NCERT Class 10 Hindi Chapter 10 Paragraph Based MCQs – Bade Bhai Sahab
गद्यांशों पर आधारित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखिए –
गद्यांश1.मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े, लेकिन केवल तीन दरज़े आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था, जब मैंने शुरू किया लेकिन तालीम जैसे महत्त्व के मामले में वह जल्दबाजी से काम लेना पसंद न करते थे। इस भवन की बुनियाद खूब मजबूत डालना चाहते थे, जिस पर आलीशान महल बन सके। एक साल का काम दो साल में करते थे। कभी-कभी तीन साल भी लग जाते थे। बुनियाद ही पुख्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने।
मैं छोटा था, वह बड़े थे। मेरी उम्र नौ साल की थी. वह चौदह साल के थे। उन्हें मेरी तम्बीह और निगरानी का पूरा और जन्मसिद्ध अधिकार था और मेरी शालीनता इसी में थी कि उनके हुक्म को कानून समझूँ ।
(क) छोटे भाई का मन पढ़ाई में क्यों नहीं लगता था क्योंकि उसे-
(i)खेलकूद में रूचि थी (ii)कहानियाँ पढ़ने में रुचि थी
(iii) पढ़ना नहीं आता था (iv)पढ़ाई से डर लगता था
(ख) छोटे भाई को क्या करने में आनंद आता था?
(i) खेलने में ii) मौज-मस्ती में
(iii)पतंग उड़ाने में (iv) उपरोक्त सभी
(ग) छोटा भाई अपने बड़े भाई साहब से डरता था, क्योंकि –
(i) वे खेलने पर डाँट-डपट करते थे। (ii) मारते-पीटते थे
(iii)खड़ा कर देते थे । (iv)उसे पढ़ने को कहते थे।
(घ)छोटे भाई को पढ़ना पहाड़ जैसा लगता था। यहाँ पर पहाड़ जैसा का अर्थ है –
(i)महान कार्य (ii) सरल कार्य
(iii) बहुत कठिन कार्य (iv) असंभव कार्य
(ङ) क्या देख कर छोटे भाई के प्राण सूख जाते थे ?
(i) प्रधानाध्यापक (ii) चारदीवारी की ऊँचाई
(iii) बड़े भाई साहब का रुद्र-रूप (iv) पढ़ाई का पाठ्यक्रम
(क) छोटे भाई का मन पढ़ाई में क्यों नहीं लगता था क्योंकि उसे-
(i)खेलकूद में रूचि थी (ii)कहानियाँ पढ़ने में रुचि थी
(iii) पढ़ना नहीं आता था (iv)पढ़ाई से डर लगता था
(ख) छोटे भाई को क्या करने में आनंद आता था?
(i) खेलने में ii) मौज-मस्ती में
(iii)पतंग उड़ाने में (iv) उपरोक्त सभी
(ग) छोटा भाई अपने बड़े भाई साहब से डरता था, क्योंकि –
(i) वे खेलने पर डाँट-डपट करते थे। (ii) मारते-पीटते थे
(iii)खड़ा कर देते थे । (iv)उसे पढ़ने को कहते थे।
(घ)छोटे भाई को पढ़ना पहाड़ जैसा लगता था। यहाँ पर पहाड़ जैसा का अर्थ है –
(i)महान कार्य (ii) सरल कार्य
(iii) बहुत कठिन कार्य (iv) असंभव कार्य
(ङ) क्या देख कर छोटे भाई के प्राण सूख जाते थे ?
(i) प्रधानाध्यापक (ii) चारदीवारी की ऊँचाई
(iii) बड़े भाई साहब का रुद्र-रूप (iv) पढ़ाई का पाठ्यक्रम
गद्यांश 2.मेरा जी पढ़ने में बिलकुल न लगता था। एक घंटा भी किताब लेकर बैठना पहाड़ जैसा था। मौका पाते ही होस्टल से मैदान में आ जाता और कभी कंकरियाँ उछालता, कभी कागज की तितलियाँ उड़ाता और कहीं कोई साथी मिल गया,तो पूछना ही क्या। कभी चारदीवारी पर चढ़कर नीचे कूद रहे हैं। कभी फाटक पर सवार, उसे आगे-पीछे चलाते हुए मोटरकार का आनंद उठा रहे हैं, लेकिन कमरे में आते ही भाई साहब का वह रुद्र-रूप देखकर प्राण सूख जाते। उनका पहला सवाल यह होता- ”कहाँ थे?’ हमेशा यही सवाल, इसी ध्वनि में हमेशा पूछा जाता था और इसका जवाब मेरे पास केवल मौन था। न जाने मेरे मुँह से यह बात क्यों न निकलती कि जरा बाहर खेल रहा था। मेरा मौन कह देता था कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है और भाई- साहब के लिए उसके सिवा और कोई इलाज न था कि स्नेह और रोष से मिले हुए शब्दों में मेरा सत्कार करे।
(क) छोटे भाई का मन पढ़ाई में क्यों नहीं लगता था क्योंकि उसे-
(i)खेलकूद में रूचि थी (ii)कहानियाँ पढ़ने में रुचि थी
(iii) पढ़ना नहीं आता था (iv)पढ़ाई से डर लगता था
(ख) छोटे भाई को क्या करने में आनंद आता था?
