
- लेखक परिचय – प्रेमचंद
- बड़े भाई साहब पाठ का सारांश
- बड़े भाई साहब प्रश्न अभ्यास
- बड़े भाई साहब – भाषा अध्ययन
लेखक परिचय – प्रेमचंद
प्रेमचंद भारत के महान साहित्यकारों में से एक थे। वे उत्तर प्रदेश के रहने वाले थे। उनका जन्म 13 जुलाई 1880 में वाराणसी के पास लम्ही ग्राम में हुआ था। उनका बचपन का नाम धनपत राय था।अपने लेखन की शुरुआत उन्होंने नवाब राय नाम से उर्दू लेखन के द्वारा की । आजीविका के रूप में लेखन के अतिरिक्त उन्होंने स्कूल अध्यापक , इंस्पेक्टर , मैनेजर आदि कार्य किये बाद के वर्षों में पत्रकार हंस पत्रिका के संपादक भी रहे। 8 अक्तूबर 1936 में उनका देहावसान हो गया।

वे उनके द्वारा लिखी गई कई कहानियों, उपन्यासों, नाटकों और अन्य उपलब्धियों के लिए जाने जाते हैं। प्रेमचंद ने अपनी रचनाओं में समाज, राजनीति, धर्म और जीवन के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया। उनकी लेखनी बहुत सरल थी जिससे वह अपने संदेश को आसानी से समझाते थे। उनकी लेखनी की एक खास बात थी कि वह सामान्य जनता की कठिनाइयों और संघर्षों को दिखाया गया है। जिससे वे जन सामान्य के बीच गहराई से जुड़ गए थे और उनकी रचनाएँ उन दबे शोषित वर्ग को संबोधित करती और उनका प्रतिनिधित्व करती दिखती हैं।
गोदान , गबन , प्रेमाश्रम , सेवासदन , निर्मला, कर्मभूमि, रंगभूमि, कायाकल्प ,प्रतिज्ञा उनके प्रसिद्ध उपन्यास हैं । उनकी कहानियों का संकलन मान सरोवर आठ अंकों में प्रकाशित है। सोजेवतन उनका पहला और प्रसिद्ध कहानी संग्रह अंग्रेजी सरकार द्वारा जब्त करा दिया गया था।
बड़े भाई साहब पाठ का सारांश

बड़े भाई साहब में दो भाइयों की कहानी है। बड़ा भाई छॊटे से पाँच वर्ष बड़ा है। दोनों भाई घर से दूर होस्टेल में रह कर पढ़ाई करते हैं । छोटे भाई की देखभाल की जिम्मेदारी और उसकी शिक्षा की जिम्मेदारी भी बड़ा भाई अपनी समझता है और पूरी तरह एक अभिभावक की भूमिका निभाता है । वह अक्सर छोटे भाई को डाँट -डपट करता है और इसी वजह से छोटा भाई अपने बड़े भाई से डरता है। बड़ा भाई लगातार पढ़ता रहता है किंतु बार- बार फ़ेल होता है , वहीं छोटा भाई बड़े की डाँट डपट के डर से जो कुछ पढ़ लेता है उसी में अच्छे अंकों से पास हो जाता है। जिसके कारण उसे घमंड हो जाता है और वह बड़े भाई की अवहेलना करने लगता है। तभी एक दिन बड़े भाई द्वारा रंगे हाथों पकड़ा जाता है और बड़े भाई बहुत ही मनोवैज्ञानिक तरीके से उसे समझाते हैं । दोनों भाइयों के आपसी प्रेम भरे मिलन के साथ ही कहानी का पटाक्षेप जाता है। लेखक ने जहाँ बडे भाई के माध्यम से चतुराई और रोचकता के साथ शिक्षा व्यवस्था की कमियों की ओर ध्यान दिलाया है वहीं पढ़ाई के महत्त्व, अच्छे अंक न आने के कारणों की ओर भी ध्यान दिलाया है। पूरी कहानी बड़ी ही रोचकता से हास्य- व्यंग्य का पुट लिए हुए छोटे भाई के आत्मकथ्यात्मक शब्दों में लिखी गई है। जहाँ भाइयों के आपसी प्रेम और आदर को दिखाया है, वहीं शिक्षा में रटने वाली विद्या की अपेक्षा व्यावहारिक ज्ञान और अनुभव के महत्त्व को भी समझाया गया है। कहानी के द्वारा खेल और अध्ययन के बीच संतुलन बनाने की सीख दी गई है। विद्यार्थियों के साथ ही साथ यह कहानी उन अभिभावकों के लिए भी अच्छा सबक है जो बच्चों के सिर्फ़ किताबी शिक्षण पर जोर देते हैं ।
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बड़े भाई साहब प्रश्न अभ्यास
मौखिक प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए
प्रश्न 1.कथा नायक की रुचि किन कार्यों में थी?
