समास : परिभाषा, भेद, उदाहरण और पहचानने की सरल विधि
समास हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण विषय है। समास की सहायता से हम कई शब्दों को कम शब्दों में व्यक्त कर सकते हैं। इससे भाषा संक्षिप्त, सुंदर और प्रभावशाली बनती है।
इस लेख में हम समास की परिभाषा, उसके भेद, विग्रह, प्रत्येक समास के 10-10 उदाहरण और उन्हें पहचानने की सरल विधि सीखेंगे।

समास क्या है?
जब दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया और सार्थक शब्द बनाते हैं, तो उस प्रक्रिया को समास कहते हैं।
उदाहरण :
राजा का पुत्र → राजपुत्र
यहाँ राजा का पुत्र दो शब्दों का समूह है, जिसे एक शब्द राजपुत्र में बदल दिया गया है।
इसी प्रकार—
माता और पिता → माता-पिता
नीला कमल → नीलकमल
प्रतिदिन → प्रत्येक दिन
इस प्रकार कम शब्दों में अधिक अर्थ व्यक्त करना समास की विशेषता है।
समास-विग्रह क्या है?
समास से बने हुए शब्द को अलग-अलग करके उसका पूरा अर्थ बताना समास-विग्रह कहलाता है।
उदाहरण :
राजपुत्र → राजा का पुत्र
नीलकमल → नीला कमल
माता-पिता → माता और पिता
यथाशक्ति → शक्ति के अनुसार
याद रखें—
समस्त पद → समास से बना हुआ शब्द
विग्रह → समस्त पद को खोलकर उसका अर्थ बताना
समास के मुख्य भेद
हिंदी व्याकरण में सामान्यतः समास के छह प्रमुख भेद बताए जाते हैं—
- अव्ययीभाव समास
- तत्पुरुष समास
- कर्मधारय समास
- द्वंद्व समास
- द्विगु समास
- बहुव्रीहि समास
अब प्रत्येक को बहुत सरल तरीके से समझते हैं।
1. अव्ययीभाव समास
जिस समास में पहला पद अव्यय होता है और वही पूरे समस्त पद का प्रधान होता है, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं।
अव्यय वे शब्द होते हैं जिनके रूप में लिंग, वचन आदि के कारण परिवर्तन नहीं होता।
अव्ययीभाव समास में अक्सर यथा, प्रति, आ, भर, सह आदि शब्द मिलते हैं।
पहचानने की सरल विधि
यदि समस्त पद का पहला शब्द अव्यय है और पूरा शब्द उसी के अर्थ को प्रधानता देता है, तो वह प्रायः अव्ययीभाव समास होता है।
अव्ययीभाव समास के 10 उदाहरण
| क्रम | समस्त पद | विग्रह |
|---|---|---|
| 1 | यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार |
| 2 | यथासंभव | जितना संभव हो |
| 3 | प्रतिदिन | प्रत्येक दिन |
| 4 | प्रतिवर्ष | प्रत्येक वर्ष |
| 5 | आजीवन | जीवन भर |
| 6 | आमरण | मृत्यु तक |
| 7 | यथाक्रम | क्रम के अनुसार |
| 8 | सपरिवार | परिवार सहित |
| 9 | सहर्ष | हर्ष के साथ |
| 10 | भरपेट | पेट भरकर |
उदाहरण से समझें
प्रतिदिन = प्रति + दिन
अर्थ = प्रत्येक दिन
यथाशक्ति = यथा + शक्ति
अर्थ = शक्ति के अनुसार
इसलिए ये अव्ययीभाव समास हैं।
2. तत्पुरुष समास
जिस समास में दूसरा पद प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच का, के, की, को, से, के लिए, में, पर आदि कारक-चिह्नों का संबंध होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।
उदाहरण
राजपुत्र → राजा का पुत्र
यहाँ ‘का’ का लोप हो गया है।
इसलिए—
राजा का पुत्र → राजपुत्र
तत्पुरुष समास के 10 उदाहरण
| क्रम | समस्त पद | विग्रह |
|---|---|---|
| 1 | राजपुत्र | राजा का पुत्र |
