपुराण में इस व्रत का विशेष महत्त्व बताया गया है। इस व्रत को करने से गृहस्थ को संकटों से मुक्ति, आर्थिक कष्टों का निवारण और पारिवारिक शांति का फल मिलता है।

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