उत्तर-कथा नायक की रुचि खेल-कूद, मैदानों की सुखद हरियाली, हवा के हलके-हलके झोंके, फुटबॉल की उछल-कूद, बॉलीबॉल की फुरती और पतंगबाजी, कागज़ की तितलियाँ उड़ाना, चारदीवारी पर चढ़कर नीचे कूदना, फाटक पर सवार होकर उसे आगे-पीछे चलाना आदि कार्यों में थी।
प्रश्न 2.बड़े भाई साहब छोटे भाई से हर समय पहला सवाल क्या पूछते थे?
उत्तर- बड़े भाई छोटे भाई से हर समय एक ही सवाल पूछते थे-कहाँ थे? उसके बाद वे उसे उपदेश देने लगते थे।
प्रश्न 3.दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
उत्तर-दूसरी बार पास होने पर छोटे भाई के व्यवहार में यह परिवर्तन आया कि वह स्वच्छंद और घमंडी हो गया। वह यह सोचने लगा कि अब पढ़े या न पढ़े, वह पास तो हो ही जाएगा। वह बड़े भाई की सहनशीलता का अनुचित लाभ उठाकर अपना अधिक समय खेलकूद में लगाने लगा।
प्रश्न 4. बड़े भाई साहब छोटे भाई से उम्र में कितने बड़े थे और वे कौन-सी कक्षा में पढ़ते थे?
उत्तर-बड़े भाई साहब लेखक से उम्र में 5 साल बड़े थे। वे नवीं कक्षा में पढ़ते थे।
प्रश्न 5. बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए क्या करते थे?
उत्तर- बड़े भाई साहब दिमाग को आराम देने के लिए कभी कापी पर वे कभी किताब के हाशियों पर चिड़ियों, कुत्तों, बिल्लियों के चित्र बनाते थे। कभी-कभी वे एक शब्द या वाक्य को अनेक बार लिख डालते, कभी एक शेर-शायरी की बार-बार सुंदर अक्षरों में नकल करते। कभी ऐसी शब्द रचना करते, जो निरर्थक होती, कभी किसी आदमी का चेहरा बनाते।
लिखित लघु प्रश्न
क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए-
प्रश्न १- छोटे भाई ने अपनी पढ़ाई का टाइम- टेबल बनाते समय क्या क्या सोचा और फिर उसका पालन क्यों नहीं कर पाया?
उत्तर: छोटे भाई को पढ़ाई के लिए बड़े भाई से खरी- खोटी सुननी पड़ती थी इसलिए उसने अच्छे से पढ़ाई करने का निश्चय कर लिया। उसने सोचा कि अब वह अपने बड़े भाई को शिकायत का कोई मौक़ा नहीं देगा। अति उत्साह में उसने एक ऐसा टाइम- टेबल बनाया, जिस में सुबह छः बजे से लेकर रात ग्यारह बजे तक सिर्फ पढ़ाई का ही कार्यक्रम था और खेल- कूद के लिए कोई स्थान नहीं था । छोटे भाई की खेलों में अधिक रुचि थी । अत: ऐसा टाइम – टेबल अव्यवहारिक हो गया। अगले दिन से ही आदत से मज़बूर छोटा भाई खेलों की तरफ़ आकर्षित हो गया और अपने टाइम- टेबल का पालन नहीं कर पाया।
प्रश्न २.एक दिन जब गुल्ली-डंडा खेलने के बाद छोटा भाई बड़े भाई के सामने पहुँचा तो उनकी क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर: कक्षा में अव्वल आने और बड़े भाई साहब के फेल हो जाने पर छोटे भाई को अपने ऊपर घमंड हो गया था, जिसे बड़े भाई साहब भी समझने लगे थे।एक दिन जब छोटा भाई गुल्ली- डंडा खेल कर आया तो बड़े भाई ने उसे आड़े हाथों लिया। उन्होंने उसके घमंड पर निशाना साधते हुए रावण का उदाहरण दिया। उसकी सफलता को भी तुक्का बता दिया और आगे की पढ़ाई की कठिनाई का भय दिखाया। इस प्रकार बड़े भाई ने उसे मेहनत करने का उपदेश दिया।
प्रश्न ३. बड़े भाई को अपने मन की इच्छाएं क्यों दबानी पड़ती थी?
