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जन्म के साथ ही बच्चे कुछ न कुछ आवाजें निकालने लगते हैं। ये ध्वनियाँ स्वाभाविक होती हैं। लेकिन जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं वे अपने देश, स्थान और बोली के अनुरूप बोलना सीखते हैं। इस प्रकार वे जिस भी स्थान की भाषा के संपर्क में आते हैं ;उसी भाषा को बोलना सीख जाते हैं।

भाषा सीखने के चार सोपान होते हैं-सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना। इसमें प्रथम दो मौखिक और बाद के दो लिखित होते हैं। उच्चरित ध्वनियों को लिख कर व्यक्त करने के लिए हमें कुछ चिह्न या निशानों की आवश्यकता होती है।प्रत्येक भाषा को लिख कर व्यक्त करने के लिए कुछ चिह्न निश्चित कर दिए जाते हैं। इन्ही लेखन चिह्न, या लिपि चिह्न को वर्ण कहते हैं ।

“भाषा की उच्चरित ध्वनियों के लिखित रूप को वर्ण कहते हैं। “

भाषा की उच्चरित ध्वनियों के लिखित रूप को वर्ण कहते हैं। वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई होते हैं। इनके और छोटे खंड नहीं किये जा सकते। हिंदी में मुख्यतः दो प्रकार के वर्ण होते हैं-स्वर और व्यंजन।

प्रत्येक शब्द वर्णों के सार्थक मेल से बनता है। वर्ण को ही अक्षर भी कहा जाता है।

प्रत्येक भाषा की अलग लेखन व्यवस्था होती है। उसके पास विभिन्न ध्वनियों को प्रकट करने के लिए अलग-अलग चिह्न होते हैं। इन चिह्नों के संयोजन की व्यवस्था को ही वर्णमाला कहा जाता है। हिंदी भाषा की लिपि देवनागरी है। इसी देवनागरी लिपि में संस्कृत भी लिखी जाती है। देवनागरी की लिपि अत्यंत सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक है। इसमें शब्दों को उनके बोलने के स्थान , घात आति पर सुव्यवस्थित कर क्रमबद्ध लिखा गया है।

परिभाषा के रूप में कह सकते हैं कि-

वर्णों की निश्चित और क्रमबद्ध व्यवस्था को ही वर्णमाला कहते हैं।

हिंदी की वर्णमाला में मुख्य रूप से कुल 11 स्वर, दो अयोगवाह , और तैंतीस व्यंजन हैं।

स्वर

स्वर स्वतंत्र रूप से बोले जाते हैं जबकि व्यंजन स्वरों के सहारे बोले जाते हैं। स्वर मूल ध्वनियाँ होती हैं।

व्यंजन

व्यंजन किसी स्वर के सहयोग से बोले जाते हैं जब व्यंजन बिना किसी स्वर के लिखे जाएं तो हलंत का प्रयोग किया जाता है। जब किसी व्यंजन को बिना स्वर के लिखा जाता है तो उसे हलंत से प्रकट करते हैं , जैसे -क्, ख् , ग् , घ् आदि ।

क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज ,झ, ञ, ट, ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म, य, र, ल, व, श, ष, स, ह

जैसा कि ऊपर बताया जा चुका है कि देवनागरी लिपि की वर्णमाला अत्यंत सुविकसित और सुव्यवस्थित है। फिर भी इसमें कुछ संसोधन किए गए हैं। इसका कारण यह है कि हिंदी अब जन संपर्क की भाषा, राजभाषा, राष्ट्रभाषा, और साहित्यिक भाषा के रूप में बड़ी तेज़ी से आगे बढ़ रही है। इसलिए इसके टंकण की सुविधा को देखते हुए इसमें कुछ बदलाव की आवश्यकता महसूस की जा रही है। हिंदी टाइपिंग को मोबाइल, लैपटॉप, कंप्युटर में बढ़ते प्रयोग को देखते हुए इसे सुलभ बनाया जा रहा है। समय की आवश्यकता को देखते हुए इसमें कुछ अन्य ध्वनियाँ भी जोड़ी गईं हैं जो इस प्रकार हैं –

विशेष व्यंजन- ड़, ढ़(उत्क्षिप्त व्यंजन )

संयुक्त व्यंजन- क्ष, त्र, ज्ञ, श्र,

आगत ध्वनियाँ- ऑ, क़, ख़, ग़, फ़, ज़,

यहाँ हिंदी वर्णमाला से जुड़े कुछ प्रश्न दिए गए हैं-

1.हिंदी में कुल कितने स्वर होते हैं?
उत्तर: 11 स्वर

2.अं और अः किस नाम से जाने जाते हैं?
उत्तर: अयोगवाह

3.हिंदी के स्वर कौन-कौन से हैं?
उत्तर: अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः

4.व्यंजन कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: हिंदी में कुल 39 व्यंजन होते हैं।

5.हलंत का क्या उपयोग है?
उत्तर: व्यंजन के बिना स्वर को लिखने के लिए हलंत का प्रयोग करते हैं ।

6.‘क्ष’ किस प्रकार का वर्ण है?
उत्तर: ‘क्ष’ संयुक्त व्यंजन है।

7.हिंदी वर्णमाला का पहला और अंतिम स्वर कौन सा है?
उत्तर: पहला स्वर ‘अ’ और अंतिम स्वर ‘अः’ है।

8.व्यंजन कितने वर्गों में विभाजित होते हैं?
उत्तर: व्यंजन पाँच वर्गों में विभाजित होते हैं।

9.संयुक्त अक्षर किसे कहते हैं?
उत्तर: दो या दो से अधिक व्यंजनों के मेल से बने अक्षर को संयुक्त अक्षर कहते हैं, जैसे ‘त्र’, ‘ज्ञ’, ‘श्र’।

10.उत्क्षिप्त व्यंजन लिखिए?
उत्तर: ड़,ढ़

11.ऊष्म व्यंजन किसे कहते हैं?
उत्तर:श, ष, स ह

12.हिंदी में किस लिपि का प्रयोग होता है?
उत्तर:देवनागरी लिपि का

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