Kar Chale Ham Fida NCERT Class 10 Hindi B Sparsh Chapter 8 Solutions,पाठ 8 कर चले हम फ़िदा

विषय तालिका:

  1. कवि परिचय:
  2. कविता: कर चले हम फ़िदा
  3. ‘कर चले हम फ़िदा’ कविता की व्याख्या
    1. काव्यांश 1
      1. संदर्भ1 :
      2. भावार्थ 1 :
    2. काव्यांश 2
      1. संदर्भ2 :
      2. भावार्थ 2:
    3. काव्यांश 3
      1. संदर्भ3 :
      2. भावार्थ 3:
    4. काव्यांश 4
      1. संदर्भ 4 :
      2. भावार्थ 4:
  4. प्रश्न अभ्यास
    1. (क )निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
      1. प्रश्न 1 – क्या इस गीत की कोई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है ?
      2.  प्रश्न 2 -: ‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’,इस पंक्ति में हिमालय किस बात का प्रतीक है ?
      3. प्रश्न 3 -: इस गीत में धरती को दुल्हन क्यों कहा गया है ?
      4. प्रश्न 4 -: गीत में ऐसे क्या ख़ास बात होती है कि वे जीवन भर याद रह रह जाते हैं ?
      5. प्रश्न 5 -: कवि ने ‘साथियों’ सम्बोधन का प्रयोग किसके लिए किया गया है ?     
      6. प्रश्न 6 – कवि ने इस कविता में किस काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है ?
      7. प्रश्न 7 -: इस गीत में ‘ सर पर कफ़न बाँधना ‘ किस ओर संकेत करता है?
      8. प्रश्न 8 – इस कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।
    2. (ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए –
      1. (1) साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई     फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया
      2. (2) खींच दो अपने खूँ से जमीं पर लकीर    इस तरफ आने पाए न रावन कोई
      3. (3) छू न पाए सीता का दामन कोई    राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो

कवि परिचय:

‘कर चले हम फ़िदा ‘ गीत कैफ़ी आज़मी द्वारा लिखा गया है। कैफ़ी आज़मी का जन्म 19 जनवरी 1919 को उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के मजमां गांव में हुआ था। माता पिता ने इनका नाम अतहर हुसैन रिज़वी रखा। आगे चल कर अतहर को शेरों शायरी और गीत लिखने में रुझान बढ़ गया। तभी अपने जिले से अपनी पहचान जोड़ते हुए इन्होंने अपना नाम कैफ़ी आज़मी रख लिया।

कैफ़ी आज़मी ने मुख्य रुप से उर्दू में कविताएं लिखीं। ये उर्दू के प्रगतिशील कवि के रूप में जाने गए। इनकी कविताओं में सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता का समावेश था । इनके हृदय की कोमलता इनकी शायरी में झलकती है। इन्होंने अनेकों मुशायरों में भाग लिया और अपनी मौसिकी के लिए वाहवाही बटोरी।

इनकी प्रसिद्धि के चलते फिल्म जगत ने भी इन्हें अवसर दिया । इनकी कलम से सैंकड़ों बेहतरीन गीत उभरे , जो आम जनता में बहुत हिट हुए । कैफ़ी के पांच कविता संग्रह झंकार, आख़िर ए शब, आवारा सज़दे, सरमाया और फिल्मी गीतों का संग्रह मेरी आवाज़ सुनो प्रकाशित हुए। इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया। पत्नी शौकत अली और पुत्री शबाना आज़मी दोनों सुप्रसिद्ध अभिनेत्री हैं।

10 मई 2002 को कैफ़ी आज़मी इस दुनियां से रुखसत हो गए।

कविता: कर चले हम फ़िदा

कर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो
साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई
फिर भी बढ़ते क़दम को न रुकने दिया
कट गए सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया

मरते-मरते रहा बाँकपन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो

ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर
जान देने के रुत रोज़ आती नहीं
हस्न और इश्क दोनों को रुस्वा करे
वह जवानी जो खूँ में नहाती नहीं

आज धरती बनी है दुलहन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो

राह कुर्बानियों की न वीरान हो
तुम सजाते ही रहना नए काफ़िले
फतह का जश्न इस जश्न‍ के बाद है
ज़िंदगी मौत से मिल रही है गले

बांध लो अपने सर से कफ़न साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो

खींच दो अपने खूँ से ज़मी पर लकीर
इस तरफ आने पाए न रावण कोई
तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे
छू न पाए सीता का दामन कोई

राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो

‘कर चले हम फ़िदा कविता की व्याख्या

काव्यांश 1

कर चले हम फ़िदा जानो-तन साथियो


अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो
साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई
फिर भी बढ़ते क़दम को न रुकने दिया
कट गए सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया

मरते-मरते रहा बाँकपन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो

संदर्भ1 :

प्रस्तुत काव्यांश हिंदी पाठ्य पुस्तक स्पर्श भाग- 2 के ’कर चले हम फ़िदा’ नामक पाठ से लिया गया है। इस कविता के कवि कैफ़ी आज़मी हैं इस गीत को ’ह॒॒कीकत ’ फ़िल्म के लिए लिखा गया था। यह फ़िल्म युद्ध की पृष्ठ भूमि पर बनी थी। इस गीत के माध्यम से कवि ने एक मरते हुए सैनिक के हृदय की भावनाएँ व्यक्त की हैं।यहाँ पर मरने से पूर्व सैनिक अपने गौरव का गान कर रहा है।

भावार्थ 1 :

सैनिक अपनी आखिरी साँसे गिनता हुआ कहता है कि मेरे प्यारे देशवासियों, मेरे साथियों हमने अपनी जान और शरीर इस धरती पर कुर्बान कर दी है। युद्ध में घायल होकर हमारी साँसें रुकती गई और नब्ज जमती गई। अर्थात सैनिक मरते गए लेकिन हमने अपने कदमों को रोका नहीं और युद्ध भूमि में आगे बढ़ते रहे। हमारे सिर कट गए , किंतु हमें इसका दुःख नहीं है। हमें गर्व है कि हमने हिमालय का सर झुकने नहीं दिया। हिमालय पर्वत को हमारे देश का ताज और गौरव के प्रतीक के रूप में माना जाता है। यहाँ पर हिमालय पर्वत का सिर न झुकने देने से आशय भारत के सम्मान की रक्षा करने से है।सैनिक कहता है कि मरते- मरते भी हमारे भीतर यह शोखी (देश के प्रति ) बरकरार रही । सैनिक अब देश को अपने देशवासियों के सुपुर्द कर रहा है।

काव्यांश 2

ज़िंदा रहने के मौसम बहुत हैं मगर
जान देने के रुत रोज़ आती नहीं
हस्न और इश्क दोनों को रुस्वा करे
वह जवानी जो खूँ में नहाती नहीं

आज धरती बनी है दुलहन साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो

संदर्भ2 :

प्रस्तुत काव्यांश हिंदी पाठ्य पुस्तक स्पर्श भाग- 2 के ’कर चले हम फ़िदा’ नामक पाठ से लिया गया है। इस कविता के कवि कैफ़ी आज़मी हैं इस गीत को ’ह॒॒कीकत ’ फ़िल्म के लिए लिखा गया था। यह फ़िल्म युद्ध की पृष्ठ भूमि पर बनी थी। इस गीत के माध्यम से कवि ने एक मरते हुए सैनिक के हृदय की भावनाएँ व्यक्त की हैं। इस काव्यांश में सैनिक दूसरे भारत वासियों को देश की रक्षा करने के लिए प्रेरित कर रहा है और अपनी मृत्यु पर की सार्थकता बता रहा है।

भावार्थ 2:

सैनिक कहता है कि जीवित रहने के अनेक अवसर आते हैं किंतु देश के लिए प्राण न्योछावर करने के अवसर हमेशा प्राप्त नहीं होते। और यदि कोई युवा वीर आपत्ति या देश पर आक्रमण के समय भी युद्ध करने न जाए तो ऐसा युवा सुंदरता और देश के प्रति अपने प्रेम दोनों को बदनाम करता है। आज धरती दुलहन की तरह सजी है कहने का तात्पर्य है कि जिस प्रकार दुलहन लाल परिधान पहन कर शृंगार करती है उसी तरह अपने वीर सैनिकों के रक्त से लाल हुई धरती दुल्हन की तरह सजी हुई लग रही है। अब यह देश तुम्हें सौंपता हूँ।

काव्यांश 3

राह कुर्बानियों की न वीरान हो
तुम सजाते ही रहना नए काफ़िले
फतह का जश्न इस जश्न‍ के बाद है
ज़िंदगी मौत से मिल रही है गले

बांध लो अपने सर से कफ़न साथियो
अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो

संदर्भ3 :

प्रस्तुत काव्यांश हिंदी पाठ्य पुस्तक स्पर्श भाग- 2 के ’कर चले हम फ़िदा’ नामक पाठ से लिया गया है। इस कविता के कवि कैफ़ी आज़मी हैं इस गीत को ’ह॒॒कीकत ’ फ़िल्म के लिए लिखा गया था। यह फ़िल्म युद्ध की पृष्ठ भूमि पर बनी थी। इस गीत के माध्यम से कवि ने एक मरते हुए सैनिक के हृदय की भावनाएँ व्यक्त की हैं। इस काव्यांश में मृत्यु से पूर्व सैनिक दूसरे भारत वासियों को देश की रक्षा करने के लिए प्रेरित कर रहा है।

