Tum Kab Jaoge Atithi NCERT Class 9 Hindi B Sparsh Chapter 3 Solutions, पाठ 3 तुम कब जाओगे अतिथि

लेखक परिचय-
नाम – शरद जोशी

जन्म =21 मई 1931 उज्जैन, मध्य प्रदेश;
भाषा: व्यंग्य लेखन, सरल सहज, मुहावरे और हास-परिहार युक्त भाषा
मुख्य रचनाएं –
कहानियाँ- परिक्रमा, किसी बहाने, जीप पर सवार इल्लियाँ, तिलस्म रहा किनारे बैठ, दूसरी प्रतिदिन ।
व्यंग्य नाटक: सतह, अंधोका हाथी, एक था गधा
उपन्यास :मैं, मैं केवल मैं उर्फ कमलमुख बी. ए|
मृत्यु :1991
प्रश्न -उत्तर
मौखिक प्रश्न:
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
प्रश्न 1. अतिथि कितने दिनों से लेखक के घर पर रह रहा है?
उत्तर- अतिथि चार दिनों से लेखक के घर पर रह रहा है।
लिखित:
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-
प्र 1. लेखक अतिथि को कैसी विदाई देना चाहता था?
उत्तर: लेखक अतिथि को एक भावभीनी विदाई देना चाहता था ताकि वह एक शानदार मेहमान नवाजी की छाप अपने हृदय में ले कर वापस जाए।
प्रश्न 2. कैलेंडर की तारीखें किस तरह फड़फड़ा रही हैं?
उत्तर- कैलेंडर की तारीखें अपनी सीमा में नम्रता से फड़फड़ा रही हैं। मानों वे भी अतिथि को बता रही हों कि तुम्हें यहाँ आए। दो-तीन दिन बीत चुके हैं।
प्रश्न 3.पति-पत्नी ने मेहमान का स्वागत कैसे किया?
उत्तर- पति-पत्नी ने मेहमान का स्वागत प्रसन्नतापूर्वक किया। पति ने स्नेह से भीगी मुसकान से उसे गले लगाया तथा पत्नी ने सादर नमस्ते की।
प्रश्न 4. दोपहर के भोजन को कौन-सी गरिमा प्रदान की गई?
उत्तर- दोपहर के भोजन को लंच की गरिमा प्रदान की गई।
प्रश्न 5. तीसरे दिन सुबह अतिथि ने क्या कहा?
उत्तर- अतिथि ने तीसरे दिन कहा कि वह अपने कपड़े धोबी को देना चाहता है।
प्रश्न 6. सत्कार की ऊष्मा समाप्त होने पर क्या हुआ?
उत्तर- सत्कार की ऊष्मा समाप्त होने पर लेखक उच्च मध्यमवर्गीय डिनर से खिचड़ी पर आ गया। यदि इसके बाद भी अतिथि नहीं गया तो उसे उपवास तक जाना पड़ सकता है।
प्र 2. पाठ में आए निम्नलिखित कथनों की व्याख्या कीजिए-
(क) अंदर ही अंदर कहीं मेरा इस कथन का बहुआ काँप गया ।
व्याख्या: मेहमान के आने पर होने वाले संभावित खर्चे से है। जब एक मेहमान बिना पूर्व सूचना के लेखक के घर आया तो उस पर होने वाले खर्च के डर से लेखक को बटुआ काँपता हुआ महसूस हुआ।
(ख) अतिथि सदैव देवता नहीं होता, वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है।
व्याख्या: भारतीय परंपरा में अतिथि को देवता माना जाता है। हम अपनी सबसे बेहतर सुविधाएँ उसे 4. देकर उसके प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। किंतु यदि इन सुख-सुविधाओं का आनंद लेते हुए अतिथि लंबे समय तक मेजबान के घर रहता है तो रहा होता है रुके वह उसकी सुविधाओं को छीन । इसी कारण लेखक ने कहा कि ‘अतिथि सदैव देवता नहीं होता, वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है।
(ग) लोग दूसरे के होम की स्वीटनेस को काटने “ने दौड़े।
