बिखरते परिवार: क्या है कारण?

परिवार समाज की मूल भूत इकाई है। किसी समाज की स्थिरता , सुदृढ़ता उस समाज के परिवारों की भौतिक , सामाजिक आर्थिक स्थिति पर निर्भर करती हैं । भारतीय परिवार अपनी सुदृढ़ता और मज़बूती के लिए जाने जाते रहे हैं । आज भी विदेशों में भारतीय परिवारों की मज़बूती और एकता के उदाहरण दिए जाते हैं। किंतु समय के प्रभाव से भारतीय परिवार भी अछूते नहीं रह गए हैं । बीते वर्षों में तलाक दर में बढ़त दर्ज़ हुई है । वैश्विक उदारीकरण से पहले भारत में तलाक दर मात्र0.5 प्रतिशत थी जो कि 2019 में उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार अब 1.3 प्रतिशत हो गई है। हालाँकि यूरोप और अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों की 30 प्रतिशत तलाक दर के सामने यह बहुत न्यून लगती है किंतु भारत जैसे देश में जहाँ परिवार का विशेष महत्व रहा है तलाक दर बढ़ना चिंता का विषय है।

बिखरते परिवार: क्या है कारण?

किसी परिवार के टूटने और बिखरने के दो मुख्य कारण हैं : दम्पति में से किई एक की मृत्यु या तलाक । मृत्यु एक दैवीय कारण माना जा सकता है अर्थात एक ऐसा कारण जो हमारे अधिकार अथवा हाथ में न हो। लेकिन तलाक जैसी समस्याएँ अभी हाल में ही तेज़ी से सामने आई हैं। भरत में तलाक या परित्यक्त जीवन को ज्यादा अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता था। अधिकांश मामलों में इसे स्त्री की गलती करार कर दिया जाता था । बदलते समय में परिस्थियाँ बदली हैं और लोगों के सोचने का तरीका भी बदला है । समाज में इस बात को स्वीकारा जाने लगा है कि परिवार की एकता बनाए रखना पति-पत्नी दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है।

यहाँ पर उन कारणों पर चर्चा की गई है जो तलाक होने के कारण हो सकते हैं :

अहंकार का टकराव :

भारत में पुरुषों का पालन पोषण ही इस प्रकार से किया जाता है कि उनके अंदर पुरुष होने , अपनी बात ऊपर रखी जाने की प्रवृत्ति , स्त्री से न दबने या की भावना पलने लगती है। अतः वे शुरु से ही अहंकार की भावना ले कर बड़े होते हैं । उनके भीतर अन्य दूसरे प्रकार के अहंकार भी शामिल हो सकते हैं मसलन – अधिक धन कमाना, शारीरिक सौष्ठव , स्त्री का पुरुष पर आश्रित होना, परिवार का पालन -पोषण करने के कारण अधिकार की भावना रखना आदि। किंतु आज की स्त्री चौदहवी सदी की दबाई कुचली हुई स्त्री नहीं है । आजकल एकल परिवारों में स्त्रियों को भी बचपन से ही समान अधिकार दिए जाते हैं और समान शिक्षा दी जाती है और योग्य बनाया जाता है । ऐसी परिस्तिथियों पति-पत्नी दोनों के अहंकार टकरा सकते हैं । कई बार ऐसी स्थिति आ जाती हैं कि दोनों एक दूसरे का समान सह-अस्तित्व स्वीकार ही नहीं कर पाते और तलाक की स्थिति आ जाती है।

गहरी कड़वाहट और हिंसा:

कई बार पति-पत्नी सामाजिक दबाव या पारिवारिक दबाव के कारण भी साथ रह रहे होते हैं । बच्चे भी साथ रहने का एक कारण हो सकते हैं किंतु उनके विचारों में सकारात्मकता नहीं होती। उनके आपसी संबंधों में इतनी गहरी कड़वाहट घुस चुकी होती है कि वे हिंसा या मार-पीट करने से भी पीछे नहीं हटते। यहाँ पर स्पष्ट करना उचित रहेगा कि हिंसा , मार-पीट सदैव शक्तिशाली के द्वारा कमजोर पर की जाती है। इसी कारण अकसर परिवार के कमजोर सदस्यों को इस हिंसा का शिकार होना पड़ता है इसमें बच्चे भी मार-पीट और अत्याचार का शिकार बनते हैं । कुछ लोग अकसर मार-पीट करने की आदत वाले हो जाते हैं वहीं दूसरी तरफ़ कई बार दंपत्ति में से एक स्वभाव से ही आक्रामक और गुस्सैला हो सकता है। इन्हीं कारणों के होने से भी तलाक की नौबत आ जाती है और यही विकल्प बचता है कि अलग रह कर ऐसे कटु संबंध को खत्म कर दिया जाए।