भावार्थ 3:

सैनिक कह रहा है कि मैं तो देश की रक्षा में कुर्बान हो गया। अब यह ध्यान रखना कि देश की रख्शा के लिए अपनी बली देने वाले वीरों की कमी न हो। तुम सब नए -नए काफ़िले बना कर भारत माता की रक्षा के लिए आगे आते रहना। जीत का जश्न इस युद्ध रूपी जश्न की विजय के बाद है। अभी तो हमारी जिंदगी खत्म हो गई और हम मृत्यु के गले लगा रहे हैं अर्थात ₹वीकार कर रहे हैं। अब देश तुम्हें सौंपते हैं और तुम इसकी रक्षा हेतु सिर पर कफ़न बाँध कर लड़ने के लिए तैयार हो जाओ।

काव्यांश 4

खींच दो अपने खूँ से ज़मी पर लकीर
इस तरफ आने पाए न रावण कोई
तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे
छू न पाए सीता का दामन कोई

राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो

संदर्भ 4 :

प्रस्तुत काव्यांश हिंदी पाठ्य पुस्तक स्पर्श भाग- 2 के ’कर चले हम फ़िदा’ नामक पाठ से लिया गया है। इस कविता के कवि कैफ़ी आज़मी हैं इस गीत को ’ह॒॒कीकत ’ फ़िल्म के लिए लिखा गया था। यह फ़िल्म युद्ध की पृष्ठ भूमि पर बनी थी। इस गीत के माध्यम से कवि ने एक मरते हुए सैनिक के हृदय की भावनाएँ व्यक्त की हैं। सैनिक अन्य वीरों को उत्साहित करते हुए युद्ध करने की सलाह दे रहा है।

भावार्थ 4:

सैनिक अपने सथियों से कहता है कि तुम अपने खून से देश की सीमा- रेखा निश्चित कर दो। इस रेखा के इस तरफ़ कोई भी दुष्टात्मा न आ पाए। यदि सीता के समान पवित्र हमारी मातृ-भूमि भारत पर कोई रावण रूपी दुष्ट हाथ भी लगाए अर्थात कब्ज़ा करने की सोचे तो उसके हाथ तोड़ दो। अर्थात दुश्मन को अच्छा सबक दो। इस देश की रक्षा करने वाले राम भी तुम हो और लक्ष्मण भी तुम ही हो। अब यह देश तुम्हारे हवाले किया।

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प्रश्न अभ्यास

( )निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

प्रश्न 1 – क्या इस गीत की कोई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है ?

उत्तर – यह  गीत सन  1962 के भारत – चीन युद्ध की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर लिखा गया है। चीन ने भारत  पर आक्रमण किया और  भारतीय वीरों ने इसका बहदुरी से सामना  किया। युद्ध में अनेकों भारतीय सैनिकों ने अपने प्राण बलिदान कर दिए । इसी एतिहासिक युद्ध पर आधारित फ़िल्म ’ हकीकत’ के लिए यह गीत लिखा गया , जिसमें भार्तीय सैनिकों के मनोभाव को गीत के माध्यम से फ़िल्माया गया था ।तब से आज तक यह गीत देशवासियों के मन में देश प्रेम की अलख जगा रहा है ।

 प्रश्न 2 -: ‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’,इस पंक्ति में हिमालय किस बात का प्रतीक है ?

उत्तर – हिमालय भारत के मान –सम्मान और गौरव  का प्रतीक है। देश के वीर जवानों ने अपने प्राणों का बलिदान दे कर भी देश के मान सम्मान की रक्षा की है । उनके साहस , वीरता और बलिदान की अमर गाथाओं से आज भी हिमालय की पहाड़ियाँ गुंजायमान है ।

प्रश्न 3 -: इस गीत में धरती को दुल्हन क्यों कहा गया है ?

उत्तर – इस गीत में धरती को दुल्हन कहा गया है क्योंकि  जिस तरह से दुल्हन को लाल जोड़े में सजाया जाता है उसी तरह सैनिकों ने भी अपने प्राणों का बलिदान देकर धरती को खून से लाल कर दिया है  मानो धरती ने दुल्हन का लाल जोड़ा पहन लिया हो  अर्थात युद्ध भूमि सैनिकों के रक्त से लाल हो गई, इसीलिए धरती को दुल्हन कहा गया है।

प्रश्न 4 -: गीत में ऐसे क्या ख़ास बात होती है कि वे जीवन भर याद रह रह जाते हैं ?