उत्तर: दोनों भाई गांव से शहर आकर होस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। बड़े भाई को माता- पिता के खर्च का बोध तो था ही, साथ ही छोटे भाई को अनुशासन में रखकर ठीक से पढ़ाने का नैतिक कर्तव्य भी वह समझते थे । इसलिए स्वयं पढ़ाई करके वह आदर्श प्रस्तुत करना चाहते थे। इसी कारण स्वयं भी खेल-तमाशे में समय व्यर्थ न करके आत्म-अनुशासन प्रदर्शित कर उदाहरण पेश करना चाहते थे । छोटे भाई को अनुशासन में रखने के लिए बड़े भाई को अपने मन की इच्छाएं दबानी पड़ती थी।
प्रश्न 4. बड़े भाई साहब छोटे भाई को क्या सलाह देते थे और क्यों?
उत्तर : बड़े भाई साहब छोटे भाई को मेहनत कर पढ़ाई करने को कहते थे। छोटे भाई को अनुशासन में रखकर पढ़ाना वे अपना कर्तव्य समझते थे। इसके पीछे छोटे भाई के उज्ज्वल भविष्य की कामना थी।
प्रश्न ५- छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का क्या फ़ायदा उठाया?
उत्तर: छोटे भाई ने बड़े भाई साहब के नरम व्यवहार का अनुचित लाभ उठाया। इससे उसकी स्वछंदता बढ़ गई और उसने पढ़ना लिखना बंद कर दिया। उसके मन में यह भावना बलवती हो गई कि वह पढ़े या न पढ़े, परीक्षा में पास अवश्य हो जाएगा। इतना ही नहीं, उसने अपना सारा समय कनकौए (पतंगबाजी) उड़ाने में ही बर्बाद करना शुरू कर दिया।
लिखित दीर्घ प्रश्न
ख) निम्न लिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए-
प्रश्न १. बड़े भाई की डांट- फटकार अगर न मिलती तो क्या छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता? अपने विचार प्रकट कीजिए?
उत्तर: यद्यपि छोटा भाई कुशाग्र बुद्धि का था, किंतु पढ़ाई- लिखाई में उसका कोई ध्यान न था । उसकी रुचि सिर्फ खेलने में थी ।ऐसे में बड़े भाई दबाव बना कर उसे अनुशासन में रखता था,जिससे उसकी चंचलता में नियंत्रण बना रहता था । बड़े भाई की फटकार के डर से उसे नियमित पढ़ाई करनी पड़ती थी । बड़े भाई की नसीहत के कारण ही उसे विषयों की कठिनाइयों का पता चला। मेरे विचार से अगर बड़े भाई की डाँट- फटकार न मिलती तो छोटे भाई का कक्षा में अव्वल आना संभव न था।
प्रश्न २. इस पाठ में लेखक ने समूची शिक्षा के किन तौर तरीकों पर व्यंग्य किया है? क्या आप उनके विचार से सहमत हैं?
उत्तर: इस पाठ में लेखक ने बड़े भाई के माध्यम से शिक्षा- व्यवस्था पर गहरा व्यंग्य किया है। शिक्षा सिर्फ रट लेने तक सीमित है। छात्रों के द्वारा विषयों के चुनाव, उनकी रूचि- अरुचि का कोई ध्यान नहीं दिया जाता । छोटे- छोटे विषयों पर अनावश्यक लंबे लेख लिखे जाने, नीरस शिक्षा पद्धति तथा तत्कालीन अंग्रेजी शासन द्वारा अनावश्यक रूप से इंगलिस्तान के इतिहास का बोझ छात्रों पर डाले जाने की समस्या की ओर ध्यान दिलाया गया है । इसके अलावा परीक्षकों द्वारा मूल्यांकन में बरती जाने वाली कट्टरता, शिक्षकों द्वारा गणित के नियमों का ठीक से स्पष्टीकरण न किए जाने पर भी कटाक्ष करते हुए शिक्षा प्रणाली की खामियों की ओर प्रहार किया है| शिक्षा प्रणाली छात्र केंद्रित नहीं थी और बालकों की मौलिक रचनात्मकता के लिए कोई स्थान नहीं था।। वर्तमान शिक्षा पद्धति में यद्यपि अनेक सुधार किए गए हैं, किंतु अभी भी और सुधार की आवश्यकता है ।
प्रश्न ३. बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ कैसे आती है?
उत्तर: बड़े भाई साहब के अनुसार जीवन की समझ अनुभव के साथ आती है। उनके अनुसार आयु बढ़ने के साथ- साथ व्यक्ति का तजुर्बा बढ़ता जाता है।जीवन के अनेक अनुभवों के साथ विपरीत परिस्थितियों में भी समस्या समाधान की योग्यता आ जाती है। वे अपनी अम्मा- दादा का उदाहरण पेश करते हैं जिन्होंने किताबी ज्ञान के बिना कम आय में भी सम्मान पूर्ण जीवन जीया। दूसरा उदाहरण में अपने पढ़े -लिखे हैड मास्टर और उनकी माँ का पेश करते हैं जिसमें अच्छी आय होने पर भी हैडमास्टर जी घर संतुलित तरीके से न चला पाए, जबकि उनकी अशिक्षित किंतु अनुभवी माँ घर का प्रबंधन उचित प्रकार से करने लगी। इस प्रकार भाई साहब किताबी ज्ञान के स्थान पर अनुभव, योग्यता और व्यावहारिक ज्ञान को महत्त्वपूर्ण मानते हैं। उनके अनुसार किताबी ज्ञान सिर्फ अगली जमात में प्रवेश लेने का जरिया है।
प्रश्न ४. छोटे भाई के मन में बड़े भाई के प्रति श्रद्धा क्यों उत्पन्न हुई?
उत्तर: बड़े भाई साहब अक्सर अपने छोटे भाई को पढ़ाई में दिलचस्पी लेने के लिए कभी प्यार से, तो कभी डाँट- डपट कर समझाने का प्रयास करते थे। लेकिन छोटा भाई खेलकूद में ही समय बिताता था। इसके बावजूद छोटा भाई कक्षा में अव्वल आता रहा, जबकि बड़े भाई साहब असफल रहे। इस सबसे छोटे भाई के मन में अभिमान उत्पन्न हो गया। वह अपने को बहुत विद्वान समझ कर बड़े भाई की अवहेलना करते हुए खेलकूद में ही मग्न रहने लगा। एक दिन जब बड़े भाई ने उसे आवारा लडकों के साथ पतंग उड़ाते देखा तो उसे आड़े हाथों लिया। छोटे भाई के घमंड पर निशाना साधते हुए उसे रावण का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ किताबी ज्ञान श्रेष्ठ नहीं है । आयु और अनुभव से भी व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त होता है। बड़ा भाई अपने माँ- दादा और हैड मास्टर साहब की माताजी का उदाहरण देते हुए वे अनुभव की श्रेष्ठता बताता है। बड़े भाई उसे बताते हैं कि वे अपने मन की इच्छाओं को काबू में रखते हैं, ताकि छोटे भाई के लिए आदर्श उपस्थित हो। बड़े भाई की इस युक्ति से छोटा भाई नतमस्तक हो जाता है और उसके मन में बड़े भाई के प्रति अपार श्रद्धा उत्पन्न हो जाती है।
प्रश्न ५. बड़े भाई की स्वभाव गत विशेषताएँ बताइए?
उत्तर: १) बड़े भाई साहब बड़े अध्ययन शील थे।
२) यद्यपि उनका पढ़ाई में अधिक मन नहीं लगता था और मन बहलाने को से अपनी पुस्तकों में कुत्ते- बिल्लियों के चित्र और अर्थ रहित शब्द लिखा करते थे , किंतु इधर – उधर घूमते और खेलते नहीं थे।
३) वे बार – बार फेल होने पर भी मेहनत से पढ़ने में लगे रहते थे।
४) वे उपदेश कला में निपुण थे और मौका मिलते ही अपने छोटे भाई को उपदेश देते थे।
५) वे अनुशासन- प्रिय, सिद्धांत- प्रिय थे। वे आत्म- नियंत्रण द्वारा छोटे भाई के लिए आदर्श प्रस्तुत करना चाहते थे।
६) हालांकि बड़े भाई साहब अपने छोटे भाई से मात्र पाँच वर्ष ही बड़े थे किंतु अपने माता – पिता से दूर होस्टल में रहते हुए छोटे भाई के लिए अभिभावक की भूमिका निभाते हुए नज़र आते हैं।
६) बड़े भाई साहब ने जिंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से किसे और क्यों महत्त्वपूर्ण कहा है?
उत्तर: बड़े भाई साहब ने जिंदगी के अनुभव और किताबी ज्ञान में से जिंदगी के अनुभव को महत्त्वपूर्ण कहा है। उनके हिसाब से किताबें पढ़कर महज़ इम्तिहान पास कर लेना और डिग्रियाँ प्राप्त कर लेना कोई बड़ी बात नहीं है। बड़े भाई साहब बुद्धि का विकास, जीवन मूल्यों के प्रति जागरूकता और व्यवहारिक जीवन में ज्ञान के उपयोग को महत्वपूर्ण मानते हैं। वे रटने वाली शिक्षा, जिसका व्यक्ति के सामाजिक और व्यावहारिक जीवन में कोई उपयोग न हो, उसे निरर्थक ही समझते हैं। उनका मानना है कि जिंदगी की कठिन परिस्थितियों का सामना अनुभव के आधार पर आसानी से किया जा सकता है।
प्रश्न ७) बताइए पाठ के किन अंशों से पता चलता है कि-
क) छोटा भाई अपने भाई साहब का आदर करता है।
उत्तर: छोटा भाई बड़े भाई का सम्मान करता है और हमेशा दबे पाँव कमरे में वापस आता था। लगातार सफलता से छोटे भाई को खुद पर अति आत्मविश्वास हो गया था, जिसके कारण वह अपना अधिकतर समय खेलकूद और पतंगबाजी में ही गुजारने लगा। फिर भी वह यह सब बड़े भाई की नज़रों से छिप कर ही करता था । मांझा देना, कन्ने बाँधना, पतंग टूर्नामेंट की तैयारी आदि सब बड़े भाई से छिप कर ही किया जाता था ।इस से पता चलता है कि छोटा भाई अपने बड़े भाई साहब का आदर करता था।
ख) भाई साहब को जिंदगी का अच्छा अनुभव है।
उत्तर: भाई साहब अप ने कर्तव्यों के अच्छी तरह निर्वाह करने के लिए अपने खेलकूद की इच्छा को दबाते थे । वे जीवन में किताबी शिक्षा, व्यवहारिक ज्ञान और अनुभव के अंतर और महत्त्व को समझते हैं । छोटे भाई के अंदर आए परिवर्तन और घमंड को महसूस करते हैं और ठीक समय पर विभिन्न उदाहरणों के द्वारा उस घमंड को दूर करना भी जानते हैं । इन सब से पता चलता है कि बड़े भाई को जीवन का अच्छा अनुभव है।
ग) भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है।
उत्तर: यद्यपि भाई साहब हमेशा गंभीर और अध्ययनशील नज़र आते हैं, किंतु जैसे ही एक कटी पतंग देखते हैं तो लंबे होने की वजह से उछल कर डोर पकड़ लेते हैं और बिना सोचे समझे होस्टल की ओर दौड़ पड़ते हैं। यही दर्शाता है कि भाई साहब के भीतर भी एक बच्चा है।
घ) भाई साहब छोटे भाई का भला चाहते हैं।
उत्तर: बड़े भाई साहब कभी डाँट कर तो कभी प्यार से छोटे भाई को पढ़ने को कहते रहते थे । भाई को पढ़ाने के लिए वे खुद भी मेहनत से पढ़ते हैं। वे उसे कहते हैं कि भले ही तुम पढ़ाई में मेरे समीप आ गए हो किंतु ये मत सोचो कि तुम अब स्वतंत्र हो । मेरे रहते तुम गलत रास्ते पर नहीं चल सकते। क्योंकि उम्र में बड़े होने के कारण मैं तुम्हें थप्पड़ मार कर भी सही रास्ते पर ला सकता हूं । इन सब बातों से पता चलता है कि बड़े भाई साहब अपने छोटे भाई का भला चाहते थे।
आशय स्पष्ट कीजिए
( ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए।
१). इम्तिहान पास कर लेना कोई चीज़ नहीं, असल चीज़ है बुद्धि का विकास।
आशय: यहां पर बड़े भाई के द्वारा कहे गए इन शब्दों का आशय यह है कि इम्तिहान पास कर लेना कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है जब तक व्यक्ति को उस ज्ञान को जीवन में उपयोग करने की क्षमता का विकास न हो । इसके लिए बुद्धि का विकास होना जरूरी है। अत: बुद्धि का विकास आवश्यक है, जिस से व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक कर सके।
२). फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बन्धन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खा कर भी खेल- कूद का तिरस्कार नहीं कर सकता था।
आशय: इन पंक्तियों में लेखक ने संसार के इस सत्य को उजागर किया है कि मनुष्य को यह मालूम है कि संसार नश्वर है और कष्ट और मृत्यु कभी कहीं भी आ सकती है । सब जानते है कि एक दिन मरना ही है किन्तु फिर भी मनुष्य मोह- माया के प्रभाव में जकड़ा संसार में सांसारिक सुख और मोह के बंधन में जकड़ा रहता है, उसी प्रकार लेखक भी अनेक तरह से बड़े भाई साहब से प्रताड़ित होने पर और धिक्कारे जाने पर भी खेल- कूद नहीं छोड़ पाता है । यहां पर लेखक खेल कूद के प्रति अपनी तीव्र आसक्ति को बड़े ही आध्यात्मिक तरीके से समझा रहे है।
३) बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने?
आशय: इस पंक्ति का भाव है कि मकान को मज़बूत और टिकाऊ बनाने के लिए मकान की नींव भी मजबूत और गहरी बनाई जाती है। जिस से मकान लंबे समय तक बना रहता है । यहां बड़े भाई साहब एक एक कक्षा में दो या तीन वर्ष लगा देते हैं । इस बात को समझाने के लिए लेखक व्यंग्य का सहारा लेकर कहता है कि भाई साहब को तालीम जैसे मामले में कोई जल्दी नहीं थी वह पढ़ाई रूपी भवन की नींव मजबूत करने के लिए ही दो या तीन वर्ष एक कक्षा में लगाते थे। इस प्रकार लेखक ने अपनी व्यंग्यात्मक शैली का परिचय दिया है।
४) आँखे आसमान की तरफ थीं और मन उस आकाशगामी पथिक की ओर, जो मंद गति से झूमता पतन की ओर चला आ रहा था ,मानो कोई आत्मा स्वर्ग से निकल कर विरक्त मन से नए संस्कार ग्रहण करने जा रही हो।
आशय: छोटे भाई को पतंग बाजी का बड़ा शौक था एक संध्या वह पतंग बाजी में मशगूल आकाश की ओर देखता बेतहाशा दौड़ रहा था क्योंकि एक पतंग मंद गति से झूमता हुआ नीचे की ओर चला आ रहा था। लेखक को यह देखकर इस प्रकार लगा मानो कोई आत्मा विरक्त भाव से धरती पर फिर संस्कार लेने चली आ रही हो।पतंग नीचे गिरने की एक साधारण सी घटना को लेखक ने इन पंक्तियों के माध्यम से बड़े ही दार्शनिक अंदाज में सुंदर शब्दों में प्रस्तुत किया है
बड़े भाई साहब – भाषा अध्ययन
1.निम्नलिखित शब्दों के दो -दो पर्यायवाची शब्द लिखिए-
नसीहत , रोष, आज़ादी, राजा, ताज्जुब
उत्तर : दो -दो पर्यायवाची शब्द –
नसीहत – राय , सीख , उपदेश
रोष – गुस्सा, नाराजी, क्षोभ
आज़ादी -स्वतंत्रता , मुक्ति, स्वाधीनता
राजा- नृप , महीप , भूपाल
ताज्जुब- हैरानी ,आश्चर्य , विस्मय
2.प्रेमचंद की भाषा बहुत पैनी और मुहावरेदार है। इसीलिए इनकी कहानियाँ रोचक और प्रभावपूर्ण होती हैं। इस कहानी में आप देखेंगे कि हर अनुच्छेद में दो-तीन मुहावरों का प्रयोग किया गया है। उदाहरणतः इन वाक्यों को देखिए और ध्यान से पढ़िए-
- मेरो जी पढ़ने में बिलकुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ था।
- भाई साहब उपदेश की कला में निपुण थे। ऐसी-ऐसी लगती बातें कहते, ऐसे-ऐसे सूक्ति बाण चलाते कि मेरे जिगर के टुकड़े-टुकड़े हो जाते और हिम्मत टूट जाती। बड़े भाई साहब
- वह जानलेवा टाइम-टेबिल, वह आँखफोड़ पुस्तकें, किसी की याद न रहती और भाई साहब को नसीहत और फजीहत का अवसर मिल जाता।
निम्नलिखित मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए-
सिर पर नंगी तलवार लटकना, आड़े हाथों लेना, अंधे के हाथ बटेर लगना, लोहे के चने चबाना, दाँतों पसीना आना, ऐरागैरा नत्थू-खैरा।
उत्तर-
सिर पर नंगी तलवार लटकना -जान का खतरा होना- बड़े भाई साहब को देखते ही छोटे भाई को सिर पर नंगी तलवार लटकती महसूस होती।
