
ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरान्तकारी…..
सनातन धर्म में प्रातः बेला का अत्यंत महत्त्व है। प्रातःकाल को ब्रह्म मुहुर्त माना जाता है। यह समय जप , ध्यान , प्रार्थना , यज्ञ, योग और पूजन वंदन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माना गया है । ब्रह्म मुहुर्त पर सत्व गुण की प्रधानता रहती है । ऐसे समय में भगवान की स्तुति से मन शांत और चित्त प्रसन्न रहता है। प्रातः उठ कर प्रार्थना करने से और ईश्वर का ध्यान करने से समस्त मनोरथ पूरे होते हैं। यहाँ पर प्रातः स्मरीय अति सुंदर स्तुति दी गई है जिसको रोज़ सुबह उठ कर पाठ करने से न केवल ईश्वर प्रसन्न होते है अपितु प्रकृति अपनी समस्त दिव्य शक्तियों के साथ हमारे कल्याण का आशीर्वाद देती है।
ब्रह्मामुरारिस्त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भुमिसुतोबधश्च।
गुरुश्च शुक्र: शनिराहुकेतवः कुर्वंतु सर्वे मम सुप्रभातं॥1
भृगुर्वशिष्ठः क्रतुरङ्गिराश्च मनुः पुलस्त्यः पुलहश्च गौतमः।
रैभ्यो मरीचिश्च्यवन्श्च दक्षः कुर्वंतु सर्वे मम सुप्रभातं॥2
सनत्कुमार: सनकः सनन्दन: सनातनोऽप्यासुरिपिङ्गलो च।
सप्त स्वराः सप्त रसातलानि कुर्वंतु सर्वे मम सुप्रभातं॥3
सप्तार्णवाः सप्तकुलाचलाश्च सप्तर्षयो द्वीपवनानि सप्तः।
भूरेदिकृत्वा भुवनानि सप्तः कुर्वंतु सर्वे मम सुप्रभातं॥ 4
पृथ्वी सगंधा सरसास्तथापःस्पर्शी च वायुर्ज्वलितम् च तेजः।
नभः सशब्दं महता सहैव कुर्वंतु सर्वे मम सुप्रभातं॥5
इत्थं प्रभाते परमं पवित्रं पठेत् समरेद्वा शृणुयाच्च भक्त्या।
दुःस्वप्ननाशस्त्विह सुप्रभातम् कुर्वंतु सर्वे मम सुप्रभातं॥6
उपरोक्त श्लोकों में प्रथम में प्रार्थना की गई है कि हे ब्रह्मा , मुरारि ( मुर नाम के राक्षस के शत्रु अर्थात विष्णु), और त्रिपुरासुर का अंत करने वाले शिव इन तीनो देवताओं के साथ ही साथ सूर्य , चंद्र ,मंगल, बुध , गुरु, शुक्र, शनि , राहु और केतु ये सभी नव ग्रह मेरा प्रभात मंगलमय करें।1।
दूसरे श्लोक मे भृगु, वशिष्ठ, क्रतु आंङ्गिरस, मनु, पुलस्त्य , पुलह , गौतम , रैभ्य, मरीचि, च्यवन और दक्ष इन बारह ऋषियों को स्मरण करते हुए उनसे प्रभात को मंगलमय करने की प्रार्थना की गई है। 2।
तृतीय श्लोक में सनत्कुमार, सनक, सननन्दन और सनातन इन चार ब्रह्मा जी के मानस पुत्रों को स्मरण किया गया है साथ ही सात स्वरों, सात रसातलों (पृथ्वी के नीचे के सात लोक) को स्मरण करते हुए उनसे प्रभात को मंगलमय करने की प्रार्थना की गई है।3।
चतुर्थ श्लोक में सात अर्णव अर्थात सात प्रकार के समुद्रों , , सात अचलों अर्थात पर्वतों के कुलों , सात ऋषियों (( तारा मांडल के सात ऋषि) सात द्वीपों , सात प्रकार के वनों , भूलोक सहित सात लोकों से प्रार्थना की है कि वे मेरे प्रभात को मंगलमय बनाएँ।4।
गंधयुक्त पृथ्वी, रस युक्त जल , स्पर्शयुक्त वायु , प्रज्ज्वलित तेज, शब्दसहित आकाश और महतत्त्व ये सभी मेरे मेरे प्रभात को मंगलमय बनाएँ।5।
जो भी व्यक्ति भक्तिपूर्वक प्रातःकाल में इन परम पवित्र श्लोकों का पाठ करता है अथवा स्मरण करता है अथवा किसी से सुनता है, भगवान के आशिर्वाद से उसके दुःस्वप्न का नाश होता है और उसका मे प्रभात मंगलमय हो जाता है ।6।
नोट : उपरोक्त श्लोक वामन पुराण से उद्धृत किए गए हैं।




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