आज का सुविचार

आज का सुविचार 06/10/2024

सफल नेतृत्व तभी संभव है जब आप अपने मूल्यों और सिद्धांतों को आचरण में लाकर योजनाओं में कार्यान्वित करें। मात्र उपदेशों का कोई महत्त्व नहीं होता।”

दोस्तो!  नेतृत्व का असली अर्थ केवल निर्देश देने या योजनाएँ बनाने से नहीं है, बल्कि उन योजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने की क्षमता में निहित होता है। एक सशक्त और प्रभावी नेता वही होता है, जो अपने सिद्धांतों और मूल्यों का न केवल प्रचार करता है, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और कार्यों में भी दिखाता है। उपदेशों का महत्व तब तक नहीं होता जब तक उनका पालन वास्तविक जीवन में न किया जाए।

नेतृत्व की इस धारणा का आधार यह है कि अनुयायी अपने नेता के कार्यों और व्यवहार को देखकर प्रेरणा लेते हैं। यदि नेता केवल उपदेश देता है, परंतु स्वयं उन सिद्धांतों का पालन नहीं करता, तो उसके अनुयायी भी उन उपदेशों का सम्मान नहीं करेंगे। उदाहरणस्वरूप, यदि कोई नेता ईमानदारी और पारदर्शिता का प्रचार करता है, लेकिन स्वयं छल-कपट और अस्पष्टता से काम लेता है, तो उसकी विश्वसनीयता पर संदेह उत्पन्न होता है।

एक बार गाँधी जी के पास एक स्त्री आई। उसने गाँधी जी से प्रार्थना की,”महात्मा ! मेरा बेटा गुड़ बहुत खाता है। कृपया उसे गुड़ कम खाने को कहें। गाँधी जी ने उस स्त्री को एक माह बाद आने के लिए कहा। एक माह बाद जब वह स्त्री अपने पुत्र को लेकर वापस गाँधी जी के समक्ष उपस्थित हुई तो महात्मा गाँधी ने उसके पुत्र से कहा, -“बेटा, अधिक गुड़ खाना छोड़ दो। यह अच्छी आदत नहीं।” यह सुनकर वह महिला आश्चर्यचकित रह गई। उसने महात्मा गाँधी से कहा,-“बापू ! मैने सोचा था कि आप इसे कोई विशेष बात कहेंगे। लेकिन आपने मात्र “गुड़ खाना छोड़ दो” ही कहा। यह बात तो आप एक माह पूर्व भी कह सकते थे। गाँधी जी ने कहा, -” हाँ! लेकिन तब मैं भी बहुत गुड़ खाता था। जो आचरण मैं खुद नही करता , उसे दूसरे से करने के लिए कैसे कह देता? एक माह अपने गुड़ खाने की आदत पर नियंत्रण करने के बाद ही मैं इसे गुड़ न खाने को कह सका हूँ। गाँधी जी के इस प्रसंग में एक सच्चे नेतृत्व के गुण प्रकट होते हैं। यही कारण है कि उस वक्त करोड़ों लोग गाँधी से प्रभावित थे और उनका अनुसरण करते थे। जब कोई नेता अपने मूल्यों और सिद्धांतों का सजीव उदाहरण बनता है, तो उसकी नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होती है। उसके अनुयायी उसे एक आदर्श मानते हैं और उसके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

अतः, यदि आप एक प्रभावी नेता बनना चाहते हैं और अपनी योजनाओं को सफलतापूर्वक कार्यान्वित करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने आचरण में अपने सिद्धांतों और मूल्यों को लाना आवश्यक है। क्योंकि जैसा आचरण आप स्वयं करेंगे, वही आचरण आपके दल या संगठन के सदस्यों में प्रतिदर्शित होगा। श्रीमद्‍भागवत गीता में भी कहा गया हैं-

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते।।3.21।।

श्रेष्ठ लोग जैसा आचरण करते हैं अन्य लोग भी उसी का अनुसरण करते हैं। एक नेता का आचरण उसके अनुयायियों के लिए प्रमाण सदृश होता है। नेतृत्वकर्ता का ऐसा व्यवहार होने से कार्यकर्ता भी इसी ढंग के बनेंगे। एक अच्छा नेता अपने आचरण से यह दिखाता है कि समस्याओं का सामना कैसे किया जाए और कैसे टीम को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए।

नेता की सफलता यह कि वह स्वयं उदाहरण बनकर काम करे। दल के सदस्यों का जब तक अपने नेता के प्रति पूर्ण विश्वास न हो,संगठन अपनी पूर्ण कार्यक्षमता प्रदर्शित करने मेंअसफल ही होगा। अतः एक अच्छा नेता वह है, जो कोरे निर्देश और उपदेश देने की बजाय अपनी टीम को स्वयं उदाहरण बनकर प्रेरित करता है, जिससे संगठन निर्दिष्ट योजना को अपनी पूरी क्षमता से कार्यान्वित करने में सफल होता है।

हमें उम्मीद है कि आज का सुविचार आपके जीवन में एक सकारात्मक परिवर्तन लाएगा।

2 responses to “सुविचार-16”

  1. wow!! 52सुविचार-19

  2. […] सुविचार-16 […]

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