सामासिक पद (Compound word) की पहचान करने के लिए हमें देखना होता है कि — क्या वह शब्द वास्तव में दो या अधिक शब्दों से मिलकर एक बना है, और क्या उनमें छिपा हुआ विभक्ति-चिह्न (जैसे – का, की, के, से, में, पर आदि) हट चुका है।

सामासिक पद की पहचान करने के मुख्य तरीके:
- दो या अधिक शब्दों का मेल –
सामासिक पद में कम से कम दो स्वतंत्र शब्द छिपे रहते हैं।
जैसे – राजपुत्र = राज का पुत्र। - विभक्ति-चिह्नों का लोप (हट जाना) –
सामान्य पदबंध में “का/की/के/में /पर/से/ के लिए” जैसे चिह्न रहते हैं, पर समास में ये हट जाते हैं।
जैसे – पुस्तक के लिए आलय → पुस्तकालय - अर्थ की संक्षिप्तता –
लंबे वाक्यांश को छोटा करके एक शब्द में बाँध देता है।
जैसे – सूर्य की किरण → सूर्यकिरण। - सामासिक पद को अलग करने पर मूल पदबंध मिलता है –
जैसे – देवालय को अलग करेंगे तो मिलेगा देव के लिए आलय (देवताओं का घर/मंदिर)। - समासविग्रह से पुष्टि –
सामासिक पद को विग्रह करके उसके असली पद दिखाए जाते हैं।
उदाहरण –- गंगाजल → गंगा का जल
- रथयात्रा → रथ की यात्रा
- विद्यालय → विद्या का आलय (घर)
- विद्याधन → विद्या रूपी धन
- सुलोचना→ सुंदर लोचन वाली
अर्थात सामासिक पद की पहचान इसके संयुक्त रूप और संक्षिप्त अर्थ से की जाती है।
संक्षेप में:
जब कोई शब्द दो या अधिक शब्दों से मिलकर, बिना विभक्ति-चिह्नों के, संक्षिप्त रूप में एक अर्थ देता है, तो वह सामासिक पद कहलाता है।



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