अ से अं तक मुहावरों की कविता

मुहावरे रोचक तो लगते ही हैं साथ ही इनसे भाषा में नयापन भी आता हौ। कई बार हिंदी मुहावरों को याद रखना आसान नहीं होता। ऐसे में इन मुहावरों को याद करने का आसान तरीका है इन्हें कविता बना कर याद करना। ऐसा ही एक प्रयास है जिसमें अ से अं तक से शुरु होने वाले मुहावरे कविता में गूँ थ लिये गए हैं । आशा है विद्यार्थियों को यह तरीका रोचक लगेगा।

मन्नू भाई गरमाया

देख के गड़बड़ घौटाला

जोर से ऐसे चिल्लाया

आ गया एक पुलिस वाला

बोला- अ से अगर मगर ना करना

आ से आम आदमी हो तुम

इ से इधर कुआँ उधर खाई है।

मन्नू भाई गुस्साया-

ई से ईंट से ईंट बजा दूंगा

उ से उल्टी गंगा बहा दूंगा

ऊ से ऊँच नीच समझाओ मत

ऋ से देश का ऋण उतारूँगा।

सुनकर चौंका पुलिस वाला

कहने लगा बात घुमा

ए से एक पंथ दो काम करो

ऐ से ऐरा गैरा नत्थू खैरा बन कर

ओ से ओखली में न तुम शीश धरो

औ से औंधे मुँह गिर जाओगे।

मन्नू भाई मुस्काया

अब ऊँट नीचे पहाड़ के आया

अं से अंग अंग कर दूँगा ढीला

अगर दिखेगा दाल में काला

मैं भी फ़र्ज़  निभाऊँगा

दूर करूँगा हर घौटाला। 

देश का नाम रोशन करके

लाइफ बना दूंगा झिंगालाला। 

आशा है कि यह कविता आपको न केवल पसंद आई होगी, बल्कि इससे आपको अनेक मुहावरों और कहावतों का भी ज्ञान होगा जिन्हें आप अब और भी रोचक तरीके से समझेंगे। मुहावरों से युक्त संवाद वार्ता को रोचक बनाते हैं और और आपकी भाषा कौशल क्षमता को मज़बूत करते हैं। अपनी प्रतिक्रिया देकर कृतार्थ करें ।

मौलिक रचना; कुसुम लता जोशी

2 responses to “अ से अं तक मुहावरों की कविता”

  1. वाह , सुन्दर सृजन | अब हिंदी दिवस आ रहा है , कुछ विशेष पोस्ट करें |

  2. […] अ से अ: तक मुहावरों की कविता RANG BIRANGE PHOOL// रंग-बिरंगे फूलबाल गीत:हाथी के बच्चे […]

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