सखी री! तू माने ना माने
सखी री! तू माने ना माने।
श्याम बहुत सतावैं मोको, लेके नए बहाने।
जित जित जाऊं उत उत तांकैं, ये हैं बहुत सयाने।
चकित चितवन इत उत देखूँ ,हौँ तो अति लजाने।
गोप गोपियां माखन खावैं, गावैं रास रचाने।
किंकर कुसुम कृष्ण छबि देखि, भाग्य मोरे सुहाने।

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poet Kusum Lata Joshi



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