लेखक परिचय

लेखक – निदा फ़ाज़ली
जन्म – 12 अक्तूबर 1938 (दिल्ली)                                

मृत्यु- 8फ़रवरी 2016

उर्दू के जाने –माने लेखक, शेरो-शायरी को गद्य के बीच में पिरो कर अपनी  बात कहने वाले अपने तरह के अकेले गद्यकार थे ।

प्रमुख रचनाएँ : इनकी पुस्तकें ’लफ़्जों के पुल’, “तमाशा मेरे आगे “”कुछ खोया सा”  और इनकी आत्म-कथा दो भागों में  “दीवारों के  बीच”और  “दीवारों के  पार “ प्रकाशित हुई हैं । फ़िल्म जगत से जुड़े हुए लेखक थे ।

प्रश्न- उत्तर :

मौखिक:

1.निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर एक दो पंक्तियों में दीजिए −

प्रश्न 1.बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे?

उत्तर :प्रतिदिन आबादी बढ़ रही है और बिल्डर नई-नई इमरातें बनाने के लिए वन को खतम कर रहे हैं।  बड़े-बड़े बिल्डर अधिक लाभ के लोभ में इमारतों के निर्माण कार्य हेतु समुद्र को पीछे धकेल रहे हैं।

प्रश्न 2: लेखक का घर किस शहर में था?

उत्तर : लेखक का घर पहले ग्वालियर में था, फिर फ़िल्म जगत से जुड़ने के कारण वे बम्बई (मुंबई) के वर्सोवा में रहने लगे।

प्रश्न 3:जीवन कैसे घरों में सिमटने लगा है?

उत्तर :  लेखक के अनुसार अब जीवन डिब्बे जैसे घरों में सिमटने लगा है। पहले बड़े-बड़े घर दालान आँगन होते थे, सब मिलजुल कर रहते थे, अब सब अपने तक ही सीमित हो गए हैं। और छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में जीवन सिमटने लगा है।

प्रश्न 4:कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे?

उत्तर :  कबूतर के घोंसले में दो अंडे थे। एक बिल्ली ने तोड़ दिया था दूसरे अण्डे को बिल्ली से बचाने के चक्कर में माँ के हाथ से ही गिरकर टूट गया। इससे कबूतर परेशान होकर इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।

लिखित :-

(क)निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए –

प्रश्न 1:अरब में लशकर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं?

उत्तर: लशकर को अरबवासी नूह की उपाधि के रूप में याद करते हैं। नूह को पैगम्बर या ईश्वर का दूत भी कहा गया है। वे बहुत भावुक और दयालु प्रवृत्ति के धार्मिक व्यक्ति थे ।एक बार उन्होंने एक कुत्ते को दुत्कारते हुए दूर होने को कहा ,क्योंकि इस्लाम में कुत्तों को गंदा समझा जाता है। इस पर कुत्ते ने उन्हें जवाब दिया कि न तो कुत्ता अपनी मर्जी से कुत्ता है और न लशकर अपनी मर्जी से इन्सान। दोनों को बनाने वाला एक ही ईश्वर है। कुत्ते के द्वारा सबक सीख कर नूह को अपनी गलती का अहसास हुआ और कुत्ते के दिल को चोट पहुँचाने के पश्चाताप के कारण वे जीवन भर रोते रहे । उनके इन्हीं गुणों के कारण अरब में उन्हें नूह का लकब अर्थात रोने वाला पैगंबर के नाम से याद किया जाता है ।

प्रश्न2: लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों?

उत्तर : लेखक की माँ को प्रकृति से बहुत प्यार था। वे कहती थीं कि सूरज ढलने के बाद या शाम होने के बाद  पेड़ों को नहीं छूना चाहिए क्योंकि इससे  वे रोते हैं। रात में फूल नहीं  तोड़ने चाहिए, वे बद्दुवा देते हैं।

प्रश्न3: प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ?

उत्तर :  प्रकृति में आए असंतुलन का कारण निरंतर पेड़ों का कटना, समुद्र को बाँधना, प्रदूषण और बारूद की विनाश लीला है। जिसके कारण भूकंप, अधिक गर्मी, वक्त बेवक्त की बारिश, अतिवृष्टि, जलजले, सैलाब और तूफ़ान आदि शुरु हो गए  और अनेक नई  बीमारियाँ  होने लगी । यह सब प्रकृति में आए असंतुलन का परिणाम है।

प्रश्न4 :लेखक की माँ ने पूरे दिन रोज़ा क्यों रखा?

उत्तर :लेखक के घर एक कबूतर का घोसला था जिसमें दो अंडे थे। एक अंडा बिल्ली ने झपट कर तोड़ दिया, दूसरा अंडा बचाने के लिए माँ घोसला उतारने लगीं तो अंडा गिरकर टूट गया। इस पर उन्हें बहुत  दुख हुआ। माँ ने प्रायश्चित के लिए पूरे दिन रोज़ा रखा और बार-बार नमाज़ पढ़कर माफी माँगती रहीं।

प्रश्न5: लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : लेखक पहले ग्वालियर में रहता था। फिर बम्बई के वर्सोवा में रहने लगा। पहले घर बड़े-बड़े होते थे, दालान आंगन होते थे अब डिब्बे जैसे घर होते हैं, पहले सब मिलकर रहते थे अब सब अलग-अलग रहते हैं।पहले वर्सोवा जहाँ लेखक का घर था वहाँ जंगल ही जंगल था अब  इमारतें ही इमारतें हैं। पशु-पक्षियों के रहने के लिए स्थान नहीं रहे। पहले अगर वे घोंसले बना लेते थे तो ध्यान रखा जाता था पर अब उनके आने के रास्ते बंद कर दिए जाते हैं।

प्रश्न6: ‘डेरा डालनेसे आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर :   ‘डेरा डालने’ का अर्थ है कुछ समय के लिए रहना अथवा अस्थाई निवास । बड़ी-बड़ी इमारतें बनने के कारण पक्षियों को घोंसले बनाने की जगह नहीं मिल रही है । इस कारण उनका मुख्य निवास पेड़-पौधे छूट गए हैं इसलिए उन्होंने स्थानीय आवासों में अपने अस्थाई घोंसले बना लिये।

प्रश्न7:शेख अयाज़ के पिता अपने बाजू पर काला च्योंटा रेंगता देख भोजन छोड़ कर क्यों उठ खड़े हुए?

उत्तर :  एक बार शेख अयाज़ के पिता कुएँ पर नहाने गए और वापस आए तो उनकी बाजू पर काला च्योंटा चढ़ कर आ गया। जैसे ही वह भोजन करने बैठे च्योंटा बाजू पर आया तो वे एक दम उठ कर चल दिए माँ ने पूछा कि क्या खाना अच्छा नहीं लगा तो उन्होनें जवाब दिया कि मैंने किसी को बेघर कर दिया है। उसे घर छोड़ने जा रहा हूँ। अर्थात वे च्योंटे को कुएँ पर छोड़ने चल दिए। इस घटना से शेख अयाज के पिता की दयालुता प्रकट होती है ।

()निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए −

प्रश्न 1.बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर: पर्यावरण असंतुलित होने का सबसे बड़ा कारण आबादी का बढ़ना है। जिससे आवासीय स्थलों को बढ़ाने के लिए वन, जंगल यहाँ तक कि समुद्रस्थलों को भी छोटा किया जा रहा है। पशु-पक्षियों के लिए स्थान नहीं है। इन सब कारणों से प्राकृतिक का सतुंलन बिगड़ गया है और प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ती जा रही हैं। कहीं भूकंप, कहीं बाढ़, कहीं तूफान, कभी गर्मी, कभी तेज़ वर्षा । इन के कारण नई- नई  बीमारियाँ हो रही हैं। इस तरह बढ़ती हुई आबादी के कारण पर्यावरण में असंतुलन उत्पन्न हो रहा है।

प्रश्न 2.लेखक की पत्नी को खिड़की मे जाली क्यों लगवानी पड़ी?

उत्तर: लेखक के घर में कबतूर ने घोसला बना लिया था जिसमें दो बच्चे थे उनको दाना खिलाने के लिए कबूतर आया- जाया करते थे। जिस से लेखक के परिवार को काफ़ी परेशानी होती थी क्योंकि कई बार वे किसी  सामान  को गिरा कर तोड़ दिया करते थे। लाइब्रेरी की किताबों को गंदा कर देते थे । इससे परेशान होकर लेखक की पत्नी ने घोंसला सरकाकर दूसरी ओर कर दिया। कबूतरों के घर के अंदर आने-जाने पर रोक लगाने के लिए खिड़की पर जाली लगा दी।

प्रश्न3 :समुद्र के गुस्से की क्या वजह थी? उसने अपना गुस्सा कैसे निकाला?

उत्तर: कई सालों से बड़े-बड़े मकानों को बनाने वाले बिल्डर मकान बनाने के लिए समुद्र को पीछे धकेल कर उसकी जमीन पर कब्ज़ा कर रहे थे। बेचारा समुद्र लगातार सिकुड़ता जा रहा था। पहले तो समुद्र ने अपनी फैली हुई टांगों को इकठ्ठा किया और सिकुड़ कर बैठ गया। फिर  जगह कम होने के कारण घुटने मोड़ कर बैठ गया। अब भी बिल्डर नहीं माने तो समुद्र खड़ा हो गया…. ।जब समुद्र के पास खड़े रहने की जगह भी कम पड़ने लगी और समुद्र को गुस्सा आ गया। कहा जाता है कि जो जितना बड़ा होता है उसको गुस्सा उतना ही कम आता है परन्तु जब आता है तो उनके गुस्से को कोई शांत नहीं कर सकता। समुद्र के साथ भी वही हुआ जब समुद्र को गुस्सा आया तो एक रात वह अपनी लहरों के ऊपर दौड़ता हुआ आया और तीन जहाज़ों को ऐसे उठा कर तीन दिशाओं में फेंक दिया जैसे कोई किसी बच्चे की गेंद को उठा कर फेंकता है। एक को वर्ली के समुद्र के किनारे फेंका तो दूसरे को बांद्रा के कार्टर रोड के सामने मुँह के बल गिरा दिया और तीसरे को गेट-वे-ऑफ इंडिया के पास पटक दिया जो अब घूमने आये लोगों का मनोरंजन का साधन बना हुआ है। समुद्र ने तीनों को इस तरह फेंका की कोशिश करने पर भी उन्हें चलने लायक नहीं बनाया जा सका।

प्रश्न-4

मट्टी से मट्टी मिले,

खो के सभी निशान,

किसमें कितना कौन है,

कैसे हो पहचान’

इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:   लेखक का कहना है कि हमारा शरीर मिट्टी का बना है और मृत्यु के बाद उसे फ़िर से मिट्टी में ही मिल जाना है। उसकी अपनी कोई पहचान शेष नहीं रहेगी। अत: सबको मिलजुल कर रहना चाहिए। किसी से दुर्व्यवहार नहीं करना चाहिए। कोई बड़ा छोटा नहीं है, अच्छा बुरा नहीं है। सबकी रचना ईश्वर ने की है।इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक ने जीवन की  क्षण -भंगुरता और अस्सारता को समझाया है और प्रेमपूर्वक सभी प्राणियों के साथ सामंजस्य के साथ जीवन जीने का संदेश दिया है ।

 (ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए –

(1) नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है। नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई (मुंबई ) में देखने को मिला था।

उत्तर -प्रकृति एक सीमा तक ही सहन कर सकती है। कहा जाता है कि जो जितना बड़ा होता है उसको गुस्सा उतना ही कम आता है परन्तु जब आता है तो उनके गुस्से को कोई शांत नहीं कर सकता।  प्रकृति को भी जब गुस्सा आता है तो क्या होता है इसका एक नमूना कुछ साल पहले मुंबई में आई सुनामी के रूप में देख ही चुके हैं। ये नमूना इतना डरावना था कि मुंबई के निवासी डर कर अपने-अपने देवी-देवताओं से उस मुसीबत से बचाने के लिए प्रार्थना करने लगे थे।