नशे की आदत :

नशे की आदत रखने वाले युवक -युवतियाँ अपने परिवार की ओर ध्यान नहीं दे पाते। भारत में पिछले कुछ वर्षों में शराब पीने का और दूसरे अन्य ड्रग लेने का प्रचलन बढ़ा है । नशे की आदत वाले लोग अपने कार्य भी ठीक से नहीं कर पाते और नशे पर होने वाले दैनिक खर्च के कारण परिवार वित्तीय समस्याओं से घिर जाता है। जिससे परिवार मुश्किल में पड़ जाता है। धन के अभाव में ये नशेड़ी घर का साजो-सामान बेचने लगते हैं अथवा आक्रामक हो सकते हैं अथवा अवैध धंधों से जुड़ जाते हैं । इन सब परिस्थितियों का परिवार पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। परिवार में आंतरिक कलह बढ़ती है और परिवार बिखर जाता है ।

शक की प्रवृत्ति :

कुछ लोग अविश्वासी प्रवृत्ति के होते हैं । वे अपने जीवन साथी पर भरोसा नहीं कर पाते। हमेशा वे इस संशय से घिरे रहते हैं कि उनका पार्टनर किसी दूसरे को पसंद करता/ करती है । वे उन पर झूठे आरोप लगाते हैं । उन पर सदैव नज़र रखते हैं । उनकी इस प्रकार की सोच व हरकतों से परेशान होकर उनका साथी तलाक ले कर आज़ाद हो जाने में ही भलाई समझता है।

यौन संबंधों के प्रति अरुचि :

यह एक सच्चाई है कि पति-पत्नी के सुखपूर्ण जीवन में यौन संबंधों का भी विशेष महत्त्व है । किंतु यदि एक साथी यौन संबंधों के इच्छुक न हो , अरुचि प्रकट करे या निराशाजनक प्रदर्शन करे तो दूसरा साथी अपमानित और अतृप्त महसूस कर सकता है। इस तरह यौन संबंधों के प्रति उदासीनता भी तलाक का एक कारण है।

अभद्र भाषा का प्रयोग :

भारतीय समाज में एक दूसरे के प्रति सम्मान व आदर की भाषा का प्रयोग हमारे संस्कार का प्रतीक माना जाता है। लेकिन कुछ लोग अपने साथी को आदर देने और उस से सम्मान पूर्वक बोलने की आवश्यकता नहीं समझते। कुछ लोग बात-बात में गाली-गलौच या अभद्र शब्दों का प्रयोग करते हैं जो उनके जीवन साथी को अपमानजनक व असहनीय लगता है। यह भी अलगाव का कारण बन सकता है।

विवाहेत्तर संबंध होना:

भारतीय समाज में एक विवाह का ही सम्मान होता है । बहु विवाह की प्रथा सिर्फ़ आदिवासियों तक ही है। विवाहेत्तर संबंध घृणित समझे जाते हैं । ऐसे में यदि दंपत्ति में से किसी एक के भी विवाहेत्तर संबंध हों तो अधिकांशतया इसे अक्षम्य अपराध समझा जाता है और विपरीत पक्ष तलाक ले कर अलग हो जाता है।

स्त्रियों का शिक्षित और आत्म निर्भर होना:

भारतीय समाज में परिवार की मजबूत स्थिति इस लिए भी थी कि स्त्रियों को शिक्षा न थी । वे पूरी तरह पति पर आश्रित होती थीं। ऐसे में किसी प्रकार की समस्या आने पर भी पति के साथ रहना उनकी मजबूरी होती थी । इसके अतिरिक्त स्त्रियों का बाहर जाना , नौकरी करना और आत्म-निर्भर होना अच्छा नहीं माना जाता था। पिछले दो दशकों में स्थिति परिवर्तित हुई है। स्त्री शिक्षा और आत्म- निर्भरता के कारण समाज में महिलाओं की स्थिति बदली है । आज की महिला आत्मविश्वासी है । आज महिला अपने पति को परमेश्वर मान कर और स्वयं उसकी चेरी बने रहने से संतुष्ट नहीं है । वह हर क्षेत्र में पुरुष के कंधे से कंधा मिला कर चल रही है। आधुनिक नारी पति को स्वामी न मान कर जीवन- साथी के रूप में देखती है और तदनुरूप व्यवहार चाहती है । जब ऐसा नहीं होता तो वैचारिक टकराव उत्पन्न होता है और परिवार बिखर जाता है।