व्याख्या: कोई भी व्यक्ति अपने घर में ही सबसे अधिक आराम पाता है। परिवार के साथ हम सबसे मीठे क्षण बिताते हैं । इसीलिए घर को स्वीट होम कहते हैं, किंतु जब कोई अनच व्यक्ति कई दिनों तक हमार घर में रहने लगता है तो उसके हस्तक्षेप से घर की मीठा कम होने लगती है। इसीलिए लेखक कहता है लोग दूसरे के घर की स्वीटनेस को काटने दौडें ।
(घ) मेरी सहनशीलता की वह अंतिम सुबह होगी।
व्याख्या: लेखक के घर पिछले चार दिनों से रह रहा था। अगली सुबह पाँचवाँ हिन हो जाने वाला था। मित्रता के नाते लेखक किसी तरह आताभ के इस अनचाहे आगमन का बोझ उठा रहा था । अगर अगले दिन भी यदि अतिथि सम्मानपूर्वक विद्राह नही लेगा तो लेखक की सहनशीलता समाप्त हो जाएगी।
(ङ) एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर साथ नहीं रहते।
व्याख्या: अतिथि को देवता समान माना जाता है लेकिन देवता ज्यादा देर तक मनुष्य के साथ नही रहते। वे थोड़ी देर दर्शन देकर वापस चले जाते हैं। इस वाक्य के द्वारा लेखक अतिथि को वापस लौट जाने का संकेत देना चाहता है।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर 150-60 शब्दों में) लिखिए:-
प्र 1. कौन-सा आधात अप्रत्याशित था और उसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर : लेखक अतिथि के सम्मानजनक विदा होने की अपेक्षा कर रहा था, किंतु तीसरे दिन अतिथि ने धोबी से कपड़े धुलवाने की इच्छा जाहिर की । लेखक के लिए यह अप्रत्यभित आघात था। कपड़े धुलवाने देने का स्पष्ट अर्थ यह था कि अतिथि अभी वापस नहीं जाना चाहता। इसका प्रभाव यह हुआ कि अचानक लेखक को अतिथि के सामीप्य की बेला रबड़ की तरह खीचती महसूस हुई और उन्हें लगा कि अतिथि “हमेशा देवता नहीं होता। वह मानव और थोडे अर्थों में राक्षस भी हो सकता है।
प्र 2. ‘संबंधों का संक्रमण के दौर से गुजरना” – इस पंक्ति से आप क्या समझते हैं ? विस्तार से लिखिए।
उत्तर: संबंधो संक्रमण का अर्थ हैं किसी प्रकार का परिवर्तन । लेखक के घर अतिथि के आने पर लेखक ने खुशी-खुशी उसका स्वागत किया। उसे अपने स्तर उसे ऊपर उठ कर ‘डिनर’ व लंच’ कराया साथ ही सिनेमा भी दिखाया। इस प्रकार गर्मजोशी के स्वागत से पता चलता है कि अतिथि और लेखक के मध्य मधुर संबंध थे। लेकिन जब अतिथि चार दिनों तक लेखक के घर पर ही रुका रहा तो उनके संबंधों में परिवर्तन आने लगे। वे डिनर से चल कर खिचड़ी में आ गए । उनके बीच की हँसी-मजाक बंद हो गई। अंत में लेखक अतिथि को ‘गेट आउट’ कहने की सोचने लगा। इसी समय को लेखक ने ‘संबंधों का संक्रमण के दौर से गुजरना’ कह कर अपनी भावना व्यक्त की है।
प्र 2. जब अतिथि चार दिन तक नहीं गया तो लेखक के व्यवहार में क्या-क्या परिवर्तन आए ?
उत्तर: जब अतिथि चार दिन तक नहीं गया तो लेखक के मन मे सत्कार की उष्मा समाप्त होने लगी। उनके बीच की मुसकुराहटें और हँसी मजाक खत्म हो गए। आपसी बातचीत लगभग समाप्त हो गई । आपस की इस संवादहीनता को मिटाने के लिए लेखक उपन्यास पढने लगा और अतिथि फिल्मी पत्रिका पलटने लगा। आपसी सौहार्द समाप्त हो गया। भावनाएँ गालियों का रूप लेने लगी । लेखक सोचने लगा कि आखिर किस अदृश्य गोंद से अतिथि का व्यक्तित्व यहाँ चिपक गया है। लेखक की सहनशीलता समाप्त होने लगी।



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