कलम, आज उनकी जय बोल – कविता का अर्थ, भावार्थ एवं व्याख्या | रामधारी सिंह ‘दिनकर’

“कलम, आज उनकी जय बोल” राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की एक अत्यंत ओजपूर्ण और प्रेरणादायक कविता है। इस कविता में कवि अपनी लेखनी (कलम) को आदेश देते हैं कि वह उन अमर वीरों का यशगान करे, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। यह कविता हमें देशभक्ति, त्याग, बलिदान और राष्ट्रप्रेम की भावना से ओत-प्रोत कर देती है।
कविता
काव्यांश 1
जला अस्थियाँ बारी-बारी,
चिटकाई जिनमें चिंगारी,
जो चढ़ गए पुण्यवेदी पर
लिए बिना गर्दन का मोल।
कलम, आज उनकी जय बोल॥
भावार्थ
कवि कहते हैं कि उन वीरों की हड्डियाँ भी देशप्रेम की अग्नि से तपकर मानो चिंगारियाँ बन गई थीं। वे बिना किसी पुरस्कार, सम्मान या अपने जीवन का मूल्य माँगे राष्ट्ररूपी यज्ञ की पवित्र वेदी पर हँसते-हँसते बलिदान हो गए। ऐसे अमर शहीदों की वीरता और त्याग का गुणगान करना ही हमारी लेखनी का सबसे बड़ा कर्तव्य है।
काव्यांश 2
जो अगणित लघु दीप हमारे
तूफानों में एक किनारे,
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन
माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल।
कलम, आज उनकी जय बोल॥
भावार्थ
कवि स्वतंत्रता सेनानियों की तुलना छोटे-छोटे दीपकों से करते हैं। जैसे दीपक स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है, वैसे ही असंख्य वीर देश की रक्षा के लिए अपना जीवन अर्पित कर गए। उन्होंने कभी अपने त्याग के बदले सम्मान या पुरस्कार की इच्छा नहीं की। उनका जीवन निस्वार्थ सेवा और बलिदान का आदर्श है।
काव्यांश 3
पीकर जिनकी लाल शिखाएँ
उगल रही सौ लपट दिशाएँ,
जिनके सिंहनाद से सहमी
धरती रही अभी तक डोल।
कलम, आज उनकी जय बोल॥
भावार्थ
यहाँ कवि शहीदों के अदम्य साहस और पराक्रम का वर्णन करते हैं। उनके बलिदान की अग्नि आज भी देशवासियों के हृदय में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्ज्वलित करती है। उनके साहसपूर्ण उद्घोष और वीरता से शत्रु भयभीत हो उठते थे। उनका तेज और पराक्रम आज भी इतिहास में अमिट है।
काव्यांश 4
अंधा चकाचौंध का मारा
क्या जाने इतिहास बेचारा,
साखी हैं उनकी महिमा के
सूर्य, चन्द्र, भूगोल, खगोल।
कलम, आज उनकी जय बोल॥
भावार्थ
कवि कहते हैं कि आज का भौतिक सुख-सुविधाओं में डूबा हुआ मनुष्य शायद इन महान बलिदानों का सही मूल्य न समझ पाए। किंतु प्रकृति स्वयं—सूर्य, चन्द्रमा, पृथ्वी और समूचा ब्रह्मांड—इन वीरों की महानता के साक्षी हैं। उनका यश और कीर्ति सदा अमर रहेंगे।
समग्र भावार्थ
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ इस कविता के माध्यम से अपनी कलम को आदेश देते हैं कि वह उन महान स्वतंत्रता सेनानियों का यशगान करे, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ, पुरस्कार या सम्मान की इच्छा के मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। कवि उनके त्याग, साहस, राष्ट्रप्रेम और निस्वार्थ सेवा को अमर बताते हैं। वे कहते हैं कि ऐसे वीरों का बलिदान केवल इतिहास की घटना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अमिट स्रोत है। यह कविता हमें अपने देश के प्रति प्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की शिक्षा देती है।
कविता का संदेश
- देश के लिए किया गया निस्वार्थ त्याग कभी व्यर्थ नहीं जाता।
- सच्चे वीर सम्मान या पुरस्कार की अपेक्षा नहीं करते।
- शहीदों का बलिदान सदैव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
- हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति कृतज्ञ रहकर राष्ट्रहित में अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
कलम आज उनकी जय बोल–कविता
जला अस्थियाँ बारी-बारी,
चिटकाई जिनमें चिंगारी,
जो चढ़ गए पुण्यवेदी पर
लिए बिना गर्दन का मोल।
कलम, आज उनकी जय बोल॥
जो अगणित लघु दीप हमारे
तूफानों में एक किनारे,
जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन
माँगा नहीं स्नेह मुँह खोल।
कलम, आज उनकी जय बोल॥
पीकर जिनकी लाल शिखाएँ
उगल रही सौ लपट दिशाएँ,
जिनके सिंहनाद से सहमी
धरती रही अभी तक डोल।
कलम, आज उनकी जय बोल॥
अंधा चकाचौंध का मारा
क्या जाने इतिहास बेचारा,
साखी हैं उनकी महिमा के
सूर्य, चन्द्र, भूगोल, खगोल।
कलम, आज उनकी जय बोल॥



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