अक्ल की जरूरत किसे नहीं होती? अक्ल सदा से महत्त्वपूर्ण मानी जाती रही। इसलिए हिंदी भाषा में भी अक्ल से संबंधित अनेक मुहावरे प्रचलन में आए। अक्ल पर आधारित मुहावरे अक्सर बोलचाल की भाषा में बहुत प्रयोग होते हैं । अक्ल पर आधारित मुहावरे व्यक्ति की मानसिक स्थिति को तो प्रकट करते ही हैं , कई बार ये उसकी बुद्धि मानी या मूर्खता के भी बारे में बताते हैं । कभी -कभी इनका प्रयोग हास -परिहास- उपहास आदि में भी किया जाता है । यहाँ पर अक्ल पर आधारित मुहावरों के अर्थ के साथ ही उनके वाक्य प्रयोग भी दिए गए हैं , जिससे मुहावरों के सही अर्थ प्रकट हों और बोल-चाल , व्यवहार में उनका उपयोग करना आसान हो।
मुहावरों का प्रयोग इतना व्यापक है कि हर तरह के मुहावरे आपको बोलचाल की भाषा में मिल जाते हैं । यहां पर उन मुहावरों का संकलन किया गया है जिनमें “अक्ल ” शब्द का इस्तेमाल किया गया है ।
१. अक्ल का अंधा: (मूर्ख होना ) वह लड़का तो अक्ल का अंधा निकला। उसे कितना भी समझाओ, वह कुछ समझता ही नहीं है।

२अक्ल बड़ी की भैंस:( बुद्धि शरीर से अधिक श्रेष्ठ है) उस पतले दुबले आदमी ने अपनी बुद्धि के दम पर एक पहलवान को हरा दिया। इसी लिए तो कहते हैं कि अक्ल बड़ी या भैंस!
३.अक्ल घास चरने जाना:( मति भ्रम होना /, बुद्धि भ्रष्ट होना) जब फैसले का वक्त था तब तो तुम कुछ नहीं बोले। उस वक्त तुम्हारी अक्ल क्या घास चरने चली गई थी? अब रोने से क्या लाभ!

४.अक्ल के घोड़े दौड़ाना:( तरह तरह से विचार करना) नौकरी छूटने पर मदन पैसा कमाने के लिए अपने अक्ल के घोड़े दौड़ाने लगा।
५.अक्ल पर पत्थर पड़ना:( बुद्धि नष्ट हो जाना/ बुद्धि का काम न करना) तुम तो मुझे समझा ही रहे थे कि सट्टा बाजार पर पैसा न लगाऊं किंतु मेरी ही बुद्धि पर पत्थर पड़ गए थे कि मैं अपना भला बुरा समझ न सका।
६.अक्ल के पीछे लट्ठ लेकर भागना:( लगातार मूर्खता पूर्ण कार्य करना ) जब तुम स्वयं ही अक्ल के पीछे लट्ठ लेकर भाग रहे हो तो तुम्हारी मदद भगवान भी नहीं कर सकते।

७.अक्ल का दुश्मन:( मूर्ख) अरे अक्ल के दुश्मन! कभी तो ढंग का काम कर लिया करो।
८. अक्ल लगाना : (युक्ति लगाना/ तरकीब लगाना) जब अनेक वैज्ञानिकों ने अपनी अक्ल लगाई ,तब जाकर आज हम ऑनलाइन शिक्षा लेने में सक्षम हो सके हैं।
९. अक्ल ठिकाने लगाना:(किसी को उसके गलत करने पर सजा देना) मुझसे पंगा लिया तो अभी अक्ल ठिकाने लगा दुंगा।
१०. अक्ल चकराना:( कुछ भी समझ न आना) अचानक सामने दुर्घटना होने पर मेरी तो अक्ल ही चकराने लगी । समझ ही नहीं आया कि क्या करूं।
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११. अक्ल पर पर्दा पड़ना:( सही गलत समझने की क्षमता खो देना) बेटे की गलती होने पर भी मां उसे गलत नहीं ठहरा रही थी । पुत्र प्रेम के कारण उसकी अक्ल पर पर्दा पड़ गया था।
१२.अक्ल का पुतला:( बहुत अधिक बुद्धिमान) अरे अक्ल के पुतले ! कभी कभी दूसरों की राय भी सुन लिया करो।
१३. अक्ल मारी जाना: (समय पर बुद्धि का ठीक से काम न करना ) बुरे वक्त में अक्ल भी मारी जाती है।
१४. अक्ल खर्च करना:( बुद्धि को काम पर लगाना) हर समस्या का कुछ न कुछ हल होता है उसके लिए थोड़ी अक्ल भी खर्च करनी होती है।
१५. अक्ल सठिया जाना (बुढ़ापे के कारण बुद्धि का ह्रास) पिताजी अब किसी की कोई बात सुनते और समझते ही नहीं। बस अपने मन की करते हैं। उनकी अक्ल ही सठिया गई है।




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