आज का सुविचार
आज का सुविचार 06/10/2024
प्रेम एक ऐसी भावना है, जो दुनिया को एकजुट करती है और सभी में करुणा जगाती है।पारस्परिक प्रेम पर समाज की नींव टिकी है ।”

दोस्तो! प्रेम एक ऐसी शक्ति है, जो लोगों को भावनात्मक रूप से एकजुट करती है और उनके दिलों में करुणा और सहानुभूति की भावना पैदा करती है। यह केवल व्यक्तिगत रिश्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर पहलू में इसकी गहराई से आवश्यकता होती है। पारस्परिक प्रेम पर समाज की नींव टिकी होती है, क्योंकि यह विश्वास, सहयोग और सामंजस्य को बढ़ावा देता है।
परिवार समाज की सबसे छोटी इकाई है, और इसे एकजुट रखने का आधार प्रेम ही है। जब परिवार के सदस्य एक-दूसरे से प्रेम और सम्मान के साथ पेश आते हैं, तो घर में सुख, शांति और सामंजस्य बना रहता है। एक माँ-बाप का अपने बच्चों के प्रति प्रेम उन्हें बेहतर संस्कार, शिक्षा और समर्थन प्रदान करता है, जिससे बच्चे एक मजबूत व्यक्तित्व के साथ समाज का हिस्सा बनते हैं। इसी तरह, भाई-बहन और दांपत्य जीवन में प्रेम परिवार का ढांचा सुदृढ़ करता है। अगर परिवार में प्रेम की कमी हो, तो टकराव, तनाव और बिखराव की स्थिति पैदा होती है, जो समाज पर नकारात्मक असर डालता है। इसी प्रकार, बड़े पैमाने पर, समुदाय और राष्ट्र के स्तर पर भी प्रेम और सहानुभूति की भावना महत्वपूर्ण होती है। जब समाज के लोग एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सहानुभूति रखते हैं, तो आपसी संघर्ष कम होते हैं और सामंजस्यपूर्ण वातावरण का निर्माण होता है।
सामान्यतौर पर लोग समान भाषा-बोली, संस्कृति, धर्म अथवा राष्ट्र के कारण के दूसरे के प्रति अपनापन और एकत्व महसूस करते हैं। लेकिन प्रेम की भावना लोगों के बीच भेदभाव और विभाजन को मिटाने में सहायक होती है। जाति, धर्म, भाषा, और संस्कृति जैसे भेदभाव प्रेम के सामने नगण्य हो जाते हैं। प्रेम इंसान को सिखाता है कि हम सभी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और हर किसी का कल्याण हम सभी के कल्याण से जुड़ा हुआ है। महाकवि मैथिलीशरण गुप्त अपनी कविता मनुष्यता में प्रेम का संदेश देते हुए कहते हैं-
परस्परावलंब से उठो तथा बढ़ो सभी,
अभी अमर्त्य-अंक में अपंक हो चढ़ो सभी ।
रहो न यों कि एक से न काम और का सरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।
महाकवि मैथिलीशरण गुप्त
भारत ने सदैव विश्वबंधुत्व का संदेश दिया है । न सिर्फ़ मनुष्य मात्र, अपितु प्राणी मात्र के प्रति प्रेम का संदेश देते हुए भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम् का नारा बुलंद किया है।
जिस समाज में प्रेम की कमी होती है, तो वहाँ स्वार्थ, घृणा और विभाजन का वास होता है । लोग आपसी संघर्ष में ही उलझे रह जाते हैं। जिससे अंततः समाज की प्रगति रुक जाती है। वहीं, प्रेम हमें एकजुट करके एक शक्तिशाली और स्थिर समाज का निर्माण करता है। प्रेम की शक्ति से तो सिंह, चीता, हाथी जैसे बलवान और खतरनाक वन्य जीव भी वश में हो जाते हैं ।इस प्रकार, प्रेम न केवल एक भावना , बल्कि समाज की आधारशिला है, जिस पर टिककर सामाजिक ताना-बाना बुना जाता है। यह सभी सामाजिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंधों को सशक्त और टिकाऊ बनाता है। हम सभी को प्रेम और आत्मीयता से एक सुंदर परिवार, समाज , राष्ट्र और विश्व का निर्माण करने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।
हमें उम्मीद है कि आज का सुविचार आपके जीवन में एक सकारात्मक परिवर्तन लाएगा।
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