टंग ट्विस्टर का मजा कौन नहीं लेना चाहता ! बच्चे हों या बड़े ,टंग ट्विस्टर सबको चुनौती देने के लिए तैयार हैं । ये मज़ेदार टंग ट्विस्टर बार- बार बोले दोहराए जाते हैं । इनके समान अक्षर दोहराने पर जीभ को इस तरह मरोड़ते हैं कि बोलने वाले की आवाज गड़बड़ा जाती है और साथ ही निकलते है सुनने वालों के हँसी के फ़व्वारे। आपके लिए पेश हैं ऐसा ही टंग ट्विस्टर का खजाना । बच्चे हों या बड़े , सभी को चुनौती दीजिए और आनंद उठाइए ।
अक्कड़ बक्कड़ बोंबे ब। अस्सी नब्बे पूरे सौ । सौ में लागा धागा चोर निकल कर भागा ।
अचार का कचरा , कचरे के डिब्बे में, कचरे के डिब्बे में अचार का डिब्बा ।
अब कूद रस्सी रस्सी रस्सी कूद कूद मत
अमर ज्योति पर ज्योति जलाने जवान जंग जीत कर जाएंगे।
ऊँट ऊँचा, ऊँट की पीठ ऊँची , ऊँची पूछ ऊँट की ।
ऊँठ बाँधकर सूँठ खाऊँ, सूँठ खाकर ऊँट बाँधू
एक चीनी औरत चीनी के प्याले में चीनी लाई।
कच्चा पापड़ , पक्का पापड़
कच्चा कद्दू, पक्का कद्दू
कच्चा कचरा, पक्का कचरा
कच्ची रोटी खा के रोती , रोटी खा के कच्ची रोती
काला कबूतर सफ़ेद तरबूज , काला तरबूज सफ़ेद कबूतर
काला काला मकड़ा पेड़ पर चढ गया , काली चिड़िया को देखकर मकड़ा हड़बड़ा कर गिर गया
खड़गसिंह के खड़कने से खड़कती हैं खिड़कियाँ , खिड़कियों के खड़कने से खड़कता है खड़गसिंह ।
चंदू के चाचा ने चंदू की चाची को चाँदनी चौक में चाँदनी रात में चाँदी की चम्मच से चटनी चटाई ।
चंदा चमके चम-चम , चीखे चौकन्ना चोर। चीटी चाटे चीनी , चटोरी चीनी खोर ।
चाचा के चौड़े चबूतरे पर चील ने चूहे को चोंच से चबा डाला ।
चार कचरी कच्चे चाचा , चार कचरी पक्के , पक्की कचरी पक्के चाचा , कच्ची कचरी पक्के।
चार चोर चार छाते में चार अचार चाटें चाट-चाट कर चा छाता चोर चुरा कर भागे।
चाँदनी रात में चार चुड़ैल चुर्की पकड़कर चुटुर -चुटुर चाटें ।
छठे बीमार शेख का छठा भेड़ बीमार है।
जंग बहादुर जंग लड़कर जंग जीतकर आया। जंग जीतकर जंग बहादुर जग जीता कहलाया ।
जो हँसेगा वो फ़ँसेगा ।
जो जो को खोजो , खोजो जो जो को , जो जो जो को ना खोजो तो खो जाए जो जो ।
टूट टूट कर कूट कूट कर ।
डबल बबल गम बबल डबल ।
डाली- डाली पर नज़र डाली , किसी ने अच्छी डाली , किसी ने बुरी डाली । जिस डाली पे मैंने नज़र डाली , वही डाली किसी ने तोड़ डाली ।
तोला राम तोला तोल के तेल में तल गए। तुला हुआ तोला ताले के तले हुए तेल में तला गया॥
नदी किनारे किराने की दुकान ।
नज़र ने नज़र को नज़र भर के देखा । नज़र की नज़र को नज़र लग गई है।
नज़र नज़र में, हर एक नज़र में , हमें उस नज़र की तलाश थी । वो नज़र मिली तो सही पर, उस नज़र में वो नज़र कहाँ थी ।
पके पेड़ पर पका पपीता , पका पेड़ या पका पपीता ।
पाँच पापड़ कच्चे पापा , पाँच पापड़ पक्के ।पक्के पापड़ सेको पापा , कच्चे रखो पीछे ।
पीतल के पतीले में पपीता पीला पीला।
पीली रेल , काली रेल ।काली काली पीली पीली रेल ।
फ़ालसे का फ़ासला ।
बब्बू के बाबा ने ,बब्बू को बड़ी सी किताब से , बड़ी -बड़ी बातें बताईं।
बड़-बड़ मत कर लड़कर मत मर । मत मर लड़कर बड़-बड़ कर कर।
बड़े पेड़ पर बड़ा घड़ा, बड़े से घड़े में बूरा भरा।
भगवान ने भेजे को भेजा, पर ऐसे भेजे को क्यों भेजा? जिसमें भेजा ही नहीं भेजा !
मत हँस हँस मत, मत फँस फँस मत ।
मरहम भी गए, मरहम के लिए , मरहम न मिला । हम दम से गए , हमदम के लिए ,हमदम न मिला ।
मेरा नाम तेरा नाम , तेरा नाम मेरा नाम।
राम का राज , राज ने राज़ की बात राज को बताई ।
राम के राज का राज़ राज ने राजा को बताया ।
राजा गोप गोपाल गोपग्गम दास ।
राधा की बूनी में नींबू की धारा।
लपक बबूलिया लपक , अब ना लपकबे तो लपकबे कब?
लड़की ने मकड़ी को लकड़ी से मारा ।
लाल रेल नीली रेल , नीली रेल लाल रेल ।
लाली बोली लालू से ,”लल्लन लाया था, लालू की शादी पे ,लाल लाल लिफ़ाफे में ,लाल लाल लड्डू ।”
ले नियम , दे नियम । दे नियम , ले नियम ।
समझ समझ कर समझ को समझो , समझ समझना भी एक समझ है । समझ समझ के जो ना समझे , मेरी समझ में वो नासमझ है ।
सरद सरदी, गरम गरमी
साड़ी को साड़ी से लपेटा बेटा ।
सूखा कचरा , गीला कचरा ।
सूखा कूड़ा , गीला कूड़ा ।
शनिवार को सही समय पर शहद सही पहुँचाना । शाम समय पर शहद न पहुँचा, साल भर शरमाना ।
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