| 2 | जलपान | जल का पान |
| 3 | देवपूजा | देव की पूजा |
| 4 | गृहकार्य | गृह का कार्य |
| 5 | वनवास | वन में वास |
| 6 | ग्रामवास | ग्राम में वास |
| 7 | विद्यालय | विद्या का आलय |
| 8 | ऋणमुक्त | ऋण से मुक्त |
| 9 | हस्तलिखित | हाथ से लिखित |
| 10 | देशभक्ति | देश के प्रति भक्ति |
तत्पुरुष को पहचानने की ट्रिक
समस्त पद के बीच में का, के, की, को, से, में, पर, के लिए आदि लगाकर देखें।
उदाहरण :
गृहकार्य
→ गृह का कार्य
वनवास
→ वन में वास
ऋणमुक्त
→ ऋण से मुक्त
यदि ऐसा संबंध बन रहा है, तो वह तत्पुरुष समास हो सकता है।
3. कर्मधारय समास
जिस समास में पहला पद दूसरे पद की विशेषता बताता है और दोनों पद मिलकर एक ही वस्तु या व्यक्ति का बोध कराते हैं, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।
सरल शब्दों में—
विशेषण + विशेष्य = कर्मधारय समास
उदाहरण
नीलकमल
नीला = विशेषण
कमल = विशेष्य
अर्थ → नीला कमल
इसलिए नीलकमल कर्मधारय समास है।
कर्मधारय समास के 10 उदाहरण
| क्रम | समस्त पद | विग्रह |
|---|---|---|
| 1 | नीलकमल | नीला कमल |
| 2 | महापुरुष | महान पुरुष |
| 3 | महादेव | महान देव |
| 4 | कालीमिर्च | काली मिर्च |
| 5 | लालगुलाब | लाल गुलाब |
| 6 | मधुरवाणी | मधुर वाणी |
| 7 | श्वेतवस्त्र | श्वेत वस्त्र |
| 8 | विशालभवन | विशाल भवन |
| 9 | शुभदिन | शुभ दिन |
| 10 | चंद्रमुख | चंद्रमा के समान मुख |
पहचानने की ट्रिक
अपने आप से पूछें—
पहला शब्द दूसरे शब्द की विशेषता बता रहा है क्या?
यदि उत्तर हाँ है, तो कर्मधारय समास हो सकता है।
उदाहरण :
लालगुलाब
गुलाब कैसा है? → लाल
विशालभवन
भवन कैसा है? → विशाल
इसलिए ये कर्मधारय समास हैं।
4. द्वंद्व समास
जिस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं और उनके बीच और, तथा, या आदि शब्द लगाए जा सकते हैं, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।
उदाहरण
माता-पिता
विग्रह → माता और पिता
यहाँ माता और पिता दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
द्वंद्व समास के 10 उदाहरण
| क्रम | समस्त पद | विग्रह |
|---|---|---|
| 1 | माता-पिता | माता और पिता |
| 2 | राम-लक्ष्मण | राम और लक्ष्मण |
| 3 | सुख-दुःख | सुख और दुःख |
| 4 | दिन-रात | दिन और रात |
| 5 | राग-द्वेष | राग और द्वेष |
| 6 | नर-नारी | नर और नारी |
| 7 | जीवन-मरण | जीवन और मरण |
| 8 | लाभ-हानि | लाभ और हानि |
| 9 | पाप-पुण्य | पाप और पुण्य |
| 10 | अन्न-जल | अन्न और जल |
पहचानने की ट्रिक
दोनों शब्दों के बीच ‘और’ लगाकर देखें।
माता-पिता
→ माता और पिता
सुख-दुःख
→ सुख और दुःख
लाभ-हानि
→ लाभ और हानि
यदि अर्थ ठीक बनता है, तो द्वंद्व समास है।
5. द्विगु समास
जिस समास में पहला पद संख्यावाचक होता है और उससे किसी समूह या संख्या का बोध होता है, उसे द्विगु समास कहते हैं।
उदाहरण
त्रिलोक
त्रि = तीन
लोक = लोक
अर्थ → तीन लोकों का समूह
इसलिए यह द्विगु समास है।
द्विगु समास के 10 उदाहरण
| क्रम | समस्त पद | विग्रह |
|---|---|---|
| 1 | त्रिलोक | तीन लोकों का समूह |
| 2 | पंचवटी | पाँच वटों का समूह |