(i) खेलने में ii) मौज-मस्ती में
(iii)पतंग उड़ाने में (iv) उपरोक्त सभी
(ग) छोटा भाई अपने बड़े भाई साहब से डरता था, क्योंकि –
(i) वे खेलने पर डाँट-डपट करते थे। (ii)मारते थे
(iii)खड़ा कर देते थे । (iv)उसे पढ़ने को कहते थे।
(घ)छोटे भाई को पढ़ना पहाड़ जैसा लगता था। यहाँ पर ”पहाड़ जैसा” का अर्थ है –
(i)महान कार्य (ii) सरल कार्य
(iii) बहुत कठिन कार्य (iv) असंभव कार्य
(ङ) क्या देख कर छोटे भाई के प्राण सूख जाते थे ?
(i) प्रधानाध्यापक (ii) चारदीवारी की ऊँचाई
(iii) बड़े भाई साहब का रौद्र रूप (iv) पढ़ाई का पाठ्यक्रम
गद्यांश 3:मेरा टाइम-टेबिल बना लेना एक बात है, उसपर अमल करना दूसरी बात। पहले ही दिन उसकी अवहेलना शुरू हो जाती । मैदान की वह सुखद हरियाली, हवा के हलके-हलके झोंके, फुटबॉल की वह उछल-कूद , कबड्डी के वह दाँव-घात , वॉलीबाल की वह तेज़ी और फुरती, मुझे अज्ञात और अनिवार्य रूप से खींच ले जाती और वहाँ जाते ही मैं सब कुछ भूल जाता। वह जानलेवा टाइम-टेबिल, वह आँख-फोड़ पुस्तकें, किसी की याद न रहती और भाई साहब को नसीहत और फ़जीहत का अवसर मिल जाता। मैं उनके साए से भागता, उनकी आँखों से दूर रहने की चेष्टा करता, कमरे में इस तरह दबे पाँव आता कि उन्हें खबर न हो। उनकी नज़र मेरी ओर उठी और मेरे प्राण निकले। हमेशा सिर पर एक नंगी तलवार सी लटकती मालूम होती। फिर भी जैसे मौत और विपत्ति के बीच भी आदमी मोह और माया के बंधन में जकड़ा रहता है, मैं फटकार और घुड़कियाँ खाकर भी खेल-कूद का तिरस्कार न कर सकता था।
प्रश्न 1: लेखक के अनुसार, टाइम-टेबिल बनाने और उस पर अमल करने में क्या अंतर है?
a) दोनों एक ही बात हैं
b) टाइम-टेबिल बनाना आसान है, लेकिन उस पर अमल करना मुश्किल
c) दोनों ही मुश्किल हैं
d) अमल करना आसान है, लेकिन टाइम-टेबिल बनाना मुश्किल
उत्तर: b) टाइम-टेबिल बनाना आसान है, लेकिन उस पर अमल करना मुश्किल
प्रश्न 2: लेखक को मैदान की किस-किस चीज़ से अनिवार्य रूप से खींचा जाता है?
a) किताबें और नसीहत
b) टाइम-टेबिल और फजीहत
c) हरियाली, हवा, फुटबॉल, कबड्डी, और वॉलीबाल
d) नसीहत और घुड़की
उत्तर: c) हरियाली, हवा, फुटबॉल, कबड्डी, और वॉलीबाल
प्रश्न 3: लेखक किससे बचने की कोशिश करता है?
a) खेलने से
b) भाई साहब की नसीहत और फजीहत से
c) टाइम-टेबिल बनाने से
d) पढ़ाई से
उत्तर: b) भाई साहब की नसीहत और फजीहत से
प्रश्न 4: लेखक खेल-कूद के प्रति अपने मोह को किस प्रकार वर्णित करता है?
a) खेल-कूद से बिल्कुल भी मोह नहीं था
b) फटकार और घुड़की खाने के बाद भी खेल-कूद का तिरस्कार नहीं कर सकता था
c) खेल-कूद से नफरत करता था
d) खेल-कूद से डरता था
उत्तर: b) फटकार और घुड़की खाने के बाद भी खेल-कूद का तिरस्कार नहीं कर सकता था
प्रश्न 5: सिर पर एक नंगी तलवार सी लटकने का अर्थ है —
(a)जान का खतरा होना
(b) लड़ने के लिए तलवार निकालना
(c)हिम्मत हारना
(d) तलवार ले कर घूमना




Leave a Reply