संकटनाशन गणेशस्तोत्रम्

अग्र पूजनीय गणेश जी की स्तुति और साधना के अनेक तरीके बताये जाते हैं जो साधक के लिए बहुत उपयोगी साबित होते हैं। भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं, विद्यादाता हैं, धन-संपत्ति देने वाले हैं, इस तरह गौरीपुत्र गणपति जीवन की हर परेशानी को दूर करने वाले हैं।श्री गणेश सुखकर्ता व दु:खहर्ता यानी सुख देने व दु:खों को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं। इसलिए भगवान गणेश हर काल में ही शुभ और मनचाहे फल देकर संकटमोचक देवता के रूप में भी पूजनीय हैं। उनकी उपासना करने से मनुष्य के सभी संकट मिट जाते हैं। अपने जीवन से हर संकट का नाश करने के लिए और समस्त यहाँ पर एक सरल उपाय संकटनाशन गणेशस्तोत्रम् बताया गया है।

प्रणम्यं शिरसां देवं गौरीपुत्र विनायकम्।

भक्तावासं स्मरेन्नित्मायु: कामार्थसिद्धये।।

प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदतं द्वितीयकंम्।

तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्।।

लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च।

सप्तमं विघ्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्टमम्।।

नवमं भालचद्रं च दशमं तु विनायकम।

एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननमं।।

द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्यं यं पठेन्नर:।

न च विघ्रभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो।।

विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनं।

पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम।।

जपेद्गणपतिस्तोत्रम षड्भिर्मासै: फलं लभेत।

संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय:।।

अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्य लिखित्वा य: समर्पयेत। 

तस्य विद्याभवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत:।।

प्रस्तुत स्तोत्र नारद पुराण से लिया गया है । इस स्तोत्र में गणेश जी के बारह नामों को संकलित किया गया है। यह सुंदर स्तोत्र देवर्षि नारद ने संसार के कष्टों के निवारण हेतु बताया है । अपनी कामनाओं की पूर्ति की चाह रखने वाले हर मनुष्य को श्रीगणेश के चित्र अथवा मूर्ति के आगे ‘संकटनाशन गणेश स्तोत्र’ का पाठ अवश्य ही करना चाहिए।जो भी व्यक्ति इस स्तोत्र का श्रद्धा पूर्वक पाठ करता है उसके सभी कार्य सिद्ध होते हैं। गणेश स्तोत्र का पाठ करने वाले की सभी मनोवांछित इच्छाएँ पूरी होती हैं। विद्यार्थी इसके प्रतिदिन पाठ से विद्या पाते हैं। धन की इच्छा रखने वालों को धन मिलता है। पुत्र की इच्छा रखने वाले को पुत्र प्राप्ति होती है और मोक्ष की इच्छा रखने वाले को मोक्ष प्राप्त होता है। इस स्तोत्र को प्रतिदिन तीन संध्याओं में छः माह तक पढ़ने से मनोवांछित कार्य सिद्ध हो जाता है।

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