| 3 | त्रिकोण | तीन कोणों का समूह |
| 4 | चौराहा | चार राहों का समूह |
| 5 | सप्तर्षि | सात ऋषियों का समूह |
| 6 | त्रिवेणी | तीन नदियों का संगम |
| 7 | चतुष्पथ | चार पथों का समूह |
| 8 | नवरात्र | नौ रातों का समूह |
| 9 | दशानन | दस आननों वाला |
| 10 | त्रिकाल | तीन कालों का समूह |
पहचानने की ट्रिक
समस्त पद का पहला शब्द देखें।
यदि वह एक, दो, तीन, चार, पाँच, सात, नौ, दस आदि संख्या का बोध करा रहा है, तो वह द्विगु समास हो सकता है।
उदाहरण :
पंचवटी → पाँच वटों का समूह
त्रिकोण → तीन कोणों का समूह
नवरात्र → नौ रातों का समूह
6. बहुव्रीहि समास
जिस समास में दोनों में से कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि पूरा समस्त पद किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु की विशेषता बताता है, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।
यह समास विद्यार्थियों को थोड़ा कठिन लगता है, इसलिए इसे एक सरल उदाहरण से समझते हैं।
उदाहरण
नीलकंठ
नीला है कंठ जिसका → नीलकंठ
यहाँ नीलकंठ का अर्थ केवल ‘नीला कंठ’ नहीं है, बल्कि भगवान शिव से है।
अर्थात समस्त पद किसी अन्य व्यक्ति की ओर संकेत कर रहा है।
इसलिए यह बहुव्रीहि समास है।
बहुव्रीहि समास के 10 उदाहरण
| क्रम | समस्त पद | विग्रह |
|---|---|---|
| 1 | नीलकंठ | नीला है कंठ जिसका |
| 2 | दशानन | दस हैं आनन जिसके |
| 3 | चतुर्भुज | चार हैं भुजाएँ जिसकी |
| 4 | लंबोदर | लंबा है उदर जिसका |
| 5 | त्रिनेत्र | तीन हैं नेत्र जिसके |
| 6 | श्वेतांबर | श्वेत हैं अंबर जिसके |
| 7 | पीतांबर | पीला है अंबर जिसका |
| 8 | एकदंत | एक है दाँत जिसका |
| 9 | दीनबंधु | दीनों का बंधु जो है |
| 10 | चक्रपाणि | हाथ में चक्र है जिसके |
पहचानने की ट्रिक
अपने आप से पूछें—
क्या यह पूरा शब्द किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु की विशेषता बता रहा है?
यदि हाँ, तो यह बहुव्रीहि समास हो सकता है।
उदाहरण :
लंबोदर
लंबा है उदर जिसका → गणेश जी
यहाँ ‘लंबोदर’ किसी व्यक्ति अर्थात गणेश जी की विशेषता बता रहा है।
छहों समास की पहचान :
| समास | पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| अव्ययीभाव | पहला पद अव्यय | प्रतिदिन |
| तत्पुरुष | कारक-चिह्न का संबंध | राजपुत्र |
| कर्मधारय | विशेषण + विशेष्य | नीलकमल |
| द्वंद्व | दोनों पद प्रधान, ‘और’ का भाव | माता-पिता |
| द्विगु | पहला पद संख्यावाचक | पंचवटी |
| बहुव्रीहि | किसी अन्य व्यक्ति/वस्तु की विशेषता | नीलकंठ |
समास पहचानने की सबसे आसान ट्रिक
समास देखकर तुरंत उत्तर देने के बजाय पहले उसका विग्रह करें।
1. ‘और’ लग रहा है?
माता-पिता
→ माता और पिता
तो → द्वंद्व
2. पहला शब्द संख्या बता रहा है?
पंचवटी
→ पाँच वटों का समूह
तो → द्विगु
3. पहला शब्द दूसरे की विशेषता बता रहा है?
नीलकमल
→ नीला कमल
तो → कर्मधारय
4. ‘का, के, की, से, में’ आदि का संबंध है?
राजपुत्र
→ राजा का पुत्र
तो → तत्पुरुष
5. पूरा शब्द किसी अन्य व्यक्ति की विशेषता बता रहा है?
नीलकंठ
→ नीला है कंठ जिसका
तो → बहुव्रीहि
6. पहला पद अव्यय है?
प्रतिदिन
→ प्रत्येक दिन
तो → अव्ययीभाव
समास और विग्रह में अंतर
समस्त पद = छोटा करके बनाया गया शब्द
विग्रह = उस शब्द को खोलकर उसका पूरा अर्थ
उदाहरण
राजपुत्र → समस्त पद
राजा का पुत्र → विग्रह
नीलकमल → समस्त पद
नीला कमल → विग्रह
माता-पिता → समस्त पद
माता और पिता → विग्रह
परीक्षा उपयोगी प्रश्न
समास से परीक्षा में कई प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं—
1. समास का नाम बताइए।
माता-पिता → द्वंद्व समास
2. समास-विग्रह कीजिए।
राजपुत्र → राजा का पुत्र
3. विग्रह से समस्त पद बनाइए।
नीला कमल → नीलकमल
4. सही विकल्प चुनिए।
‘प्रतिदिन’ में कौन-सा समास है?
(क) द्वंद्व
(ख) तत्पुरुष
(ग) अव्ययीभाव
(घ) बहुव्रीहि
उत्तर — (ग) अव्ययीभाव
विद्यार्थियों के लिए याद रखने योग्य सार
समास को याद रखने के लिए यह छोटी-सी तालिका बहुत उपयोगी है—
अव्ययीभाव → पहला पद अव्यय
तत्पुरुष → का, के, की, से, में आदि का संबंध
कर्मधारय → विशेषण + विशेष्य
द्वंद्व → और का भाव
द्विगु → संख्या का भाव
बहुव्रीहि → किसी अन्य की विशेषता
कर्मधारय और बहुव्रीहि मेंअंतर
कर्मधारय और बहुव्रीहि में अक्सर विद्यार्थियों को भ्रम होता है।
इसे इस उदाहरण से समझें—
नीलकमल
नीला कमल → कमल ही नीला है।
इसलिए → कर्मधारय
नीलकंठ
नीला है कंठ जिसका → किसी अन्य व्यक्ति, अर्थात शिव, की विशेषता है।
इसलिए → बहुव्रीहि
याद रखें:
वस्तु स्वयं विशेषित हो → कर्मधारय
किसी अन्य व्यक्ति/वस्तु की विशेषता हो → बहुव्रीहि
समास क्यों पढ़ें?
समास केवल परीक्षा के लिए याद करने वाला विषय नहीं है। यह हिंदी भाषा को समझने में भी हमारी सहायता करता है।
समास के कारण—
- भाषा संक्षिप्त बनती है।
- कम शब्दों में अधिक अर्थ व्यक्त होता है।
- भाषा सुंदर और प्रभावशाली बनती है।
- शब्द-भंडार बढ़ता है।
- पढ़ने और लिखने की क्षमता बेहतर होती है।
- साहित्य को समझने में सहायता मिलती है।
- परीक्षा में व्याकरण के प्रश्न हल करना आसान होता है।
निष्कर्ष
समास हिंदी भाषा की संक्षिप्तता और सुंदरता का महत्वपूर्ण साधन है। जब दो या दो से अधिक शब्द मिलकर एक नया सार्थक शब्द बनाते हैं, तो समास का निर्माण होता है।
समास को कठिन मानने की आवश्यकता नहीं है। यदि हम पहले विग्रह करना सीख लें, तो समास पहचानना काफी आसान हो जाता है।
बस इन छह बातों को याद रखें—
अव्ययीभाव → अव्यय
तत्पुरुष → कारक-संबंध
कर्मधारय → विशेषण
द्वंद्व → और
द्विगु → संख्या
बहुव्रीहि → किसी अन्य की विशेषता
नियमों को समझकर उदाहरणों का अभ्यास करें। धीरे-धीरे समास पहचानना बहुत आसान हो जाएगा।
HindiFlorets पर हिंदी सीखिए, समझिए और अपनी भाषा को और समृद्ध बनाइए।
अभ्यास के लिए 10 शब्द
नीचे दिए गए शब्दों में समास पहचानने का प्रयास कीजिए—
- यथाशक्ति
- राजपुत्र
- नीलकमल
- माता-पिता
- पंचवटी
- नीलकंठ
- प्रतिदिन
- गृहकार्य
- महापुरुष
- त्रिनेत्र
उत्तर
- यथाशक्ति — अव्ययीभाव
- राजपुत्र — तत्पुरुष
- नीलकमल — कर्मधारय
- माता-पिता — द्वंद्व
- पंचवटी — द्विगु
- नीलकंठ — बहुव्रीहि
- प्रतिदिन — अव्ययीभाव
- गृहकार्य — तत्पुरुष
- महापुरुष — कर्मधारय
- त्रिनेत्र — बहुव्रीहि




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