 (2) जो जितना बड़ा होता है उसको गुस्सा उतना ही कम आता है।

उत्तर -कई सालों से बड़े-बड़े मकानों को बनाने वाले बिल्डर मकान बनाने के लिए समुद्र को पीछे धकेल कर उसकी जमीन पर कब्ज़ा कर रहे थे। जब समुद्र के पास खड़े रहने की जगह भी कम पड़ने लगी और समुद्र को गुस्सा आ गया। कहा जाता है कि जो जितना बड़ा होता है उसको गुस्सा उतना ही कम आता है परन्तु जब आता है तो उनके गुस्से को कोई शांत नहीं कर सकता। समुद्र के साथ भी वही हुआ जब समुद्र को गुस्सा आया तो एक रात वह अपनी लहरों के ऊपर दौड़ता हुआ आया और तीन जहाज़ों को ऐसे उठा कर तीन दिशाओं में फेंक दिया जैसे कोई किसी बच्चे की गेंद को उठा कर फेंकता है।

 (3) इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिन्दों से उनका घर छीन लिया है। इनमें से कुछ शहर छोड़ कर चले गए हैं। जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा दाल लिया है।

उत्तर – लेखक कहता है कि ग्वालियर से बंबई के बीच किसी समय में दूर तक जंगल ही जंगल थे। पेड़-पौधे थे, पशु-पक्षी थे और भी न जाने कितने जानवर थे। अब तो यहाँ समुद्र के किनारे केवल लम्बे-चौड़े गाँव बस गए हैं। इन गाँव ने न जाने कितने पशु-पक्षियों से उनका घर छीन लिया है। इन पशु-पक्षियों में से कुछ तो शहर को छोड़ कर चले गए हैं और जो नहीं जा सके उन्होंने यहीं कहीं पर भी अस्थाई घर बना लिए हैं। अस्थाई इसलिए क्योंकि कब कौन उनका घर तोड़े कर चला जाये कोई नहीं जनता।

 (4) शेख अयाज़ के पिता बोले,’नहीं यह बात नहीं है। मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया है। उस बेघर को कुँए पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ।इन पंक्तियों में छिपी हुई उनकी भावना को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर – शेख अयाज़ के पिता बोले,’नहीं यह बात नहीं है। मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया है। उस बेघर को कुँए पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ।’ इन पंक्तियों में शेख अयाज़ के पिता की छिपी हुई भावना यह थी कि वे पशु-पक्षियों की भावना को समझते थे। वे अपना खाना छोड़ कर केवल एक काले च्योंटे को उसके घर कुँए पर छोड़ने चल पड़े। उनका व्यक्तित्व ऐसा था जो किसी को भी तकलीफ नहीं देना चाहते थे।

भाषा अध्ययन

1.उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित वाक्यों में कारक चिह्नों को पहचानकर रेखांकित कीजिए और उनके नाम रिक्त स्थानों में लिखिए; –

(क)माँ ने भोजन परोसा।कर्ता
(ख)मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ।संप्रदान
(ग)मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया।कर्म
(घ)कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।अधिकरण
(ङ)दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो।अधिकरण

2: नीचे दिए गए शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए −

चींटी, घोड़ा, आवाज़, बिल, फ़ौज, रोटी, बिंदु, दीवार, टुकड़ा।  

चींटीचीटियाँ
घोड़ाघोड़े
आवाज़आवाज़ें
बिलबिल
फ़ौजफ़ौजें
रोटीरोटियाँ
बिंदुबिंदु (बिदुओ को)
दीवारदीवारें
टुकड़ाटुकड़े

 3:  निम्नलिखित वाक्यों में उचित शब्द भरकर वाक्य पूरे कीजिए-

 (क) आजकल ….ज़माना..…. बहुत खराब है। (जमाना/ set//ज़माना Time)

(ख) पूरे कमरे को .…सजा..…. दो। (सजा/ decorate //सज़ा punishment )

(ग) माँ दही ….जमाना… भूल गई। (जमाना// ज़माना)

(घ) …ज़रा.… चीनी तो देना (जरा/ oldage //ज़रा Little, small amount )

(ङ) दोषी को ..सज़ा…. दी गई। (सजा// सज़ा)

(च) महात्मा के चेहरे पर ..तेज.. था। (तेज/ Shine , bright / तेज़ speedy ,fast )

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