उत्तर – गीत में भावनात्मकता ,संगीतात्मकता ,लयबद्धता ,  सच्चाई आदि गुण  होते हैं जिसके कारण वे जीवन भर याद रह जाते हैं। ‘कर चले हम फ़िदा ‘ गीत में देशभक्ति और बलिदान की भावना स्पष्ट दिखाई देती है जिससे ये गीत हर हिंदुस्तानी के दिमाग  में छप गया है।

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प्रश्न 5 -: कवि नेसाथियोंसम्बोधन का प्रयोग किसके लिए किया गया है ?     

उत्तर – कवि ने ‘साथियों’ शब्द का प्रयोग देशवासियों के लिए प्रयोग किया है।

प्रश्न 6 – कवि ने इस कविता में किस काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है ?

उत्तर – इस कविता में काफ़िले शब्द सैनिकों के समूह के लिए प्रयोग किया गया है ,सैनिक कहते हैं की यदि वे शहीद हो जाएँ तो सैनिकों के अनेक समूह तैयार होने चाहिए ताकि दुश्मन देश में ना घुस सके।

प्रश्न 7 -: इस गीत मेंसर पर कफ़न बाँधनाकिस ओर संकेत करता है?

उत्तर – ‘ सर पर कफ़न बाँधना ‘ का अर्थ है ‘ मौत के लिए तैयार होना। सैनिक अपने अंतिम पलों में देशवासियों को सर पर कफ़न बाँधने के लिए कहता है क्योंकि उसने देश की रक्षा में अपने प्राण त्याग दिए है और अब देश की रक्षा का भार देशवासियों पर है। सैनिक देश-वासियों को देश के लिए बलिदान देने के लिए तैयार रहने को  प्रेरित कर रहा  है ।

प्रश्न 8 – इस कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर – प्रस्तुत कविता में देश के सैनिकों की भावनाओं का वर्णन है।यह कविता उर्दू के सुप्रसिद्ध कवि कैफ़ी आज़मी द्वारा रचित है ।इस कविता में  कवि ने सीमा पर युद्ध लड़ते   सैनिक  के मनोभाव को व्यक्त किया है ।  सैनिक कहता है कि वह  कभी भी देश के मान-सम्मान को बचाने से पीछे नहीं हटेगा। फिर चाहे उसे अपनी जान से ही हाथ क्यों ना गवाना पड़े। सैनिक चाहता है की उसके बलिदान के बाद देश की रक्षा के लिए सैनिकों की कमी नहीं होनी चाहिए। दुश्मन कभी भी उसके द्वारा खींची गई खून की लक्ष्मण रेखा पार ना कर पाए इस उम्मीद से वो देश की रक्षा का भार देशवासियों पर छोड़ कर जा रहा है। सैनिक कहता है कि देश पर जान न्योछावर करने के मौके बहुत कम आते हैं। ये क्रम टूटना नहीं चाहिए।

() निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए

(1) साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई
    फिर भी बढ़ते कदम को न रुकने दिया

उत्तर – इन पंक्तियों में कवि ने भारतीय जवानों के साहस का वर्णन किया है। कवि कहता है कि भारत – चीन युद्ध के दौरान सैनिकों को गोलियाँ लगने के कारण उनकी साँसें रुकने वाली थी ,ठण्ड के कारण उनकी नाड़ियों में खून जम रहा था परन्तु उन्होंने किसी चीज़ की परवाह न करते हुए दुश्मनों का बहदुरी से मुकाबला किया और दुश्मनों को आगे नहीं बढ़ने दिया।

(2) खींच दो अपने खूँ से जमीं पर लकीर
   इस तरफ आने पाए न रावन कोई

उत्तर – इन पंक्तियों में सैनिक भारत की धरती को सीता की तरह पवित्र  मानता है और अपने साथियों से कहता है की अपने खून से लक्ष्मण रेखा खींच लो ताकि कोई दुश्मन रूपी रावण भारत के आँचल को छू  भी न सके।

(3) छू न पाए सीता का दामन कोई
   राम भी तुम, तुम्हीं लक्ष्मण साथियो

उत्तर – इन पंक्तियों में सैनिक देशवासियों से कहता है कि वो तो अपना कर्तव्य निभाता हुआ देश के लिए शहीद हो रहा है परन्तु उसके  बाद सीता अर्थात भारत की पवित्र  भूमि की रक्षा करने वाले राम और लक्ष्मण दोनों हम देशवासी  ही हैं ।   

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TATARA VAMIRO s तताँरा- वामीरो
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कारतूस
Grade X HIndi B Gadya Khand

                                                                 

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