लगभग 500 वर्षों के लगातार संघर्ष के लगातार संघर्ष के यह शुभ घड़ी आई है जब राम मंदिर में फिर से प्रतिष्ठापित हो रहे हैं । यह बड़े आनंद का समय है। यह एक लंबे समय तक सनातन धर्म के संघर्ष को तो बताता ही है साथ ही हिंदुत्व के गौरव को बढ़ाने वाला क्षण है। यह बड़ी बात है कि इसके लिए न तो किसी को दबाया गया , न कुचला गया और न ही किसी प्रकार के छल-बल या युद्ध का प्रयोग किया गया। यही सनातन धर्म का गौरव है। कहा जाता है कि सनातन धर्म कभी नष्ट नहीं होता। यह बार-बार अपनी सत्य की बुनियाद पर उठ खड़ा होता है। यह कविता उसी संघर्ष को दोहराती है। आनन्द लीजिए-

हम काटे गए,

कुचले गए,

मारे गए ।

फिर-फिर शौर्य पताका उठा,

खडे हुए हम ।

गर्व से कहो, हिंदू हैं हम।

हमने लुटा दिए सर,

अपनी आन में,

दे दिया बलिदान,

धर्म के नाम पर,

हम तोडे गए, फोडे गए

पर झुके नहीं हम।

गर्व से कहो, हिंदू हैं हम।

हमने हर बार,

मारी है बाज़ी,

थोडा पीछे हुए, थोडा आगे बढ़े

पर कभी रुके नहीं हम ,

गर्व से कहो हिंदू हैं हम।

बलिदानों और जौहरों से

डरे नहीं हम।

बार-बार दी हमने

वक्त की अग्नि-परीक्षा

राम -कृष्ण के वंशज हम

गर्व से कहो, हिंदू हैं हम।

मिटाने के प्रयत्न होते रहे लाख,

तोड़ा गया बार-बार,

हमारे आस्था स्तंभों को,

हर शिला को हमने,

हिंदू हैं हम

स्वर्ण से मढ कर,

बार-बार उतुंग शिखर किया खड़ा,

हारे नहीं हम,

गर्व से कहो हिंदू हैं हम ।

अमरबेल हम धर्म की

शाश्वत सदा,  

सत्य के प्रतीक,

हम ही सत्य सनातन,

गर्व से कहो हिंदू हैं हम ।

कवयित्री: कुसुम लता जोशी

कवयित्री कुसुम लता जोशी हिंदी अध्ययन -अध्यापन से जुड़ी हैं । साहित्य और आध्यात्म में गहरी रुचि है । लंबे समय से कविताएं लिखती रही हैं । सीमंतिनि, बच्चा, चक्रव्यूह के पार गपोड़-1, इनकी रचनाएं हैं जो अमेजन और फ़्लिपकार्ट में उपलब्ध हैं।

One response to “हिंदू हैं हम //Hindu hai Ham”

  1. बहुत सुन्दर रचना है।
    यदि आपको उचित लगे तो मेरा ब्लॉग प्रमोट कर सकते हैं –
    https://vichaarsaar.wordpress.com

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