अव्यवहारिक व असामाजिक प्रवृत्ति ;

समाज में न तो सनब लोग एक से हैं और न उनके व्यवहार समान हैं। कुछ लोग समाज से हिल मिल नहीम पाते । एकल या अंतर्मुखी होते हैं। ऐसे लोग समाज में सही ताल-मेल नहीं बैठा पाते।

कुछ लोग असामाजिक प्रवृत्ति के होते हैं । वे समाज विरुद्ध कार्य करते हैं । ऐसे लोगों से परिवार के अन्य लोगों को विशेषकर बच्चों को इनके प्रभाव से बचाना जरूरी होता है अतः तलाक जरूरी हो जाता है ।

पारिवारिक सदस्यों का अत्यधिक हस्तक्षेप :

भारतीय परिवारों में पितृ सत्तात्मकता रही है । विवाह के बाद नव दंपत्ति पति के माता-पिता के साथ ही रहते हैं । ऐसे में अधिक एडजस्टमेंट स्त्री को ही करना होता है। लेकिन कई बार देखा जाता है कि पति पत्नी के आपसी संबंधों में परिवार के अन्य लोगों का अत्यधिक हस्तक्षेप होता है। वे लोग उनके हर निर्णय में अपनी टाँग घुसाते हैं । दंपत्ति को साथ रहने , अकेले घूमने -फ़िरने के अवसर ही नहीं मिलते क्योंकि घर के लोग सदा साथ बने रहते हैं और उन्हें एक स्वस्थ संबंध बनाने का अवसर नहीं देते। परिवार के सदस्यों द्वारा पति- पत्नी को एक दूसरे के विरुद्ध भड़काया जाता है । कई बार कन्या पक्ष का भी बेटी की घर गृहस्थी‍ मे हस्तक्षेप रहता है जिस से उनके परिवारों मे कड़वाहट आ जाती है । इसका सीधा प्रभाव दंपत्ति के ऊपर पड़ता है और वे अलग हो जाते हैं और परिवार टूटने लगते हैं।

ये कुछ सामान्य कारण हैं जिससे वर्तमान समय में विवाह टूट रहे हैं और परिवार बिखर रहे हैं । एक विवाह टूटने के अन्य भी दूसरे अनेक कारक होते हैं उन सभी का मिला-जुला प्रभाव हमारे मन-मष्तिस्क में पड़ता है और बाद में उसका असर हमारे व्यवहार में भी प्रकट होने लगता है। अगर आपको भी अपने जीवन में ऐसी कुछ समस्याएँ दिख रही हैं तो तुरंत उन सम्स्याओं को दूर करने के उपाय ढूँढ निकालिए।

3 responses to “बिखरते परिवार : क्या है कारण?”

  1. आदरणीय सुश्री कुसुम जोशी, आपके भावपूर्ण आलेख में परिवार में नारी के समायोजन की समस्याओं का गंभीरता से विवेचन किया गया है । आपके विचार संतुलित और सटीक है । मैंने भी पारिवारिक संबंधों में विश्वास पर ‘schoolvalueswordpress.com पर ब्लांक लिखा है । वैसे इस साइट पर मैं अपनी अंग्रेज़ी में लिखी पुस्तक ‘Values and School Practices’ के टॉपिकों का एक के बाद एक करके हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ परन्तु यह आलेख अलग है ।

  2. Dear Kusum Joshi, I’m retired Asstt.Director, Navodaya Vidyalaya Samiti, Bhopal region since 2002. I was principal JNV, Damoh and Principal/Lecturer in Higher Secondary Schools of tribal area of M.P. for 26 years. I have noted my comments yesterday. Now I’m in U.S.A. as P.R. but my residence is in Bhopal.

    1. Thank you sir you for liking, commenting and following my blog. It’s great to know that you were associated with education department and served in such prestigious position . Your comments and suggestions are always welcome .

Leave a Reply

Trending

Discover more from HindiFlorets.com

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading