सामासिक पद (Compound word) की पहचान करने के लिए हमें देखना होता है कि — क्या वह शब्द वास्तव में दो या अधिक शब्दों से मिलकर एक बना है, और क्या उनमें छिपा हुआ विभक्ति-चिह्न (जैसे – का, की, के, से, में, पर आदि) हट चुका है।

जब कोई शब्द दो या अधिक शब्दों से मिलकर, बिना विभक्ति-चिह्नों के, संक्षिप्त रूप में एक अर्थ देता है, तो वह सामासिक पद कहलाता है।

सामासिक पद की पहचान करने के मुख्य तरीके:

  1. दो या अधिक शब्दों का मेल
    सामासिक पद में कम से कम दो स्वतंत्र शब्द छिपे रहते हैं।
    जैसे – राजपुत्र = राज का पुत्र।
  2. विभक्ति-चिह्नों का लोप (हट जाना)
    सामान्य पदबंध में “का/की/के/में /पर/से/ के लिए” जैसे चिह्न रहते हैं, पर समास में ये हट जाते हैं।
    जैसे – पुस्तक के लिए आलयपुस्तकालय
  3. अर्थ की संक्षिप्तता
    लंबे वाक्यांश को छोटा करके एक शब्द में बाँध देता है।
    जैसे – सूर्य की किरणसूर्यकिरण
  4. सामासिक पद को अलग करने पर मूल पदबंध मिलता है
    जैसे – देवालय को अलग करेंगे तो मिलेगा देव के लिए आलय (देवताओं का घर/मंदिर)।
  5. समासविग्रह से पुष्टि
    सामासिक पद को विग्रह करके उसके असली पद दिखाए जाते हैं।
    उदाहरण –
    • गंगाजल → गंगा का जल
    • रथयात्रा → रथ की यात्रा
    • विद्यालय → विद्या का आलय (घर)
    • विद्याधन → विद्या रूपी धन
    • सुलोचना→ सुंदर लोचन वाली

अर्थात सामासिक पद की पहचान इसके संयुक्त रूप और संक्षिप्त अर्थ से की जाती है।


संक्षेप में:
जब कोई शब्द दो या अधिक शब्दों से मिलकर, बिना विभक्ति-चिह्नों के, संक्षिप्त रूप में एक अर्थ देता है, तो वह सामासिक पद कहलाता है।

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