हम आजाद परिंदे हैं- कविता (रचयिता – कुसुम लता जोशी)
प्रिय मित्रो, आज मैं यह स्वरचित कविता लिख रही हूं , इसका उद्देश्य अपने स्व निर्णय और स्वतंत्र सोच को आगे बढ़ाना है। आज युवाओं के मानसिक तनाव और निराशा भरे वातावरण से हटकर स्वतंत्रता, आत्मविश्वास जगाना है
यह कविता स्वतंत्रता, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की भावना को व्यक्त करती है। इसमें उन लोगों की सोच को दर्शाया गया है जो दूसरों की सुनते तो हैं, लेकिन अपने दिल की राह पर चलना पसंद करते हैं। “आजाद परिंदे” जीवन की उस उड़ान का प्रतीक हैं, जो डर और बंधनों से मुक्त होकर अपने सपनों को छूना चाहती है। कविता हमें सिखाती है कि कठिनाइयों के बावजूद हिम्मत और विश्वास बनाए रखना ही सफलता का मार्ग है। इसके शब्द युवाओं में उत्साह, साहस और सकारात्मक सोच जगाने की प्रेरणा देते हैं।
हम आजाद परिंदे हैं,
सुनते सबकी, करते मन की हैं।
नीले अम्बर में उड़ते जाएँ,
सपनों से अपनी राह सजाएँ,
बंधन हमको रोक न पाएँ,
हँसकर हर मुश्किल सह जाएँ।
हम आजाद परिंदे हैं,
सुनते सबकी, करते मन की हैं।1।
कभी धूप में, कभी घटाओं में,
जीते हैं हम खुली हवाओं में,
डर को पीछे छोड़ चुके हैं,
चलते अपने ही इशारों में।
हम आजाद परिंदे हैं,
सुनते सबकी, करते मन की हैं।2।
दुनिया चाहे कुछ भी बोले,
अपने दिल के दीपक खोले,
सच्चाई की राह पकड़कर,
अपने सपनों के पंख टटोले।
हम आजाद परिंदे हैं,
सुनते सबकी, करते मन की हैं।3।
ठान लिया तो रुक न पाएँ,
आँधी में भी दीप जला दें ,
गिरकर हर बार उठेंगे,
मंज़िल को पा कर रहेंगे।
हम आजाद परिंदे हैं,
सुनते सबकी, करते मन की हैं।4।
रचयिता – कुसुम लता जोशी



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