| मानवता ही विश्व सत्य MCQ |
1.निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कर उत्तर दीजिए।
चंद्रलोक और अंतरिक्ष में
मानव ने किया पदार्पण
छिन्न हुए लो, देश-काल के
दुर्जय बाधा-बंधन।
दिग्विजयी मनु-सुत निश्चय
कितना महत्त्वपूर्ण यह क्षण,
भेद-भाव विरोध शांत कर
निकट आएँ सब देशों के जन ।
(क)इस कविता के कवि हैं ?
(i) द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (ii) सुमित्रानंदन पंत
(iii)सुभद्रा कुमारी चौहान (iv) इनमें से कोई नहीं
(ख) “चंद्रलोक और अंतरिक्ष में, मानव ने किया पदार्पण” इस पंक्ति में किस घटना का उल्लेख किया गया है ?
(i)मनुष्य के चंद्रलोक और अंतरिक्ष पहुँचने का (ii) मंगल ग्रह की यात्रा का
(iii) आकाश में उड़ने वाले विमान का (iv) उपरोक्त सभी
(ग) “दिग्विजयी’ का अर्थ है –
(i) दिशाएँ (ii) सभी के लिए समानता का भाव रखना
(iii)सभी दिशाओं को जीतने वाला (iv)उपरोक्त सभी
(घ)कवि चंद्रमा पर मनुष्य के कदम रखने के अवसर पर सभी देशों से क्या उम्मीद कर रहे हैं?
(i)सभी देश चंद्रमा पर जाएं ।
(ii) सभी देश चंद्रयान बनाएँ।
(iii)सभी देश एक दूसरे के विरोधी हो जाएँ।
(iv) सभी देशों के लोग भेदभाव भूलकर एक दूसरे के निकट आएँ।
2.निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कर उत्तर दीजिए।
दिग्विजयी मनु-सुत निश्चय
कितना महत्त्वपूर्ण यह क्षण,
भेद-भाव विरोध शांत कर
निकट आएँ सब देशों के जन ।
युग-युग का पौराणिक स्वप्न
हुआ मानव का समारंभ
शुभ समारंभ नए चंद्र-युग का
भू को दे गौरव ।
(क) इस कविता के कवि हैं ?
(i) द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी (ii) सुमित्रानंदन पंत
(iii)सुभद्रा कुमारी चौहान (iv) इनमें से कोई नहीं
(ख) इस में कविता में किस घटना को महत्त्वपूर्ण कहा गया है ?
(i)मनुष्य के चंद्रलोक और अंतरिक्ष पहुँचने को (ii) मंगल ग्रह की यात्रा को
(iii) आकाश में उड़ने वाले विमान को (iv) उपरोक्त सभी को
(ग) “दिग्विजयी’ का अर्थ है –
(i) दिशाएँ (ii) सभी के लिए समानता का भाव रखना
(iii)सभी दिशाओं को जीतने वाला (iv)उपरोक्त सभी
(घ) इस महत्त्वपूर्ण क्षण में कवि क्या कामना करता है?
(i)मनुष्य की श्रेष्ठता स्थापित करने की (ii) भेद-भाव मिटा कर सब देशों को निकट लाने की
(iii)सभी दिशाओं को जीतने की (iv) मनुष्यों को आपस में विरोध और और भेद-भाव करने की
(ङ)मनुष्य का पौराणिक स्वप्न क्या है?
(i)चाँद पर पहुँचना (ii) हवा में उड़ना
(iii)सभी ग्रहों पर कब्ज़ा करना (iv) इनमें से कोई नहीं


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