हिंदी को बना लो अपना: कविता “

हिंदी है वह भाषा, जो मिटा दे हर मतभेद

दिलों को जोड़ कर हिंदी कर देती हैं एक

राष्ट्रभाषा हमारी, बापू का सुनहरा सपना

छोड़ो दिलों की दूरी, हिंदी को बना लो अपना।

आओ मिलकर हम सब, गीत प्रेम के गाएं

बावन अक्षर की कंठी-माला को गले लगाएँ।

ग्यारह स्वरों के मनके व्यंजनों के संग मिलाएँ।

देववाणी की बेटी, हिंदी है गीत सुहाना।

छोड़ो दिलों की दूरी, हिंदी को बना लो अपना।

हिंदुस्तान से हटकर क्या पहचान हमारी?

यह देश हमारा गौरव , हर भाषा हमको प्यारी।

आगे बढ़े मिल-जुलकर,यह उम्मीद हमारी।

संस्कृति की संवाहक हिंदी है हमारा गहना ।

छोड़ो दिलों की दूरी, हिंदी को बना लो अपना।

मौलिक रचना :कवयित्री कुसुम लता जोशी

Leave a Reply

Trending

Discover more from HindiFlorets.com

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading