’महावीर’ में समास// MAHAVEER ME SAMAS
आइए ! महावीर में समास जानते हैं कि महावीर शब्द का अर्थ है महान वीर । प्रथम पद- महा और उत्तर पद -वीर । वस्तुतः इस महावीर शब्द किसी वीर की विशेषता बताता है। महावीर शब्द का अर्थ है – जो वीरों में सबसे श्रेष्ठ हो। श्रेष्ठ योद्धाओं को भी महावीर नाम से संबोधित किया जाता है। यथा -हनुमान जी , जैनों के एक तीर्थंकर। अंग्रेजी में इसका अर्थ Brave or Great Worrier है।

इसीलिए कई बार लोग इस बात पर संदेह में रहते हैं कि महावीर में बहुव्रीहि समास है। जब ऐसा संदेह हो तो शब्द के विग्रह पर ध्यान देना चाहिए।
महावीर’ शब्द में कौन सा समास है?
A. कर्मधारय
B.द्विगु
C.तत्पुरुष
D.अव्ययीभाव
महावीर में समास जानने के लिए पहले इस शब्द का विग्रह करेंगे।
’महावीर” का समास विग्रह है – महान है जो वीर । अर्थात वीर की महानता बताई जा रही है। इसमें वीर की विशेषता महान कह कर बताई जा रही है। अत: वीर एक प्रधान पद है।
हम जानते हैं कि
” जिस समास के दो पदों में उत्तर पद प्रधान होता है और दोनों पदों में उपमेय-उपमान या विशेषण-विशेष्य का संबंध होता है। उसे कर्मधारय समास कहते हैं । “
अत: ’महावीर” में समास है- कर्मधारय समास ।
उत्तर : A. कर्मधारय
यदि महावीर शब्द का विग्रह इस प्रकार दिया गया है-
महावीर = महान वीर अर्थात हनुमान// 24वें जैन तीर्थंकर तो वहाँ बहुव्रीहि समास माना जाएगा। अन्यथा सामान्यतया महावीर में कर्मधारय समास ही होता है ।
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