आड़े हाथों लेना- सख्ती से काम लेना– रोज-रोज स्कूल देर से आने पर अध्यापिका ने छात्र को आड़े हाथों लिया।
अंधे के हाथ बटेर लगना – अयोग्य व्यक्ति को मूल्यवान वस्तु मिलना- अनपढ़ मोहन का ग्राम सभापति बन जाना अंधे के हाथ बटेर लगने जैसा ही है।
लोहे के चने चबाना – बहुत कठिन काम करना- भारत से युद्ध में पाकिस्तान के सैनिकों को लोहे के चबाने पड़े।
दाँतों पसीना आना – बहुत कठिनाई होना- इस लोहे के बक्से को पहाड़ की चोटी में पहुँचाने में तो मुझे दाँतों पसीना आ गया।
ऐरा-गैरा नत्थू-खैरा – कोई भी (महत्त्वहीन) व्यक्ति- यह फ़ौजी छावनी है । यहाँ कोई भी ऐरा गैरा नत्थू खैरा नहीं आ सकता।
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3.निम्नलिखित तत्सम, तद्भव, देशी, आगत शब्दों को दिए गए उदाहरणों के आधार पर छाँटकर लिखिए।

तालीम, जल्दबाज़ी, पुख्ता, हाशिया, चेष्टा, जमात, हर्फ़, सूक्ति-बाण, जानलेवा, आँखफोड़, घुड़कियाँ, आधिपत्य, पन्ना, मेला-तमाशा, मसलन, स्पेशल, स्कीम, फटकार, प्रात:काल, विद्वान, निपुण, भाई साहब, अवहेलना, टाइम-टेबिल
उत्तर :
तत्सम : सूक्ति-बाण, आधिपत्य, निपुण , प्रात:काल, विद्वान, निपुण, अवहेलना
तद्भव : आँखफोड़, पन्ना, भाई साहब,
देशी, घुड़कियाँ, फटकार, मेला-तमाशा
आगत: तालीम, जल्दबाज़ी, पुख्ता, हाशिया, चेष्टा, जमात, हर्फ़, , जानलेवा, मसलन, स्पेशल, स्कीम, फटकार, टाइम-टेबिल
प्रश्न 4.
क्रियाएँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं-सकर्मक और अकर्मक
सकर्मक क्रिया- वाक्य में जिस क्रिया के प्रयोग में कर्म की अपेक्षा रहती है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं;
जैसे- शीला ने सेब खाया।
मोहन पानी पी रहा है।
अकर्मक क्रिया- वाक्य में जिस क्रिया के प्रयोग में कर्म की अपेक्षा नहीं होती, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं;
जैसे- शीला हँसती है।
बच्चा रो रहा है।
नीचे दिए वाक्यों में कौन-सी क्रिया है- सकर्मक या अकर्मक? लिखिए
- उन्होंने वहीं हाथ पकड़ लिया।
- फिर चोरों-सी जीवन कटने लगा।
- शैतान का हाल भी पढ़ा ही होगा।
- मैं यह लताड़ सुनकर आँसू बहाने लगता।
- समय की पाबंदी पर एक निबंध लिखो।
- मैं पीछे-पीछे दौड़ रहा था।
उत्तर- 1.सकर्मक 2.अकर्मक 3.सकर्मक 4.सकर्मक 5सकर्मक 6. अकर्मक
प्रश्न 5. ‘इक’ प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए-
विचार, इतिहास, संसार, दिन, नीति, प्रयोग, अधिकार
उत्तर-
विचार – वैचारिक
नीति – नैतिक
इतिहास – ऐतिहासिक
प्रयोग – प्रायोगिक
संसार – सांसारिक
अधिकार – आधिकारिक
दिन – दैनिक




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