MUHAVARO PAR KAVITA //मुहावरों पर कविता
जीवन में जो सिखना है वो मुहावरों से आसानी सीखा जा सकता है, उनका उपयोग हमारे भाषा कौशल को बढ़ा सकता है और हमें समस्याओं का सामना करने के लिए सहारा भी दे सकता है। इसलिए, हमें चाहिए कि हम बच्चों को मुहावरे सिखाएं और उनके महत्व को समझाएं, ताकि वे अपनी भाषा को समृद्ध कर सकें और सोचने का नया अवसर प्राप्त करें।

इसके अलावा, मुहावरे भाषा को रोचक बनाते हैं ;लेकिन कितना अच्छा हो कि मुहावरों पर ही कविता बनी हो । यहाँ पर बच्चों को नैतिक शिक्षा देते हुए कुछ दोहे गढ़े गए हैं । ये शिक्षाप्रद तो हैं ही , छात्रों को सिखाने के लिए एक अच्छी हिंदी गतिविधि भी साबित होंगे, ऐसा हमारा विश्वास है । आनंद लीजिए-
1.नाक हमारी इज़्ज़त है, इसे ना तुम कटवाना |
कभी ना ऐसे काम करो, जो मुहँ पड़े छिपाना ॥
2. आँखों का तारा बन जाओ, सबकी बनो चाहत ।
पर आँखों में धूल झोंकने की, ना अपनाओ आदत ॥
3.कान के कच्चे मत बनो, सोच-समझ कर काम करो।
अकल लगाओ अपनी, सब पर मत विश्वास करो ॥
4. आँख-कान खुले हुए, ज़ुबान पर लगाम हो।
हट जाएगी हर मुसीबत, मन में अगर ठान लो ॥
5. जो दूजे के पैरों पड़ते, वे खोते सम्मान।
अपने दम पर खड़े रहो, पाओ मुहावरों से ज्ञान ॥
मौलिक रचना : कवयित्री कुसुम लता जोशी
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